कचनार (Bauhinia variegata): जयपुर में कैसे लगाएँ और इसकी कलियों का उपयोग
Bauhinia variegata
कचनार वह ऑर्किड जैसे फूलों वाला पेड़ है जो सर्दी के आख़िर में बिना पत्तों की डालियों पर फूलता है और जिसकी कलियों से कचनार की कली की सब्ज़ी बनती है। जानिए जयपुर की गर्मी और पाले में यह कैसे रहता है, इसे कब और कैसे लगाएँ, पहले तीन साल कैसे सँभालें, और मिलते-जुलते Bauhinia पेड़ों से इसे कैसे पहचानें।
लाभ
- सजावटी: जनवरी के अंत से अप्रैल तक बिना पत्तों की डालियों पर बड़े, ख़ुशबूदार गुलाबी, बैंगनी या सफ़ेद फूल; इसलिए सड़कों और बग़ीचों का पसंदीदा पेड़।
- खाद्य: कलियाँ, फूल और कोमल पत्ते सब्ज़ी के रूप में खाए जाते हैं; कलियों से कचनार की कली की सब्ज़ी, करी और अचार बनता है। केवल असली कचनार की पकी हुई कलियाँ और फूल ही खाएँ।
- चारा: पत्ते अच्छा चारा हैं, जिन्हें भेड़, बकरी और गाय चाव से खाती हैं।
- परागणकर्ता: सर्दी के आख़िर के फूलों पर मधुमक्खियाँ आती हैं, हालाँकि ज़्यादा कलियाँ तोड़ने पर उनके लिए कम बचता है।
- इमारती लकड़ी: मध्यम सख़्त लकड़ी खेती के औज़ारों और ईंधन के काम आती है। ग्रीनआई के उपहार वाले पेड़ काटने के लिए नहीं लगाए जाते।
- अन्य: छाल से रेशा, भूरे रंग के लिए टैनिन और गोंद मिलता है।
- औषधीय: आयुर्वेद और लोक चिकित्सा में छाल और सूखी कलियों (कांचनार) का पारंपरिक उपयोग, जैसे दस्त और त्वचा की समस्याओं के नुस्ख़ों में। यह केवल पारंपरिक उपयोग है, चिकित्सा सलाह नहीं।
- छाया और ठंडक: फैला हुआ छत्र लगभग मई से दिसंबर तक हल्की छाया देता है; लगभग जनवरी से अप्रैल तक पेड़ बिना पत्तों के रहता है।
- सांस्कृतिक: संस्कृत में कोविदार; वाल्मीकि रामायण में भरत के ध्वज पर कोविदार वृक्ष का वर्णन है, और 25 नवंबर 2025 को अयोध्या के राम मंदिर पर फहराए गए धर्म ध्वज पर भी कोविदार वृक्ष कढ़ा है।
यह लेख AI की सहायता से तैयार किया गया है। महत्वपूर्ण जानकारी की पुष्टि हर भाग में दिए गए स्रोतों से करें।
ऐसा पेड़ लगाएं जिसे आप ट्रैक कर सकें
GreenEye की ज़मीन पर एक पेड़ लगाएं और उसे बढ़ते हुए ट्रैक करें।
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