खेजड़ी (Prosopis cineraria): राजस्थान का राज्य वृक्ष और जयपुर में इसे कैसे उगाएँ
Prosopis cineraria
खेजड़ी राजस्थान का राज्य वृक्ष है: यह भीषण गर्मी में भी हरी रहती है, मिट्टी को उपजाऊ बनाती है और सांगरी व चारा देती है। जानिए जयपुर में इसे कब और कैसे लगाएँ, पहले तीन साल कैसे सँभालें, और बिश्नोई समाज के लिए यह क्यों ख़ास है।
पहले तीन साल की देखभाल
मानसून (जुलाई–सितंबर). पौधे के चारों ओर थाली जैसा थावला बनाएँ। शुरुआत में बढ़त धीमी होती है, इसलिए पहले साल दो-तीन बार निराई करें; बाद में हल्की निराई काफ़ी है।
मानसून के बाद (अक्टूबर–नवंबर). थावले में 5–8 सेमी सूखी घास या पत्तियों की मल्चिंग करें। पहले साल हर 10–15 दिन, दूसरे साल हर 2–3 हफ़्ते, और तीसरे साल केवल लंबे सूखे में पानी दें।
सर्दी (दिसंबर–फ़रवरी). खेजड़ी को पाले से शायद ही कोई दिक्कत होती है। दीमक पर नज़र रखें। दूसरे साल से हल्की छँटाई करें ताकि तना सीधा बने।
वसंत (मार्च–अप्रैल). पहले साल हर हफ़्ते और दूसरे साल हर 10–14 दिन में पानी दें। तीसरे साल तक पेड़ ज़्यादातर बारिश के भरोसे चल जाता है।
गर्मी (मई–जून). यह सबसे नाज़ुक समय है: पहले साल हर 4–5 दिन और दूसरे साल हर 7–10 दिन में पानी दें। तीसरे साल केवल भारी सूखे में पानी दें।
कीट. सबसे बड़ा ख़तरा चरने वाले पशु हैं। तना और जड़ छेदक कीड़ों, मिलीबग और परजीवी बेल अमरबेल (Cuscuta) पर भी नज़र रखें; अमरबेल को हाथ से हटा दें। पहले तीन साल चारे के लिए पेड़ की कटाई-छँटाई (लोपिंग) न करें।
धीरज रखें
खेजड़ी पहले अपनी जड़ें गहराई तक भेजती है। बीज से उगे पौधे चार साल में केवल 1–2 मीटर तक पहुँच सकते हैं, और सुरक्षित पौधे लगभग 4–5 साल में आकार लेते हैं।
यह लेख AI की सहायता से तैयार किया गया है। महत्वपूर्ण जानकारी की पुष्टि हर भाग में दिए गए स्रोतों से करें।
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