खेजड़ी (Prosopis cineraria): राजस्थान का राज्य वृक्ष और जयपुर में इसे कैसे उगाएँ
Prosopis cineraria
खेजड़ी राजस्थान का राज्य वृक्ष है: यह भीषण गर्मी में भी हरी रहती है, मिट्टी को उपजाऊ बनाती है और सांगरी व चारा देती है। जानिए जयपुर में इसे कब और कैसे लगाएँ, पहले तीन साल कैसे सँभालें, और बिश्नोई समाज के लिए यह क्यों ख़ास है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या मेरी खेजड़ी जयपुर की गर्मी झेल पाएगी?
हाँ। यह भारत के सबसे ज़्यादा गर्मी और सूखा सहने वाले पेड़ों में से है। पहले दो सूखे मौसमों में हम इसे पानी देते हैं और ट्री-गार्ड से बचाते हैं।
मेरा पेड़ इतना धीरे क्यों बढ़ रहा है?
खेजड़ी पहले अपनी जड़ें ज़मीन में गहराई तक भेजती है, इसलिए शुरुआती कुछ सालों में ऊपर से धीरे बढ़ती है। यह सामान्य है।
सांगरी कब मिलेगी?
बीज से उगे पेड़ आमतौर पर 10–15 साल लेते हैं; ग्राफ़्टेड (बडिंग वाली) किस्में 3–4 साल में फलियाँ देने लगती हैं।
क्या खेजड़ी और काँटेदार "विलायती बबूल" एक ही हैं?
नहीं। खेजड़ी देसी पेड़ है; विलायती बबूल (Prosopis juliflora) एक विदेशी आक्रामक झाड़ी है। हम केवल असली खेजड़ी लगाते हैं।
राजस्थान में खेजड़ी ख़ास क्यों है?
यह राज्य वृक्ष है, सूखे में लोगों और पशुओं का सहारा है, और बिश्नोई समाज इसका सम्मान करता है, जिसके लोगों ने 1730 में खेजड़ली में इसकी रक्षा के लिए प्राण दिए।
यह लेख AI की सहायता से तैयार किया गया है। महत्वपूर्ण जानकारी की पुष्टि हर भाग में दिए गए स्रोतों से करें।
ऐसा पेड़ लगाएं जिसे आप ट्रैक कर सकें
GreenEye की ज़मीन पर एक पेड़ लगाएं और उसे बढ़ते हुए ट्रैक करें।
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