कटहल का पेड़ (Artocarpus heterophyllus): भारत में कहाँ उगता है और इसे कैसे लगाएं
Artocarpus heterophyllus
कटहल का वैज्ञानिक नाम Artocarpus heterophyllus है, अंग्रेज़ी में इसे जैकफ्रूट कहते हैं; यह भारत का मूल, बड़ा सदाबहार फल-वृक्ष है। जानिए कलमी कटहल का पेड़ कब और कैसे लगाएं, कहां लगाएं, बीज से पौधा कैसे तैयार करें, क्या यह गमले में रह सकता है, इसे कैसे पहचानें, पहले तीन साल की देखभाल और किन बातों का ध्यान रखें।
परिचय
कटहल, जिसे अंग्रेज़ी में जैकफ्रूट (jackfruit) कहते हैं, का वैज्ञानिक नाम Artocarpus heterophyllus है। यह शहतूत कुल (Moraceae) का बड़ा, सदाबहार फल-वृक्ष है, जो भारत का मूल निवासी है और गर्म, नम दक्षिण, पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में सबसे अच्छा उगता है। अंग्रेज़ी में इस पेड़ को जैकफ्रूट ट्री या जैक ट्री कहते हैं; हिंदी में यह कटहल का पेड़ है, जिसे कठल भी लिखा जाता है।
TNAU के मार्गदर्शन के अनुसार कलमी कटहल लगभग पाँचवें साल से फल देने लगता है, और इसका कच्चा फल सब्ज़ी की तरह पकाया जाता है या पका फल खाया जाता है। यह गर्म, नम इलाक़ों का पेड़ है: इसे सूखा, पाला और पानी भरी मिट्टी पसंद नहीं, इसलिए सूखे उत्तर-पश्चिम में यह केवल नियमित पानी और सर्दी में बचाव के साथ ही बचता है। इस लेख में जानिए यह कहाँ अच्छा उगता है, कलमी पौधा कैसे लगाएं या बीज से पौधा कैसे तैयार करें, क्या यह गमले में रह सकता है, इसे कैसे पहचानें, और किन बातों का ध्यान रखें।
फ़ोटो: "Jackfruit Tree Kerala", Sanu N, CC BY-SA 4.0, विकिमीडिया कॉमन्स के माध्यम से
एक नज़र में
| वैज्ञानिक नाम | Artocarpus heterophyllus Lam. |
| कुल (फ़ैमिली) | मोरेसी (Moraceae, शहतूत और अंजीर कुल) |
| हिंदी नाम | कटहल (Katahal), कठल (Kathal); कटहल का पेड़ (jackfruit tree) |
| दूसरे नाम | जैकफ्रूट, जैक ट्री; कंठल, कठर (हिंदी, ICRAF); पनस (संस्कृत, ICRAF); कांठाल (बांग्ला), फणस (मराठी), चक्का (मलयालम), पला (तमिल), पनस (तेलुगु, ओड़िया), हलसु (कन्नड़) (फ़्लावर्स ऑफ़ इंडिया) |
| पूरी ऊँचाई | 8–25 मीटर, घने, गुंबद जैसे छत्र के साथ (ICRAF) |
| बढ़ने की गति | छोटी उम्र में काफ़ी तेज़: 2 साल में लगभग 3 मीटर और 5 साल में 7 मीटर (ICRAF) |
| पानी की ज़रूरत | मध्यम से ज़्यादा: ICRAF के अनुसार यह न सूखा सहता है, न पानी का भराव |
| पहला फल कितने साल में | कलमी पौधे लगभग 5वें साल से और बीज वाले लगभग 8वें साल से (TNAU); केरल कृषि विश्वविद्यालय (KAU) 6–8 साल बताता है |
| फल का मौसम | तमिलनाडु में तुड़ाई मार्च–जुलाई (TNAU); केरल में फल लगभग जून में पकते हैं (KAU) |
| लगाने का मौसम | ज़्यादातर भारत में मानसून के साथ; TNAU तमिलनाडु के लिए जून–दिसंबर बताता है; महीने केवल अंदाज़ा हैं, रोपण कैलेंडर देखें |
| कहाँ अच्छा उगता है | पश्चिमी तट, दक्षिणी प्रायद्वीप, पूर्वी भारत और पूर्वोत्तर; उत्तरी मैदान, मध्य भारत और हिमालय की तलहटी में सावधानी के साथ; उत्तर-पश्चिम के शुष्क क्षेत्र में केवल सिंचाई और पाले से बचाव के साथ |
| संरक्षण स्थिति | IUCN रेड लिस्ट में अभी आकलन नहीं हुआ है (GBIF रिकॉर्ड, अक्टूबर 2026 में जाँचा गया) |

स्रोत: Kew World Checklist of Vascular Plants (via GBIF): Artocarpus heterophyllus Lam., accepted name; native India; Assam, East Himalaya, Bangladesh, Sri Lanka, Myanmar and ~50 other areas listed as introduced; GBIF species API: IUCN Red List category for Artocarpus heterophyllus (NOT_EVALUATED, code NE); Orwa C. et al. (2009). Agroforestree Database 4.0: Artocarpus heterophyllus. ICRAF; TNAU Agritech Portal, Horticulture: Jack (soil, climate, propagation, planting season, spacing, pit, irrigation, bearing age, harvest, pests); Kerala Agricultural University (CELKAU): Jackfruit, harvesting (first fruiting 6-8 years, fruit matures around June); Flowers of India: Jackfruit (Indian-language names, leaves, flowers, fruit, native to the Western Ghats, name from Malayalam chakka)
यह लेख AI की सहायता से तैयार किया गया है और GreenEye टीम ने इसे हर भाग में दिए गए स्रोतों से जाँचा है।
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