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सहजन (मोरिंगा): भारत में ड्रमस्टिक पेड़ कहाँ उगता है और कैसे लगाएँ

Moringa oleifera

सहजन (Moringa oleifera), जिसे अंग्रेज़ी में मोरिंगा या ड्रमस्टिक ट्री कहते हैं, तेज़ी से बढ़ने वाला देशी पेड़ है, जिसकी पत्तियाँ, फूल और फलियाँ पूरे भारत में पारंपरिक सब्ज़ी हैं। जानिए इसके हिंदी और क्षेत्रीय नाम, इसे कैसे पहचानें, यह कहाँ अच्छा उगता है, हर क्षेत्र के लिए लगाने के महीनों का अनुमान, घर के पेड़ और सालाना फली की फ़सल में क्या फ़र्क़ है, छोटे पौधों को पाले और जलभराव से कैसे बचाएँ, और यह बड़ा छायादार पेड़ क्यों नहीं, बल्कि भोजन देने वाला पेड़ है।

सहजन कैसे लगाएँ

सहजन तब लगाएँ जब स्थानीय बारिश से मिट्टी गीली हो जाए, धूप वाली और अच्छे जल-निकास वाली ऐसी जगह पर जहाँ पानी कभी न रुके; इसके लिए नर्सरी का स्वस्थ पौधा, बीज या डाल की कलम ले सकते हैं। घर का पेड़ और सालाना फली की फ़सल अलग-अलग तरीक़े से लगाए जाते हैं, जैसा नीचे बताया गया है।

कब लगाएँ

महीने केवल अनुमान हैं, पक्का नियम नहीं। TNAU के लेक्चर नोट्स के अनुसार लगाने का समय क्षेत्र के हिसाब से मानसून के आने पर बदलता है, और Feedipedia बारिश के मौसम की शुरुआत में ऐसी ऊँची ज़मीन पर बोने की सलाह देता है जहाँ पानी न भरे। स्थानीय बारिश से मिट्टी गीली हो जाए और जगह से पानी अच्छी तरह निकलता हो, तब लगाएँ।

घर का या बहुवर्षीय पेड़ (क्षेत्र के हिसाब से हमारा अनुमान): पूर्वी भारत और दक्षिणी प्रायद्वीप में जून–अगस्त; पूर्वोत्तर में मई–जुलाई; पश्चिमी तट पर जून–जुलाई (ऊँची, अच्छे जल-निकास वाली ज़मीन पर); और उत्तर-पश्चिम के शुष्क क्षेत्र, उत्तरी मैदानों, मध्य भारत, ओडिशा और आंध्र के तट तथा हिमालय की तलहटी में जुलाई–अगस्त। अक्टूबर–नवंबर केवल वहाँ के लिए है जहाँ मुख्य बारिश उत्तर-पूर्वी मानसून से होती है, जैसे तमिलनाडु का तट। जहाँ सर्दियाँ ठंडी होती हैं, वहाँ मानसून में लगाने से पौधे को पहले पाले से पहले कुछ महीने बढ़ने का समय मिलता है। सबसे ठंडे महीनों में न लगाएँ, और सबसे गर्म-सूखे हफ़्तों में तभी लगाएँ जब पक्का पानी दे सकें (व्यावहारिक सलाह)।

सालाना फली की फ़सल (TNAU की व्यावसायिक सलाह): TNAU Agritech तमिलनाडु में सालाना सहजन लगाने का मौसम जुलाई–अक्टूबर बताता है, और TNAU की सहजन पुस्तक दक्षिण भारत की परिस्थितियों में बोने के लिए सितंबर को सबसे अच्छा महीना बताती है, ताकि फूल आने का समय मानसून की बारिश से न टकराए। ये तारीख़ें PKM 1 और PKM 2 जैसी किस्मों की तमिलनाडु की खेती के लिए हैं, पूरे देश का कैलेंडर नहीं।

घर का या बहुवर्षीय पेड़ लगाना

  1. स्वस्थ नर्सरी पौधा चुनें, किसी भरोसेमंद नर्सरी से। लंबे समय के पेड़ के लिए स्थानीय बहुवर्षीय किस्म माँगें; PKM 1 जैसी फली वाली सालाना किस्में बीज से उगाई जाती हैं और बार-बार फ़सल के लिए नीचे तक काटी जाती हैं (TNAU)।
  2. धूप वाली और पानी निकलने वाली जगह चुनें, जहाँ पानी न भरता हो। तना नाज़ुक होता है (TNAU के लेक्चर नोट्स) और आँधी में डालियाँ टूट सकती हैं, इसलिए इसे इमारतों, रास्तों और बिजली के तारों से दूर रखें; दीवार से लगभग 3–4 मीटर की दूरी हमारा अनुमान है।
  3. गड्ढा खोदें। TNAU 45 × 45 × 45 सेमी के गड्ढे लेता है, जिन्हें ऊपरी मिट्टी में अच्छी सड़ी गोबर की खाद या कम्पोस्ट मिलाकर भरा जाता है (TNAU के लेक्चर नोट्स: प्रति गड्ढा 10 किलो; TNAU Agritech: सालाना सहजन के लिए प्रति गड्ढा 15 किलो)। दीमक वाली ज़मीन पर नीम की खली डालना व्यावहारिक सलाह है।
  4. उतनी ही गहराई पर लगाएँ जितना पौधा नर्सरी की थैली में था, तना मिट्टी में दबाए बिना।
  5. दूरी: TNAU के लेक्चर नोट्स बहुवर्षीय किस्मों के लिए 6 × 6 मीटर बताते हैं। घर के बग़ीचे में चारों ओर जगह वाला एक पेड़ काफ़ी है।
  6. बचाव करें: बकरियों और गायों से बचाने के लिए ट्री-गार्ड लगाएँ, और हवादार जगह पर डंडे का सहारा दें (व्यावहारिक सलाह)।

बहुवर्षीय किस्में 90–100 सेमी लंबी और 5–8 सेमी मोटी डाल की कलम से लगाई जाती हैं (TNAU के लेक्चर नोट्स); सहजन बीज से भी उगाया जा सकता है।

सालाना फली की फ़सल (TNAU की व्यावसायिक सलाह)

यह तमिलनाडु की व्यावसायिक खेती की सलाह है, घर के बग़ीचे की योजना नहीं। TNAU Agritech के अनुसार 45 × 45 × 45 सेमी के गड्ढे हर तरफ़ 2.0–2.5 मीटर की दूरी पर, हर गड्ढे में 15 किलो कम्पोस्ट या गोबर की खाद, और हर गड्ढे में 2.5–3 सेमी गहराई पर दो बीज (या पॉलीबैग में पौधे तैयार करके 35–40 दिन बाद रोपाई)। शाखाएँ बढ़ाने के लिए पौधे लगभग 75 सेमी पर ऊपर से तोड़े जाते हैं, और तुड़ाई के बाद लगभग तीन साल तक दोबारा फ़सल (रैटून) के लिए पौधों को लगभग 90 सेमी–1 मीटर तक काटा जाता है। अधिक घनी खेती में दूरी और कम होती है (जैसे PKM 1 के लिए 1.5 × 1.0 मीटर, या PKM 2 के लिए 1.2 × 1.2 मीटर)। खेत की फ़सल के लिए अपने कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) या राज्य के उद्यान विभाग से अपने इलाक़े की खेती-विधि पूछें।

यह लेख AI की सहायता से तैयार किया गया है और GreenEye टीम ने इसे हर भाग में दिए गए स्रोतों से जाँचा है।

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