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पौधादेशी पेड़पवित्र वृक्ष

खेजड़ी (Prosopis cineraria): राजस्थान का राज्य वृक्ष और जयपुर में इसे कैसे उगाएँ

Prosopis cineraria

खेजड़ी राजस्थान का राज्य वृक्ष है: यह भीषण गर्मी में भी हरी रहती है, मिट्टी को उपजाऊ बनाती है और सांगरी व चारा देती है। जानिए जयपुर में इसे कब और कैसे लगाएँ, पहले तीन साल कैसे सँभालें, और बिश्नोई समाज के लिए यह क्यों ख़ास है।

सांस्कृतिक महत्व

खेजड़ी राजस्थान का राज्य वृक्ष है, और 1988 में भारतीय डाक ने इस पर डाक टिकट जारी किया। शमी के रूप में हिंदू परंपरा में इसका आध्यात्मिक महत्व है: रामायण और महाभारत में शमी-पूजा का वर्णन मिलता है, और यज्ञ की पवित्र अग्नि जलाने में इसकी लकड़ी का उपयोग होता था। राजस्थान के कुछ हिस्सों में जन्माष्टमी पर खेजड़ी की हरी टहनियों की पूजा होती है।

बिश्नोई समाज गुरु जंभेश्वर की सीख पर चलते हुए हरे पेड़ों और वन्यजीवों की रक्षा करता है। 1730 में जोधपुर के पास खेजड़ली गाँव में अमृता देवी बिश्नोई और उनकी तीन बेटियों ने जोधपुर के शासक के निर्माण कार्य के लिए खेजड़ी के पेड़ काटे जाने से रोकने की कोशिश में अपने प्राण दे दिए। उनके बाद और भी बहुत से बिश्नोई आगे आए; आमतौर पर यह संख्या 363 बताई जाती है। राजस्थान सरकार के अनुसार इसी बलिदान ने आगे चलकर 1970 के दशक के चिपको आंदोलन को प्रेरणा दी।

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