खेजड़ी (Prosopis cineraria): राजस्थान का राज्य वृक्ष और जयपुर में इसे कैसे उगाएँ
Prosopis cineraria
खेजड़ी राजस्थान का राज्य वृक्ष है: यह भीषण गर्मी में भी हरी रहती है, मिट्टी को उपजाऊ बनाती है और सांगरी व चारा देती है। जानिए जयपुर में इसे कब और कैसे लगाएँ, पहले तीन साल कैसे सँभालें, और बिश्नोई समाज के लिए यह क्यों ख़ास है।
विषाक्तता
सावधानियाँ और सुरक्षा
- काँटे. इसकी डालियों पर काँटे होते हैं। इसे रास्तों और बच्चों के खेलने की जगह से दूर लगाएँ, और संभालते समय दस्ताने पहनें।
- विलायती बबूल नहीं. खेजड़ी को Prosopis juliflora (विलायती बबूल) से न मिलाएँ। यह एक विदेशी प्रजाति है जो थार के चरागाहों और ओरणों (पवित्र वनों) में फैल गई है। पक्का करें कि नर्सरी असली Prosopis cineraria दे रही है।
- विषाक्तता. पारंपरिक रूप से खाई जाने वाली फलियाँ ज़हरीली नहीं मानी जातीं, और पत्तियाँ व फलियाँ बकरी, ऊँट, गाय और भेड़ का मुख्य चारा हैं। लोक-मान्यता है कि ज़्यादा फल खाने से वह पचता नहीं। बिल्लियों और कुत्तों पर असर के बारे में जानकारी दर्ज नहीं है।
- जड़ से नए पौधे. ज़्यादा नमी वाले इलाक़ों में यह जड़ों से नए पौधे निकालकर फैल सकती है; जयपुर में यह बड़ा ख़तरा नहीं है।
- स्थायी जगह चुनें. राजस्थान में खेजड़ी काटने पर रोक है। फ़रवरी 2026 में राज्य ने खेजड़ी की कटाई पर पूरे प्रदेश में प्रतिबंध का आदेश दिया, और अगस्त 2026 में राज्य मंत्रिमंडल ने पेड़ों की सुरक्षा का एक विधेयक मंज़ूर किया जिसमें खेजड़ी शामिल है। इसे ऐसी जगह लगाएँ जहाँ यह हमेशा रह सके।
GreenEye के साथ किसी के नाम पर एक खेजड़ी लगाइए: पेड़ उपहार में दें
- मनुष्य
- विषैला नहीं
- पालतू और अन्य पशु
- सत्यापित नहीं — पालतू जानवरों या बच्चों के संपर्क में लाने से पहले जाँच लें
यह लेख AI की सहायता से तैयार किया गया है। महत्वपूर्ण जानकारी की पुष्टि हर भाग में दिए गए स्रोतों से करें।
ऐसा पेड़ लगाएं जिसे आप ट्रैक कर सकें
GreenEye की ज़मीन पर एक पेड़ लगाएं और उसे बढ़ते हुए ट्रैक करें।
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