खेजड़ी (Prosopis cineraria): भारत में कहाँ उगती है और इसे कैसे लगाएँ
Prosopis cineraria
खेजड़ी (Prosopis cineraria), जिसे शमी या जंड भी कहते हैं, भारत के शुष्क उत्तर-पश्चिम का देसी पेड़ है: यह भीषण गर्मी में भी हरी रहती है, मिट्टी को उपजाऊ बनाती है और सांगरी व चारा देती है। जानिए इसे कैसे पहचानें, भारत में यह कहाँ उगती है, इसे कब और कैसे लगाएँ, पहले तीन साल कैसे सँभालें, और बिश्नोई समाज के लिए यह क्यों ख़ास है।
खेजड़ी कैसे लगाएँ
खेजड़ी को मानसून की बारिश के साथ नर्सरी के पौधे के रूप में पूरी धूप और अच्छी जल-निकासी वाली मिट्टी में लगाएँ, और चरने वाले पशुओं से बचाएँ।
कब लगाएँ
उत्तर-पश्चिम और उत्तर के मैदानों में अच्छा समय लगभग जुलाई से अगस्त है, जब मानसून की बारिश नन्हे पौधे को मज़बूत मूसला जड़ (सीधी गहराई में जाने वाली मुख्य जड़) बनाने में मदद करती है (ICAR-CIAH: छोटे पौधे मानसून के दौरान ही मज़बूत मूसला जड़ बना लेते हैं)। नर्सरी के पौधों के साथ सितंबर से अक्टूबर भी ठीक है, बशर्ते पहले सूखे मौसम में पानी दिया जाए। मोटे नियम के तौर पर, बारिश आने से पहले के गर्म, सूखे हफ़्तों में न लगाएँ। दूसरे सूखे इलाक़ों में वहाँ की बारिश के साथ लगाएँ (लगाने का कैलेंडर देखें)। महीने केवल अनुमान हैं।
पौधा कैसा चुनें
नर्सरी का पौधा सबसे भरोसेमंद है; ICAR-CIAH के अनुसार खेजड़ी को कलम (कटिंग) से उगाना कठिन है। हमारा मोटा अनुमान (अध्ययन का आँकड़ा नहीं) यह है कि लगभग 7–12 महीने पुराना, 30–60 सेमी ऊँचा पौधा चुनें, जो गहरी थैली में उगा हो ताकि मूसला जड़ मुड़ी न हो। देख लें कि लेबल पर वनस्पति नाम Prosopis cineraria लिखा हो, Prosopis juliflora (विलायती बबूल) नहीं। अगर सांगरी जल्दी चाहिए, तो ICAR-CIAH की किस्म 'थार शोभा' के बडिंग वाले (ग्राफ़्टेड) पौधे एक विकल्प हैं (किस्में देखें)।
गड्ढा, दूरी और सुरक्षा
मोटा नियम: 45–60 सेमी लंबा-चौड़ा-गहरा गड्ढा खोदें और निकली मिट्टी में अच्छी सड़ी गोबर की खाद मिलाकर भरें। पौधे को उतनी ही गहराई पर लगाएँ जितना वह नर्सरी की थैली में था। ICAR-CIAH के अनुसार खेजड़ी को पास-पास बाड़ (हेज-रो) की तरह 2–4 मीटर की दूरी पर, या बागवानी और कृषि-वानिकी के लिए 4–10 मीटर की दूरी पर कतारों में लगाया जाता है; ICRAF घने रोपण के लिए शुरुआत में 2 × 2 मीटर की दूरी बताता है। ज़्यादा दूरी से पेड़ को पूरा फैलने और बीच में फ़सल उगाने की जगह मिलती है।
जहाँ बकरियाँ, ऊँट या दूसरे पशु पहुँच सकते हों, वहाँ नए पौधे को ट्री-गार्ड या बाड़ से तब तक बचाएँ जब तक उसका ऊपरी हिस्सा पशुओं की पहुँच से ऊपर न हो जाए: ICRAF के अनुसार छोटे पौधों को बकरियों और दूसरे चरने वाले पशुओं से बचाना ज़रूरी है। बाड़ वाले बगीचे में असल ख़तरे के हिसाब से तय करें।
पहले साल पानी (शुरुआती मोटा अनुमान)
यह तालिका केवल उत्तर-पश्चिम के सूखे इलाक़े में नए पौधे के लिए शुरुआती मार्गदर्शन है, अध्ययन का आँकड़ा नहीं; ICAR-CIAH केवल इतना बताता है कि पौधा जमने के दौरान जीवन-रक्षक सिंचाई से बहुत अच्छी सफलता मिली। पहले मिट्टी की नमी जाँचें: जड़ वाले हिस्से की मिट्टी सूखने लगे तभी गहराई तक पानी दें; बारिश के बाद पानी कम करें या रोक दें। जड़ों के पास पानी जमा न रहने दें। रेतीली मिट्टी जल्दी सूखती है।
- जुलाई–सितंबर: आमतौर पर केवल बारिश के लंबे अंतराल में।
- अक्टूबर–फ़रवरी: लगभग हर 10–15 दिन में, अगर मिट्टी सूखी हो।
- मार्च–अप्रैल: लगभग हर हफ़्ते, अगर मिट्टी सूखी हो।
- मई–जून: लगभग हर 4–5 दिन में, सुबह जल्दी या शाम को, अगर मिट्टी सूखी हो।
यह लेख AI की सहायता से तैयार किया गया है और GreenEye टीम ने इसे हर भाग में दिए गए स्रोतों से जाँचा है।
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