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पौधादेशी पेड़पवित्र वृक्ष

खेजड़ी (Prosopis cineraria): भारत में कहाँ उगती है और इसे कैसे लगाएँ

Prosopis cineraria

खेजड़ी भारत के सूखे उत्तर-पश्चिम की देसी पेड़ है: यह भीषण गर्मी में भी हरी रहती है, मिट्टी को उपजाऊ बनाती है और सांगरी व चारा देती है। जानिए भारत में यह कहाँ उगती है, इसे कब और कैसे लगाएँ, पहले तीन साल कैसे सँभालें, और बिश्नोई समाज के लिए यह क्यों ख़ास है।

भारत में खेजड़ी कहाँ उगती है

खेजड़ी पश्चिम एशिया और भारतीय उपमहाद्वीप के शुष्क और अर्ध-शुष्क इलाक़ों की देसी पेड़ है: अरब प्रायद्वीप, ईरान, अफ़ग़ानिस्तान, पाकिस्तान और उत्तर-पश्चिम भारत। भारत में इसका घर उत्तर-पश्चिम का शुष्क इलाक़ा और थार रेगिस्तान है। ICAR-CIAH (बीकानेर) के अनुसार यह लगभग 50 °C तक की गर्मी, गर्म लू, पाला और भारी सूखा सह लेती है, और साल में केवल 75–450 मिमी बारिश में भी उग जाती है। CIAH के अनुसार यह 600 मीटर से कम ऊँचाई पर मैदानों, ऊबड़-खाबड़ ज़मीन और बीहड़ों में उगती है।

इलाक़े. उत्तर-पश्चिम का शुष्क इलाक़ा इसका अपना घर है: यहाँ जुलाई–अगस्त में मानसून के साथ, या पानी देने की व्यवस्था हो तो सितंबर–अक्टूबर में लगाएँ। उत्तर के मैदानों में ICAR-CIAH के अनुसार यह हरियाणा और पंजाब में बहुतायत में और दिल्ली, आगरा व पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आम है; मैदानों के सूखे पश्चिमी हिस्से में यह सबसे अच्छी रहती है।

दूसरी जगहों पर इसे देखभाल और सही जगह चाहिए। CIAH के अनुसार यह मध्य भारत के बुंदेलखंड क्षेत्र में, महाराष्ट्र (नासिक), आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के सबसे सूखे हिस्सों में, और सूखे तमिलनाडु (तूतीकोरिन) में मिलती है। इन इलाक़ों में इसे केवल सूखी, अच्छी निकासी वाली जगह पर लगाएँ: दक्षिणी प्रायद्वीप के वर्षा-छाया वाले भीतरी इलाक़ों में, और सूखे दक्षिणी पूर्वी तट पर अक्टूबर–नवंबर के उत्तर-पूर्वी मानसून के साथ। पूर्वी भारत CIAH के बताए सूखे क्षेत्र से बाहर है, इसलिए वहाँ इसे केवल ऊँची, अच्छी निकासी वाली धूप वाली जगह पर आज़माएँ।

पूर्वोत्तर, पश्चिमी तट और हिमालय में इसे लगाने की सलाह नहीं है। ICRAF के अनुसार इसकी प्राकृतिक जलवायु सूखी से शुष्क है और ख़राब जल-निकासी वाली मिट्टी उपयुक्त नहीं, इसलिए बहुत गीला पूर्वोत्तर और पश्चिमी तट की जून–सितंबर की भारी बारिश इसकी सीमा से बहुत बाहर है, और हिमालय उस कम ऊँचाई से ऊपर है जहाँ यह उगती है। हर इलाक़े के लिए लगाने के महीने लगाने के कैलेंडर में दिए गए हैं।

मिट्टी और धूप. खेजड़ी सबसे सूखे महीनों, मार्च से जून, में नई पत्तियाँ, फूल और फलियाँ देती है। यह क्षारीय मिट्टी सह लेती है (pH 9.8 तक की ज़मीन पर दर्ज), पर इसे पानी का अच्छा निकास चाहिए। कठोर परत के ऊपर की उथली मिट्टी या बहुत खारी मिट्टी में यह ठीक से नहीं बढ़ती। घनी छाया में इसके पौधे मर जाते हैं, इसलिए इसे केवल खुली धूप में लगाएँ।

स्रोत: Kew, World Checklist of Vascular Plants: Prosopis cineraria (via GBIF); ICRAF Agroforestree Database: Prosopis cineraria species profile; ICRAF Agroforestree Database PDF: Prosopis cineraria; Samadia D.K., Haldhar S.M. et al. (2021). Khejri (Prosopis cineraria) research for horticultural harnessing and environmental services: an appraisal. Journal of Agriculture and Ecology 12:1–26, ICAR-CIAH Bikaner; Samadia D.K., Haldhar S.M. et al. (2021). Khejri (Prosopis cineraria) research for horticultural harnessing and environmental services: an appraisal. Journal of Agriculture and Ecology 12:1-26 – ICAR-Central Institute for Arid Horticulture, Bikaner (SAAER journal)

यह लेख AI की सहायता से तैयार किया गया है। महत्वपूर्ण जानकारी की पुष्टि हर भाग में दिए गए स्रोतों से करें।

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