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कटहल का पेड़ (Artocarpus heterophyllus): भारत में कहाँ उगता है और इसे कैसे लगाएं

Artocarpus heterophyllus

कटहल का वैज्ञानिक नाम Artocarpus heterophyllus है, अंग्रेज़ी में इसे जैकफ्रूट कहते हैं; यह भारत का मूल, बड़ा सदाबहार फल-वृक्ष है। जानिए कलमी कटहल का पेड़ कब और कैसे लगाएं, कहां लगाएं, बीज से पौधा कैसे तैयार करें, क्या यह गमले में रह सकता है, इसे कैसे पहचानें, पहले तीन साल की देखभाल और किन बातों का ध्यान रखें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कटहल का वैज्ञानिक नाम क्या है, और इसे अंग्रेज़ी में क्या कहते हैं?

कटहल का वैज्ञानिक नाम Artocarpus heterophyllus Lam. है, और यह शहतूत और अंजीर कुल (Moraceae) का पेड़ है। अंग्रेज़ी में इसे जैकफ्रूट (jackfruit) कहते हैं, और पेड़ को जैकफ्रूट ट्री या जैक ट्री। दूसरे भारतीय नामों में संस्कृत में पनस, मराठी में फणस, मलयालम में चक्का, तमिल में पला और कन्नड़ में हलसु शामिल हैं (फ़्लावर्स ऑफ़ इंडिया, ICRAF)।

कटहल का पेड़ कैसे लगाएं?

बारिश की शुरुआत में किसी भरोसेमंद नर्सरी का स्वस्थ कलमी पौधा ऐसी गहरी, अच्छे निकास वाली जगह पर लगाएं जहाँ कभी पानी न भरे। TNAU हर तरफ़ 1 मीटर और KAU 60 सेमी का गड्ढा बताता है; उसे सड़ी कम्पोस्ट या गोबर की खाद मिली ऊपरी मिट्टी से ज़मीन से थोड़ा ऊपर तक भरें, पौधा उतनी ही गहराई पर लगाएं जितना थैली में था, कलम का जोड़ मिट्टी से ऊपर रखें, डंडी से सहारा दें, थावला बनाएँ और तुरंत पानी दें। TNAU बाग़ में पेड़ों के बीच 8 x 8 मीटर और KAU 12-15 मीटर दूरी रखता है, इसलिए चौड़े छत्र के लिए जगह छोड़ें; यह मोटा अंदाज़ा है, घर या पाइपों से सुरक्षित दूरी नहीं।

कटहल का पेड़ कब लगाना चाहिए?

ज़्यादातर भारत में कटहल मानसून की शुरुआत में लगाएं। अंदाज़े के तौर पर, उत्तरी मैदान, पूर्वी भारत, पूर्वोत्तर और मध्य भारत में जुलाई-अगस्त, पश्चिमी तट पर मानसून शुरू होते ही (KAU), और तमिलनाडु में जून-दिसंबर (TNAU), जहाँ तट पर अक्टूबर-नवंबर में लगाना ठीक है क्योंकि मुख्य बारिश उत्तर-पूर्वी मानसून से होती है। जब आपके ज़िले में बारिश से मिट्टी भीग जाए तब लगाएं, और बारिश आने से पहले अप्रैल-मई में न लगाएं।

कटहल का पेड़ कहां लगाना चाहिए?

इसे पूरी धूप में, गहरी और अच्छे निकास वाली मिट्टी पर, ऐसी खुली जगह लगाएं जहाँ बड़ा पेड़ फैल सके और बारिश के बाद पानी न रुके। ICRAF के अनुसार यह न सूखा सहता है न पानी का भराव, और KAU चेतावनी देता है कि ऊपर उठता भूजल इसे नुकसान पहुँचाता है, इसलिए निचले कोनों, हमेशा गीले रहने वाले लॉन और रिसती टंकियों से बचें। इसे दीवारों, पाइपों और ऊपर से जाते तारों से काफ़ी दूर रखें; बाग़ों में इस्तेमाल होने वाली 8-15 मीटर की दूरी (TNAU, KAU) बढ़ने की जगह का मोटा अंदाज़ा है, सुरक्षित दूरी नहीं, इसलिए जगह कम हो तो अपने स्थानीय उद्यान कार्यालय से पूछें।

बीज से कटहल का पौधा कैसे तैयार करें?

पूरी तरह पके फल से निकाला गया ताज़ा बीज जल्दी बो दें, क्योंकि ICRAF कटहल के बीज को "रिकैल्सिट्रेंट" बताता है: सूखने पर बीज मर जाता है। गूदा धोकर बीज को भुरभुरी, नम (गीली नहीं) मिट्टी वाली गहरी थैली में बोएँ, फिर पौधे को छोटी उम्र में ही उसकी पक्की जगह पर लगा दें, क्योंकि यह पेड़ लंबी मूसला जड़ बनाता है (ICRAF; व्यावहारिक सलाह)। बीज से उगे पेड़ देर से फल देते हैं, TNAU के मार्गदर्शन में लगभग 8वें साल से, इसलिए जल्दी फल के लिए नर्सरियाँ ऐसे पौधों पर किसी जाने-पहचाने पौधे की कलम चढ़ाती हैं।

कटहल के पेड़ पर फूल और फल कब आते हैं, और इसमें कितने साल लगते हैं?

