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सहजन (मोरिंगा): भारत में ड्रमस्टिक पेड़ कहाँ उगता है और कैसे लगाएँ

Moringa oleifera

सहजन (मोरिंगा) तेज़ी से बढ़ने वाला देशी पेड़ है, जिसकी पत्तियाँ, फूल और फलियाँ पूरे भारत में पारंपरिक सब्ज़ी हैं। जानिए यह कहाँ अच्छा उगता है, हर क्षेत्र में इसे कब लगाएँ, छोटे पौधों को पाले और जलभराव से कैसे बचाएँ, और यह बड़ा छायादार पेड़ क्यों नहीं, बल्कि भोजन देने वाला पेड़ है।

भारत में सहजन कहाँ उगता है

मूल क्षेत्र। सहजन भारत और पाकिस्तान का देशी पेड़ है, जो उत्तर-पश्चिम भारत के उप-हिमालयी इलाक़े में अपने आप उगता है। इसे इतने बड़े पैमाने पर लगाया गया है कि अब यह पूरे देश में जानी-पहचानी सब्ज़ी का पेड़ है। TNAU के पाठ्य-नोट्स इसे "मुख्य रूप से सूखे और शुष्क इलाक़ों की फ़सल" बताते हैं, और दक्षिण भारत के राज्यों में यह लोकप्रिय सब्ज़ी है।

क्षेत्र।

  • अच्छा उगता है: उत्तर-पश्चिम का शुष्क क्षेत्र, मध्य भारत, पूर्वी भारत, पूर्वी तट और दक्षिणी प्रायद्वीप। शुष्क पश्चिमी राजस्थान में कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर के 2022–24 के जालोर ज़िले (मिट्टी का pH 8.1) के परीक्षण में कई किस्में अच्छी तरह बढ़ीं और अच्छी पैदावार दी। दक्षिण में तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय ने फली वाली सालाना किस्में PKM 1 और PKM 2 जारी की हैं, और केरल कृषि विश्वविद्यालय ने बहुवर्षीय सहजन की किस्में (क्लोन) तैयार की हैं।
  • सावधानी के साथ (पाला): उत्तरी मैदान। TNAU के अनुसार पाला इस फ़सल को बहुत नुक़सान पहुँचाता है, इसलिए जुलाई–अगस्त में लगाएँ और पहली सर्दी में पाले वाली रातों में छोटे पौधों को ढकें।
  • सावधानी के साथ (जलभराव): पूर्वोत्तर और पश्चिमी तट। सहजन जलभराव सहन नहीं करता और ऊँचे जल-स्तर वाली जगह पर इसकी बढ़त रुक जाती है, इसलिए इन बहुत बारिश वाले क्षेत्रों में इसे केवल ऊँची या ढलान वाली, अच्छे जल-निकास वाली ज़मीन पर लगाएँ।
  • सावधानी के साथ (ऊँचाई): हिमालय की तलहटी। ICRAF के अनुसार यह 0–1,000 मीटर ऊँचाई तक उगता है, इसलिए इसे केवल लगभग 1,000 मीटर से नीचे की गर्म घाटियों और तलहटी में लगाएँ।

जलवायु। ICRAF के अनुसार यह "काफ़ी सूखा-सहनशील" है और इसे साल में कम से कम 500 मिमी बारिश चाहिए; इसका सालाना औसत तापमान दायरा 12.6–40 °C है, और TNAU के अनुसार सबसे अच्छी बढ़त 25–30 °C पर होती है। ठंड सबसे बड़ी सीमा है: कड़ा पाला छोटे सहजन को ज़मीन तक सुखा सकता है। आमतौर पर यह फिर से फूट आता है, पर जहाँ सर्दियों में पाला पड़ता है, वहाँ पहली सर्दी में पौधे को बचाना ज़रूरी है।

मिट्टी। TNAU Agritech के अनुसार 6.5–8 pH वाली गहरी बलुई दोमट मिट्टी आदर्श है, और Feedipedia बताता है कि अच्छे जल-निकास वाली मिट्टी में यह pH 4.5 से 9 तक की कई तरह की मिट्टी में अच्छा उगता है। अगर मिट्टी से पानी अच्छी तरह निकल जाए, तो यह क्षारीय मिट्टी सह लेता है। इसकी दूसरी कमज़ोरियाँ हैं आसानी से टूटने वाली डालियाँ और जलभराव न सह पाना।

स्रोत: Kew, World Checklist of Vascular Plants: Moringa oleifera; Orwa C. et al. (2009), Agroforestree Database 4.0 (ICRAF): Moringa oleifera; TNAU Agritech Portal, "Annual Moringa"; TNAU / e-Agri HORT 281, Lecture 32, "Drumstick, Coccinea and Curry Leaf"; Saresh N.V. et al. (2025), "Evaluation of Moringa oleifera varieties for pod yield and spacing in arid western Rajasthan, India", Plant Archives; Feedipedia, "Moringa (Moringa oleifera)"; Kamanga et al. (2026), "Cold Stress Responses and Adaptation Mechanisms in Moringa oleifera", Plants; Soares et al. (2023), "Chilling and freezing stress tolerance in Moringa oleifera", Scientia Horticulturae; CABI Compendium, Moringa oleifera; HC&RI Periyakulam: varieties released (Annual Moringa PKM 1, PKM 2) – Tamil Nadu Agricultural University

यह लेख AI की सहायता से तैयार किया गया है। महत्वपूर्ण जानकारी की पुष्टि हर भाग में दिए गए स्रोतों से करें।

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