कटहल का पेड़ (Artocarpus heterophyllus): भारत में कहाँ उगता है और इसे कैसे लगाएं
Artocarpus heterophyllus
कटहल का वैज्ञानिक नाम Artocarpus heterophyllus है, अंग्रेज़ी में इसे जैकफ्रूट कहते हैं; यह भारत का मूल, बड़ा सदाबहार फल-वृक्ष है। जानिए कलमी कटहल का पेड़ कब और कैसे लगाएं, कहां लगाएं, बीज से पौधा कैसे तैयार करें, क्या यह गमले में रह सकता है, इसे कैसे पहचानें, पहले तीन साल की देखभाल और किन बातों का ध्यान रखें।
भारत में कटहल कहाँ उगता है
कटहल भारत के गर्म, नम इलाक़ों में सबसे अच्छा उगता है: पश्चिमी तट और पश्चिमी घाट, दक्षिणी राज्य, पूर्वी भारत और पूर्वोत्तर। क्यू (Kew) की विश्व सूची (GBIF के ज़रिए देखी गई) भारत को इसका मूल क्षेत्र बताती है, और असम, पूर्वी हिमालय, बांग्लादेश, श्रीलंका, म्यांमार और कई उष्णकटिबंधीय देशों को ऐसी जगहें बताती है जहाँ इसे बाहर से लाया गया। फ़्लावर्स ऑफ़ इंडिया के अनुसार यह संभवतः पश्चिमी घाट के वर्षावनों का मूल पेड़ है। ICAR की पत्रिका इंडियन हॉर्टिकल्चर के 2023 के एक लेख (करुणाकरन और साथी) में भारत को कटहल की जन्मभूमि कहा गया है और बताया गया है कि यह असम, त्रिपुरा, बिहार, उत्तर प्रदेश, हिमालय की तलहटी, केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक में बड़े पैमाने पर उगाया जाता है।
ICRAF के अनुसार यह 0–1,600 मीटर की ऊँचाई तक और साल में 1,000–2,400 मिमी बारिश वाले इलाक़ों में उगता है, और अच्छी फ़सल के लिए गर्म, नम मौसम और पूरे साल फैली बारिश चाहिए। ICRAF यह भी कहता है कि कटहल अपने रिश्तेदार पेड़ों से ज़्यादा ठंड और कुछ पाला सह लेता है, पर न सूखा सहता है, न बाढ़। KAU इसे 1,000 मीटर तक के गर्म, नम इलाक़ों की फ़सल बताता है, और चेतावनी देता है कि ऊपर उठता भूजल या कम हवा वाली मिट्टी इसे नुकसान पहुँचाती है; TNAU इसे मैदानों में और लगभग 1,200 मीटर तक उगाता है। मिट्टी के लिए ICRAF गहरी, अच्छे निकास वाली जलोढ़, बलुई दोमट या चिकनी दोमट मिट्टी बेहतर मानता है, जिसका pH लगभग 5–7.5 हो, हालाँकि यह पेड़ कमज़ोर कंकरीली या लेटराइट मिट्टी में भी उग जाता है।
भारत के अलग-अलग हिस्सों में यह कैसा रहता है (इन स्रोतों के आधार पर हमारा आकलन):
- अच्छा उगता है: पश्चिमी तट, दक्षिणी प्रायद्वीप, पूर्वी तट, पूर्वी भारत और पूर्वोत्तर, अच्छे निकास वाली ज़मीन पर।
- सावधानी के साथ: उत्तरी मैदान और मध्य भारत, जहाँ छोटे पेड़ों को सूखी गर्मी में पानी और पाले वाली रातों में ढकाव चाहिए; और हिमालय की तलहटी, जहाँ पाला हल्का पड़ता है।
- मुश्किल: उत्तर-पश्चिम का शुष्क क्षेत्र। वहाँ बारिश ICRAF की बताई सीमा से काफ़ी कम है, गर्मियाँ गर्म और सूखी हैं और सर्दी की रातों में पाला पड़ सकता है, इसलिए वहीं लगाएं जहाँ नियमित पानी दे सकें और छोटे पेड़ को बचा सकें, और फल कम आने की उम्मीद रखें।
- उपयुक्त नहीं: ऊँचा हिमालय, और कोई भी निचली जगह जहाँ बारिश के बाद पानी भरा रहता है।
कटहल का पेड़ कैसे पहचानें
कटहल के पेड़ को सबसे आसानी से उसके बड़े, काँटेदार हरे फलों से पहचाना जाता है, जो सीधे तने और मोटी डालियों से लटकते हैं; ICRAF इसे 8–25 मीटर ऊँचा, घने, गुंबद जैसे छत्र वाला सदाबहार पेड़ बताता है।
