भारत में अक्षय ऊर्जा प्रमाणपत्र (REC) क्या हैं
REC क्या है (1 MWh), CERC के REC विनियम 2022 और 2026 का संशोधन कैसे काम करते हैं, REC कार्बन क्रेडिट से कैसे अलग है, I-REC, हरित ओपन एक्सेस, ग्रीन टैरिफ़ और स्कोप 2।
I-REC क्या हैं?
I-REC, I-TRACK स्टैंडर्ड के तहत एक अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा गुण प्रमाणपत्र है, जिसकी देखरेख नीदरलैंड्स की I-TRACK फ़ाउंडेशन करती है। इसका बिजली वाला कोड, I-REC(E), 70 से ज़्यादा देशों में इस्तेमाल होता है (I-TRACK फ़ाउंडेशन, 2026)। बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ अक्सर वहाँ I-REC खरीदती हैं जहाँ कोई राष्ट्रीय व्यवस्था उनकी ज़रूरत पूरी नहीं करती।
भारत में CERC का REC ही नियंत्रित राष्ट्रीय साधन है। अगर आप भारतीय बिजली के लिए I-REC पर विचार करें, तो जाँचें कि उसी MWh पर CERC का REC जारी न हुआ हो या वह ग्रीन टैरिफ़ में न बिका हो, और आपका रिपोर्टिंग ढाँचा उसे स्वीकार करता हो।
स्रोत: CERC (Terms and Conditions for Renewable Energy Certificates for Renewable Energy Generation) Regulations, 2022; CERC: Notification on date of implementation of REC Regulations 2022; CERC REC (First Amendment) Regulations, 2026; CERC: Current Regulations index; PIB (Ministry of Power), 7 June 2022: Green Energy Open Access Rules; PIB (Ministry of Power), 19 July 2022: Green Energy Open Access Rules; PIB (Ministry of Power), 11 November 2022: Green Energy Open Access portal launched; GHG Protocol Scope 2 Guidance (2015); I-TRACK Foundation (I-REC Standard)
यह लेख AI की सहायता से तैयार किया गया है और GreenEye टीम ने इसे हर भाग में दिए गए स्रोतों से जाँचा है।
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