कचनार (Bauhinia variegata): जयपुर में कैसे लगाएँ और इसकी कलियों का उपयोग
Bauhinia variegata
कचनार वह ऑर्किड जैसे फूलों वाला पेड़ है जो सर्दी के आख़िर में बिना पत्तों की डालियों पर फूलता है और जिसकी कलियों से कचनार की कली की सब्ज़ी बनती है। जानिए जयपुर की गर्मी और पाले में यह कैसे रहता है, इसे कब और कैसे लगाएँ, पहले तीन साल कैसे सँभालें, और मिलते-जुलते Bauhinia पेड़ों से इसे कैसे पहचानें।
क्या कचनार जयपुर के लिए ठीक है?
यहाँ यह अच्छा चलता है, पर यह खेजड़ी या नीम की तरह रेगिस्तानी पेड़ नहीं है। इसका असली घर हिमालय की निचली और बीच की पहाड़ियाँ (लगभग 1,800 मीटर तक) और उत्तर, पूर्व व मध्य भारत के मैदान हैं। ICFRE के अनुसार यह गर्म-सूखी गर्मी और हल्की सर्दी वाले इलाक़ों का पेड़ है, जहाँ साल में 500 से 2,500 मिमी बारिश होती है, और 500 मिमी से कम बारिश वाले शुष्क इलाक़ों में यह आमतौर पर नहीं मिलता।
जयपुर में औसतन लगभग 600 मिमी बारिश होती है (IMD का 1991–2020 का सामान्य आँकड़ा), यानी हम कचनार की पसंद के सूखे छोर पर हैं। यहाँ की गर्मी भी ज़्यादा कड़ी है: मई में दोपहर का औसत तापमान 41 °C रहता है और शहर 48.5 °C तक छू चुका है। इसलिए जयपुर में छोटे कचनार को पहली दो-तीन गर्मियों तक पानी देना पड़ता है। जड़ें जम जाने के बाद ICFRE और ICRAF दोनों इसे काफ़ी हद तक सूखा सहने वाला मानते हैं।
ठंड की चिंता कम है। ICFRE इसे पाला सहने वाला बताता है; ICRAF के अनुसार तेज़ पाले से छोटे पौधों के पत्ते झुलस सकते हैं, पर वे फिर से निकल आते हैं। जयपुर में सबसे कम तापमान −2.2 °C दर्ज हुआ है और सामान्य सर्दी में लगभग छह दिन शीतलहर रहती है, इसलिए पहली सर्दी की सबसे ठंडी रातों में हल्का ढकना काफ़ी है।
यह अच्छे निकास वाली रेतीली दोमट मिट्टी में सबसे अच्छा बढ़ता है और कंकरीली, पथरीली ज़मीन भी झेल लेता है, इसलिए जयपुर की रेतीली मिट्टी इसे जमती है। बस ऐसी नीची जगह से बचें जहाँ बारिश का पानी भरता हो। कचनार उत्तर भारत के शहरों में बाग़ों और सड़कों का जाना-पहचाना पेड़ है, और eFlora of India में इसके रिकॉर्ड जयपुर और दिल्ली दोनों से हैं।
यह लेख AI की सहायता से तैयार किया गया है। महत्वपूर्ण जानकारी की पुष्टि हर भाग में दिए गए स्रोतों से करें।
ऐसा पेड़ लगाएं जिसे आप ट्रैक कर सकें
GreenEye की ज़मीन पर एक पेड़ लगाएं और उसे बढ़ते हुए ट्रैक करें।
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