भारत में अक्षय ऊर्जा प्रमाणपत्र (REC) क्या हैं
REC क्या है (1 MWh), CERC के REC विनियम 2022 और 2026 का संशोधन कैसे काम करते हैं, REC कार्बन क्रेडिट से कैसे अलग है, I-REC, हरित ओपन एक्सेस, ग्रीन टैरिफ़ और स्कोप 2।
परिचय
भारत में अक्षय ऊर्जा प्रमाणपत्र (Renewable Energy Certificate, REC) एक ऐसा प्रमाणपत्र है जिसे खरीदा-बेचा जा सकता है और जो अक्षय स्रोतों से बनी और ग्रिड में भेजी गई एक मेगावाट घंटा (1 MWh) बिजली के "हरित" गुण को दर्शाता है। यह CERC के REC विनियम, 2022 के तहत जारी होता है और मुख्य रूप से अक्षय ऊर्जा खरीद दायित्व पूरे करने और अक्षय बिजली के दावों के लिए इस्तेमाल होता है।
फ़ोटो: "Astonfield 11.5MW Solar Plant Gujarat", Citizenmj, CC BY-SA 3.0, विकिमीडिया कॉमन्स के माध्यम से
REC को अक्सर कार्बन क्रेडिट समझ लिया जाता है। यह लेख बताता है कि REC क्या है, अक्टूबर 2026 तक भारत की REC व्यवस्था कैसे काम करती है, यह कार्बन क्रेडिट से कैसे अलग है, I-REC क्या हैं, कंपनियाँ हरित बिजली और किन तरीकों से खरीदती हैं, और स्कोप 2 उत्सर्जन की रिपोर्टिंग में REC की क्या जगह है। इसमें कोई कीमत या कानूनी सलाह नहीं दी गई है।

स्रोत: CERC (Terms and Conditions for Renewable Energy Certificates for Renewable Energy Generation) Regulations, 2022; CERC: Notification on date of implementation of REC Regulations 2022; CERC REC (First Amendment) Regulations, 2026; CERC: Current Regulations index; PIB (Ministry of Power), 7 June 2022: Green Energy Open Access Rules; PIB (Ministry of Power), 19 July 2022: Green Energy Open Access Rules; PIB (Ministry of Power), 11 November 2022: Green Energy Open Access portal launched; GHG Protocol Scope 2 Guidance (2015); I-TRACK Foundation (I-REC Standard)
यह लेख AI की सहायता से तैयार किया गया है और GreenEye टीम ने इसे हर भाग में दिए गए स्रोतों से जाँचा है।
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