कचनार (Bauhinia variegata): जयपुर में कैसे लगाएँ और इसकी कलियों का उपयोग
Bauhinia variegata
कचनार वह ऑर्किड जैसे फूलों वाला पेड़ है जो सर्दी के आख़िर में बिना पत्तों की डालियों पर फूलता है और जिसकी कलियों से कचनार की कली की सब्ज़ी बनती है। जानिए जयपुर की गर्मी और पाले में यह कैसे रहता है, इसे कब और कैसे लगाएँ, पहले तीन साल कैसे सँभालें, और मिलते-जुलते Bauhinia पेड़ों से इसे कैसे पहचानें।
विषाक्तता
सावधानियाँ
- छोटे पेड़ों को गर्मी में पानी चाहिए। जयपुर में कचनार के पौधे सूखने की यही सबसे बड़ी वजह है।
- वसंत में पत्ते नहीं रहते। जहाँ मार्च-अप्रैल में छाया चाहिए, वहाँ इस पर भरोसा न करें।
- मिलते-जुलते पेड़। कचनार नाम एक से ज़्यादा Bauhinia के लिए इस्तेमाल होता है। कलियाँ तोड़ने से पहले फूलने का मौसम और पाँच पुंकेसर ज़रूर देखें।
- सिला कीट कुछ सालों में पत्ते और फूल झाड़ सकता है।
- विदेशों में आक्रामक। दक्षिण फ़्लोरिडा और कुछ दूसरे गर्म इलाक़ों में यह जंगलों में फैल गया है। भारत में यह देसी पेड़ है, इसलिए यहाँ यह चिंता की बात नहीं।
- दूसरे हिस्से: छाल, फली या बीज खाने की सुरक्षा पर हमें भरोसेमंद जानकारी नहीं मिली। केवल पकी हुई कलियाँ और फूल ही खाएँ।
ग्रीनआई के साथ किसी के नाम पर पेड़ लगाइए: पेड़ उपहार में दें
- मनुष्य
- सत्यापित नहीं — पालतू जानवरों या बच्चों के संपर्क में लाने से पहले जाँच लें
- पालतू और अन्य पशु
- सत्यापित नहीं — पालतू जानवरों या बच्चों के संपर्क में लाने से पहले जाँच लें
यह लेख AI की सहायता से तैयार किया गया है। महत्वपूर्ण जानकारी की पुष्टि हर भाग में दिए गए स्रोतों से करें।
ऐसा पेड़ लगाएं जिसे आप ट्रैक कर सकें
GreenEye की ज़मीन पर एक पेड़ लगाएं और उसे बढ़ते हुए ट्रैक करें।
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