सहजन (मोरिंगा): जयपुर के लिए तेज़ी से बढ़ने वाला ड्रमस्टिक पेड़
Moringa oleifera
सहजन (मोरिंगा) तेज़ी से बढ़ने वाला देशी पेड़ है, जिसकी पत्तियाँ, फूल और फलियाँ पारंपरिक सब्ज़ी हैं। जानिए जयपुर में इसे कब लगाएँ, छोटे पौधों को पाले से कैसे बचाएँ, और यह बड़ा छायादार पेड़ क्यों नहीं, बल्कि भोजन देने वाला पेड़ है।
जयपुर और राजस्थान में सहजन क्यों लगाएँ
- यह देशी पेड़ है, भारत और पाकिस्तान का, और उत्तर-पश्चिम भारत में अपने आप उगता है।
- कम बारिश में भी चल जाता है। ICRAF के पेड़ डेटाबेस के अनुसार यह "काफ़ी सूखा-सहनशील" है और इसे साल में लगभग 500 मिमी बारिश चाहिए। जयपुर में लगभग 600–650 मिमी बारिश होती है।
- राजस्थान में इसे परखा गया है। कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर के 2022–24 के जालोर ज़िले (मिट्टी का pH 8.1) के परीक्षण में कई किस्में अच्छी तरह बढ़ीं और अच्छी पैदावार दी।
- क्षारीय मिट्टी सह लेता है, अगर मिट्टी से पानी अच्छी तरह निकल जाए।
जयपुर में सबसे बड़ा ख़तरा है छोटे पौधों पर पाला। कड़ा पाला छोटे सहजन को ज़मीन तक सुखा सकता है। आमतौर पर यह फिर से फूट आता है, पर पहली सर्दी में पौधे को बचाना ज़रूरी है। इसकी दूसरी कमज़ोरियाँ हैं आसानी से टूटने वाली डालियाँ और जलभराव न सह पाना।
यह लेख AI की सहायता से तैयार किया गया है। महत्वपूर्ण जानकारी की पुष्टि हर भाग में दिए गए स्रोतों से करें।
ऐसा पेड़ लगाएं जिसे आप ट्रैक कर सकें
GreenEye की ज़मीन पर एक पेड़ लगाएं और उसे बढ़ते हुए ट्रैक करें।
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