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पौधादेशी पेड़पवित्र वृक्ष

खेजड़ी (Prosopis cineraria): राजस्थान का राज्य वृक्ष और जयपुर में इसे कैसे उगाएँ

Prosopis cineraria

खेजड़ी राजस्थान का राज्य वृक्ष है: यह भीषण गर्मी में भी हरी रहती है, मिट्टी को उपजाऊ बनाती है और सांगरी व चारा देती है। जानिए जयपुर में इसे कब और कैसे लगाएँ, पहले तीन साल कैसे सँभालें, और बिश्नोई समाज के लिए यह क्यों ख़ास है।

लाभ

फ़ायदे

मिट्टी. खेजड़ी दलहनी पेड़ है जो नाइट्रोजन स्थिर करता है। इसकी छाँव के नीचे मिट्टी में जैविक पदार्थ, नाइट्रोजन, फ़ॉस्फ़ोरस और कैल्शियम बढ़ते हैं।

भोजन और चारा. कच्ची फलियाँ (सांगरी) राजस्थान की जानी-मानी सब्ज़ी हैं और पंचकूटा का मुख्य हिस्सा हैं; पकी सूखी फलियाँ (खोखा) भी खाई जाती हैं। पत्तियाँ (लूँग) पौष्टिक चारा हैं जिन्हें पशु चाव से खाते हैं, ख़ासकर सर्दियों में जब दूसरा हरा चारा कम मिलता है। बीज से उगे पेड़ आमतौर पर 10–15 साल में नियमित फलियाँ देने लगते हैं; ग्राफ़्टेड पौधे 3–4 साल में शुरू कर सकते हैं।

पानी और खेती. इसकी गहरी मूसला जड़ ज़मीन की गहरी नमी लेती है, इसलिए यह पास की फ़सलों से पानी के लिए होड़ नहीं करती।

छाया और जीव-जंतु. यह हल्की, छनी हुई छाया देती है और गर्मियों में भी हरी रहती है, जिससे लोगों, पशुओं और वन्यजीवों को आसरा मिलता है। इसके वसंत के फूल शहद के लिए अच्छे माने जाते हैं।

ज़मीन और लकड़ी. रेत के टीलों को थामने के लिए खेजड़ी लगाई जाती है। इसकी सख़्त, भारी लकड़ी खंभों, निर्माण और ईंधन में काम आती है।

पारंपरिक उपयोग. इसकी छाल, पत्तियाँ और फूल आयुर्वेद और लोक-चिकित्सा में पारंपरिक रूप से इस्तेमाल होते रहे हैं। यह केवल पारंपरिक उपयोग की जानकारी है, चिकित्सा सलाह नहीं।

  • मिट्टी का स्वास्थ्य: नाइट्रोजन स्थिर करने वाला दलहनी पेड़, जो अपनी छाँव के नीचे मिट्टी में जैविक पदार्थ, नाइट्रोजन, फ़ॉस्फ़ोरस और कैल्शियम बढ़ाता है।
  • चारा: इसकी पत्तियाँ (लूँग) स्वादिष्ट और पौष्टिक चारा हैं, ख़ासकर सर्दियों में जब दूसरा हरा चारा कम मिलता है।
  • खाद्य: कच्ची फलियाँ (सांगरी) राजस्थान की जानी-मानी सब्ज़ी हैं और पंचकूटा का हिस्सा हैं; पकी सूखी फलियाँ (खोखा) भी खाई जाती हैं।
  • जल संरक्षण: इसकी गहरी मूसला जड़ ज़मीन की गहरी नमी लेती है, इसलिए यह पास की फ़सलों से पानी के लिए होड़ नहीं करती।
  • छाया और ठंडक: हल्की, छनी हुई छाया देती है और गर्मियों में भी हरी रहती है, जिससे लोगों, पशुओं और वन्यजीवों को आसरा मिलता है।
  • परागणकर्ता: वसंत (मार्च–मई) में भरपूर फूल आते हैं, जो शहद के लिए अच्छे माने जाते हैं।
  • जैव विविधता: थार का एक अहम पेड़, जो गर्मियों में वन्यजीवों का सहारा बनता है।
  • इमारती लकड़ी: सख़्त, भारी लकड़ी खंभों, निर्माण, औज़ारों के हत्थों और ईंधन में काम आती है।
  • औषधीय: छाल, पत्तियाँ और फूल आयुर्वेद और लोक-चिकित्सा में पारंपरिक रूप से इस्तेमाल होते रहे हैं। यह केवल पारंपरिक उपयोग है, चिकित्सा सलाह नहीं।
  • सांस्कृतिक: राजस्थान का राज्य वृक्ष, शमी के रूप में पूजनीय, और बिश्नोई परंपरा व 1730 के खेजड़ली बलिदान से गहराई से जुड़ा।
  • अन्य: रेत के टीलों को थामने और बंजर ज़मीन सुधारने के लिए लगाई जाती है।

यह लेख AI की सहायता से तैयार किया गया है। महत्वपूर्ण जानकारी की पुष्टि हर भाग में दिए गए स्रोतों से करें।

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