कलमी कटहल आमतौर पर लगभग 5वें साल से और बीज वाला लगभग 8वें साल से फल देने लगता है (TNAU); KAU लगाने के 6-8 साल बाद बताता है। ICAR-IIHR, बेंगलुरु में 2014-16 के एक अध्ययन में मुख्य फूल का मौसम नवंबर से अप्रैल तक रहा, और ICRAF के अनुसार फूल आने के 80-160 दिन बाद फल पकता है। TNAU के अनुसार तमिलनाडु में तुड़ाई मार्च से जुलाई तक होती है, और KAU के अनुसार केरल में फल लगभग जून में पकते हैं; समय इलाक़े और पेड़ के हिसाब से बदलता है।

क्या गमले में कटहल का पौधा लगा सकते हैं?

केवल थोड़े समय के लिए: कटहल स्वभाव से बड़ा पेड़ है, 8-25 मीटर ऊँचा और लंबी मूसला जड़ वाला (ICRAF), इसलिए यह असल में गमले का पौधा नहीं है। छोटे पौधे को ज़मीन में लगाने से पहले साल-दो साल किसी बड़े, गहरे, अच्छे निकास वाले गमले में रखा जा सकता है, पर गमले में स्वस्थ, फल देने वाले पेड़ की उम्मीद न रखें। हमारे स्रोतों में भारत के लिए गमले में उगाने का कोई परखा हुआ तरीका नहीं मिला, इसलिए अपने स्थानीय KVK या उद्यान कार्यालय से सलाह लें।

कटहल का पेड़ कैसा होता है, और इसे कैसे पहचानें?

कटहल का पेड़ घना, गहरा हरा सदाबहार पेड़ होता है, 8-25 मीटर ऊँचा (ICRAF), जिसकी मोटी, चमकदार, अंडाकार पत्तियाँ 4-25 सेमी लंबी होती हैं और बड़े, काँटेदार हरे फल सीधे तने और मोटी डालियों से लटकते हैं। नई टहनियों की पत्तियों में 2 या 3 कटाव हो सकते हैं, और काटने पर हर हिस्से से चिपचिपा सफ़ेद दूध निकलता है (ICRAF)। ब्रेडफ्रूट, जिसे विलायती कटहल कहते हैं, मिलता-जुलता दिखता है, पर उसकी पत्तियाँ गहरे कटावों वाली होती हैं और फल के छिलके पर काँटों की जगह षट्कोण जैसे खाने बने होते हैं (फ़्लावर्स ऑफ़ इंडिया)।

कटहल का पेड़ घर में लगाना शुभ है या अशुभ?

यह शुभ है या अशुभ, यह मान्यता की बात है, जिसे हमारे स्रोत तय नहीं कर सकते। व्यावहारिक जवाब जगह पर निर्भर है: कटहल चौड़े छत्र, लंबी मूसला जड़ और 4.5-50 किलो तक भारी फलों वाला बड़ा पेड़ बनता है (ICRAF)। इसे वहीं लगाएं जहाँ फैलने की जगह हो, दीवारों, पाइपों और ऊपर से जाते तारों से दूर, और ऐसी जगह के ऊपर नहीं जहाँ लोग बैठते हों या बच्चे खेलते हों।

क्या कटहल के पेड़ का कोई हिस्सा ज़हरीला है?

कटहल खूब खाया जाता है और इसके ज़हरीले होने का कोई रिकॉर्ड हमें नहीं मिला, पर इसके चिपचिपे दूध और कभी-कभार होने वाली एलर्जी का ध्यान रखना ज़रूरी है। कटहल खाने के बाद गंभीर एलर्जी ज़्यादातर उन लोगों में दर्ज हुई है जिन्हें पहले से लेटेक्स से एलर्जी है (डे और साथी, 2023), इसलिए लेटेक्स एलर्जी वाले लोग पहले डॉक्टर से पूछें, और सूजन या साँस की तकलीफ़ हो तो तुरंत डॉक्टरी मदद लें। कुत्तों और बिल्लियों पर असर की पक्की जानकारी नहीं है, इसलिए पालतू जानवरों को पत्तियाँ, छाल या बीज चबाने न दें, और ऐसा हो तो पशु-चिकित्सक से पूछें।

स्रोत: Orwa C. et al. (2009). Agroforestree Database 4.0: Artocarpus heterophyllus. ICRAF; TNAU Agritech Portal, Horticulture: Jack (soil, climate, propagation, planting season, spacing, pit, irrigation, bearing age, harvest, pests); Kerala Agricultural University, Centre for e-Learning (CELKAU): Jackfruit, land preparation and planting (pit, spacing, graft joint, staking, late-evening planting, never exposed to drought or frost); Kerala Agricultural University (CELKAU): Jackfruit, climate, soil and season (warm humid climate up to 1,000 m; water table; plant one-year-old grafts at the onset of monsoon showers); Kerala Agricultural University (CELKAU): Jackfruit, harvesting (first fruiting 6-8 years, fruit matures around June); University of Horticultural Sciences, Bagalkot (thesis, work at ICAR-IIHR Hessarghatta 2014-16): Studies on floral biology and fruit development in jackfruit (on-season flowering November-April; abstract seen via search, not read in full); Flowers of India: Jackfruit (Indian-language names, leaves, flowers, fruit, native to the Western Ghats, name from Malayalam chakka); Flowers of India: Breadfruit (Artocarpus altilis, Vilayati Kathal; look-alike); Dey S. et al. (2023). Jackfruit Anaphylaxis Due to Cross Reactivity with Latex. J. Community Hosp. Intern. Med. Perspect. 13(4): 42-44. doi:10.55729/2000-9666.1199

यह लेख AI की सहायता से तैयार किया गया है और GreenEye टीम ने इसे हर भाग में दिए गए स्रोतों से जाँचा है।

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