भारत में अक्षय ऊर्जा प्रमाणपत्र (REC) क्या हैं
REC क्या है (1 MWh), CERC के REC विनियम 2022 और 2026 का संशोधन कैसे काम करते हैं, REC कार्बन क्रेडिट से कैसे अलग है, I-REC, हरित ओपन एक्सेस, ग्रीन टैरिफ़ और स्कोप 2।
CERC REC विनियम 2022 के तहत REC कैसे काम करते हैं?
2022 के विनियम 24 मई 2022 को भारत के राजपत्र (Gazette) में प्रकाशित हुए और 5 दिसंबर 2022 से लागू हुए, जिन्होंने 2010 के पुराने ढाँचे की जगह ली (CERC, मौजूदा विनियम सूची और लागू होने की अधिसूचना, 2022)।
REC किसे मिल सकते हैं?
विनियम चार तरह की योग्य संस्थाएँ गिनाते हैं (विनियम 4):
- अक्षय ऊर्जा उत्पादन स्टेशन, अगर उस क्षमता के लिए बिजली अधिनियम की धारा 62 या 63 के तहत नियामक ने उनका टैरिफ़ तय या स्वीकार नहीं किया है, बिजली किसी और के RPO के लिए नहीं बेची गई है, और उन्होंने ट्रांसमिशन या व्हीलिंग शुल्क में छूट या रियायत नहीं ली है।
- कैप्टिव अक्षय प्लांट, जो यही शर्तें पूरी करें। उनकी अपनी खपत वाले प्रमाणपत्र बेचे नहीं जा सकते।
- बिजली वितरण कंपनियाँ (discom), जो अपने RPO से ज़्यादा अक्षय बिजली खरीदें।
- ओपन एक्सेस उपभोक्ता, जो अपने RPO से ज़्यादा अक्षय बिजली खरीदें।
मुख्य नियम
- केंद्रीय एजेंसी (Central Agency) राष्ट्रीय भार प्रेषण केंद्र (NLDC) है, जिसे Grid-India चलाता है। यह संस्थाओं का पंजीकरण करती है, प्रमाणपत्र जारी करती है और REC रजिस्ट्री रखती है (विनियम 3)।
- उत्पादकों को बिजली बनने के छह महीने के अंदर आवेदन करना होता है (विनियम 10)।
- प्रमाणपत्रों का कारोबार पावर एक्सचेंजों पर या लाइसेंसधारी बिजली ट्रेडरों के ज़रिए होता है (विनियम 11)।
- कीमत एक्सचेंजों पर तय होती है या ट्रेडरों से आपसी सहमति से। अगर कीमत या मात्रा में असामान्य उतार-चढ़ाव दिखे तो CERC निर्देश दे सकता है (विनियम 13)।
- प्रमाणपत्र तब तक मान्य रहते हैं जब तक उनका इस्तेमाल (redeem) न हो जाए (विनियम 14)। RPO पालन में इस्तेमाल होने पर उन्हें रजिस्ट्री से खत्म कर दिया जाता है।
2026 में क्या बदला?
CERC के पहले संशोधन विनियम, 2026, जो 24 मार्च 2026 के हैं और जिनकी राजपत्र तारीख 1 अप्रैल 2026 दर्ज है, ने कई बदलाव किए (CERC, 2026):
- अक्षय ऊर्जा खपत दायित्व (RCO), नामित उपभोक्ता (designated consumer) और वर्चुअल पावर परचेज़ एग्रीमेंट (VPPA) की नई परिभाषाएँ।
- 5 दिसंबर 2022 और संशोधन के बीच चालू हुए प्लांट के लिए गुणक: ज़मीन पर पवन और सोलर 1, जलविद्युत 1.5, नगर ठोस कचरा और गैर-जीवाश्म सह-उत्पादन (cogeneration) 2, बायोमास और जैव ईंधन 2.5। संशोधन के बाद चालू होने वाले प्लांट को एक नए अंक-आधारित फ़ॉर्मूले से गुणक मिलेगा (जैसे सोलर और पवन 1.0)।
- गुणक चालू होने की तारीख से 15 साल तक रहता है, उसके बाद हर MWh पर एक प्रमाणपत्र मिलता है।
- VPPA: वर्चुअल PPA वाले प्लांट के REC खरीदार को चले जाते हैं, केवल उसके RPO या RCO में इस्तेमाल हो सकते हैं, और एक्सचेंजों पर दोबारा बेचे नहीं जा सकते।
- डिस्कॉम और ओपन एक्सेस उपभोक्ता अब राज्य आयोग के अतिरिक्त अक्षय खरीद के प्रमाणन के तीन महीने के अंदर आवेदन करते हैं।
उदाहरण के लिए
ये आँकड़े केवल हिसाब समझाने के लिए गढ़े गए हैं। योग्यता के नियम पूरे करने वाला एक पवन प्लांट साल भर में ग्रिड में 10,000 MWh भेजता है। गुणक 1 होने पर वह 10,000 REC के लिए आवेदन कर सकता है। 2024 में चालू हुआ एक बायोमास प्लांट अगर 10,000 MWh भेजे, तो 2.5 के गुणक से उसे 25,000 REC मिलेंगे। इसी वजह से एक REC हमेशा ठीक 1 MWh ऊर्जा के बराबर नहीं होता।
स्रोत: CERC (Terms and Conditions for Renewable Energy Certificates for Renewable Energy Generation) Regulations, 2022; CERC: Notification on date of implementation of REC Regulations 2022; CERC REC (First Amendment) Regulations, 2026; CERC: Current Regulations index; PIB (Ministry of Power), 7 June 2022: Green Energy Open Access Rules; PIB (Ministry of Power), 19 July 2022: Green Energy Open Access Rules; PIB (Ministry of Power), 11 November 2022: Green Energy Open Access portal launched; GHG Protocol Scope 2 Guidance (2015); I-TRACK Foundation (I-REC Standard)
यह लेख AI की सहायता से तैयार किया गया है और GreenEye टीम ने इसे हर भाग में दिए गए स्रोतों से जाँचा है।
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