- पत्तियाँ: एक-एक करके लगी, मोटी और चमड़े जैसी, ऊपर से चमकदार गहरी हरी और नीचे से हल्की, 4–25 सेमी लंबी (ICRAF)। नई टहनियों की पत्तियों में 2 या 3 कटाव (लोब) हो सकते हैं; पुरानी डालियों पर वे पूरी और अंडाकार होती हैं (ICRAF, फ़्लावर्स ऑफ़ इंडिया)।
- फूल: बहुत छोटे, एक ही पेड़ पर अलग-अलग नर और मादा बालियों में गुँथे हुए; ICRAF के अनुसार नर बालियाँ 3–10 सेमी और मादा बालियाँ 5–15 सेमी लंबी होती हैं। ये तने और बड़ी डालियों से निकली छोटी, मोटी टहनियों पर लगती हैं (फ़्लावर्स ऑफ़ इंडिया)। ICAR-IIHR, बेंगलुरु में 2014–16 के एक अध्ययन (बागलकोट के उद्यानिकी विश्वविद्यालय का शोध-प्रबंध) में मुख्य फूल का मौसम नवंबर से अप्रैल तक रहा।
- फल: पेड़ पर लगने वाले सभी फलों में सबसे बड़ा (फ़्लावर्स ऑफ़ इंडिया)। ICRAF के अनुसार फल 20–100 सेमी लंबा और 4.5–50 किलो भारी होता है, उसका हरा से पीला-सा छिलका सख़्त, नुकीले या भोथरे काँटों से ढका रहता है; अंदर मीठे पीले कोये होते हैं, हर कोये में एक बीज। ICRAF के अनुसार फूल आने के 80–160 दिन बाद फल पकता है।
- छाल और दूध (लेटेक्स): भूरी-धूसर, खुरदुरी और कुछ परतदार; काटने पर पेड़ के हर जीवित हिस्से से चिपचिपा सफ़ेद दूध निकलता है (ICRAF)।
- मिलता-जुलता पेड़: ब्रेडफ्रूट (Artocarpus altilis), जिसे हिंदी में विलायती कटहल कहते हैं। फ़्लावर्स ऑफ़ इंडिया के अनुसार इसकी पत्तियाँ गहरे कटावों में बँटी होती हैं और छिलके पर षट्कोण जैसे खाने बने होते हैं, जबकि कटहल की पुरानी पत्तियाँ पूरी होती हैं और छिलका काँटेदार होता है (ICRAF)।
स्रोत: Kew World Checklist of Vascular Plants (via GBIF): Artocarpus heterophyllus Lam., accepted name; native India; Assam, East Himalaya, Bangladesh, Sri Lanka, Myanmar and ~50 other areas listed as introduced; Orwa C. et al. (2009). Agroforestree Database 4.0: Artocarpus heterophyllus. ICRAF; TNAU Agritech Portal, Horticulture: Jack (soil, climate, propagation, planting season, spacing, pit, irrigation, bearing age, harvest, pests); Kerala Agricultural University (CELKAU): Jackfruit, climate, soil and season (warm humid climate up to 1,000 m; water table; plant one-year-old grafts at the onset of monsoon showers); Karunakaran G. et al. (2023). Promising high value fruit crops for Northeastern Region. Indian Horticulture (ICAR), Nov-Dec 2023, pp. 35-39 (jackfruit distribution in India); University of Horticultural Sciences, Bagalkot (thesis, work at ICAR-IIHR Hessarghatta 2014-16): Studies on floral biology and fruit development in jackfruit (on-season flowering November-April; abstract seen via search, not read in full); Flowers of India: Jackfruit (Indian-language names, leaves, flowers, fruit, native to the Western Ghats, name from Malayalam chakka); Flowers of India: Breadfruit (Artocarpus altilis, Vilayati Kathal; look-alike)
यह लेख AI की सहायता से तैयार किया गया है और GreenEye टीम ने इसे हर भाग में दिए गए स्रोतों से जाँचा है।
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