अशोक या सीता अशोक (Saraca asoca): भारत में कहाँ उगता है और इसे कैसे लगाएँ
Saraca asoca
असली अशोक या सीता अशोक (Saraca asoca) रामायण वाला पवित्र, नारंगी फूलों वाला पेड़ है, सड़क किनारे का ऊँचा मास्ट ट्री नहीं। जानिए इसे कैसे पहचानें, इसका वैज्ञानिक और हिंदी नाम, भारत में यह कहाँ उगता है, इसे कैसे और कब लगाएँ, और इसे कितनी छाँव और पानी चाहिए।
अशोक का पेड़ कैसे लगाएँ
नर्सरी में तैयार सीता अशोक का पौधा मानसून की शुरुआत में, नम और अच्छे निकास वाली मिट्टी में, थोड़ी छाँव वाली जगह पर लगाएँ, और पहले सूखे मौसमों में पानी देने के लिए तैयार रहें।
कब लगाएँ
विकासपीडिया की खेती की जानकारी में दो महीने के पौधे मानसून में, जून या जुलाई में, खेत में लगाए जाते हैं। अंदाज़े के तौर पर: दक्षिणी प्रायद्वीप और पश्चिमी तट पर जून–जुलाई, और उत्तरी मैदान, मध्य भारत और उत्तर-पश्चिम में जुलाई–अगस्त, जब आपके ज़िले में बारिश से मिट्टी अच्छी तरह भीग जाए। ये महीने केवल अंदाज़ा हैं, नियम नहीं: आपके इलाक़े में बारिश असल में कब आती है, उसी के हिसाब से चलें। हमारे मोटे नियम के अनुसार अप्रैल से जून के गर्म, सूखे महीनों में न लगाएँ, और उत्तर भारत में दिसंबर और जनवरी में भी न लगाएँ।
पौधा कैसा चुनें
नर्सरी में Saraca asoca या "सीता अशोक" नाम से माँगें, और देखें कि पत्तियाँ संयुक्त हों, यानी पत्रकों के जोड़ों वाली; कई नर्सरियाँ मास्ट ट्री को "अशोक" नाम से बेचती हैं। विकासपीडिया के अनुसार नए पौधे बीज से तैयार करना सबसे अच्छा है: 12 घंटे पानी में भिगोया बीज लगभग 15 दिन में उग आता है, और पौधे मिट्टी, रेत और गोबर की खाद के बराबर हिस्सों से भरी पॉलीथीन थैलियों में तैयार किए जाते हैं। ICAR-DMAPR के एक शोध-पत्र के अनुसार बीज जल्दी ही उगने की क्षमता खो देता है, इसलिए ताज़ा बीज बोएँ। जंगल से पौधे कभी न उखाड़ें।
गड्ढा, दूरी और सुरक्षा
- गड्ढा: विकासपीडिया की बागान वाली जानकारी में 45 × 45 × 45 सेमी के गड्ढे ऊपरी मिट्टी में अच्छी सड़ी गोबर की खाद मिलाकर भरे जाते हैं; बगीचे के पेड़ के लिए इसे मोटा नियम मानें। पौधे को उतनी ही गहराई पर लगाएँ जितना वह थैली में था, और बारिश का पानी रोकने के लिए थाला बनाएँ।
- दूरी: विकासपीडिया औषधीय बागान के लिए 3 × 3 मीटर बताता है। बगीचे में अकेले पेड़ के लिए चारों ओर लगभग 5–6 मीटर ख़ाली जगह हमारा मोटा अंदाज़ा है। यह केवल मोटा अंदाज़ा है, घर, दीवार, पाइप या बिजली की लाइन से सुरक्षित दूरी नहीं; जगह कम हो तो अपने स्थानीय वन या बागवानी कार्यालय से पूछें।
- छाँव: विकासपीडिया सलाह देता है कि छोटे पौधों को पहले एक-दो साल दिसंबर से मई तक आंशिक छाँव और बार-बार पानी दिया जाए। गर्म, सूखे इलाक़ों में शेड नेट या ऊँचे पेड़ों की हल्की छाँव मदद करती है (व्यावहारिक सलाह)।
- ट्री गार्ड: जहाँ बकरी, गाय या पैरों से कुचलने का ख़तरा हो, वहाँ मज़बूत ट्री गार्ड लगाएँ (व्यावहारिक सलाह)।
पहले साल पानी (मोटा अंदाज़ा)
पानी देने से पहले जड़ों के पास कुछ सेंटीमीटर नीचे मिट्टी जाँचें। जब जड़ वाली मिट्टी सूखने लगे तो गहराई तक पानी दें, बारिश के बाद पानी न दें, और तने के पास पानी कभी खड़ा न रहने दें। हमारे किसी स्रोत में घर के लिए पानी का कोई तय समय नहीं दिया गया है, इसलिए नीचे के अंतराल केवल मोटा अंदाज़ा हैं, प्रयोग के नतीजे नहीं; नम इलाक़ों में बहुत कम पानी चाहिए।
| मौसम | मोटा अंतराल (पहले मिट्टी जाँचें) |
|---|---|
| मानसून | आमतौर पर नहीं; केवल लंबे सूखे अंतराल में |
| मानसून के बाद और सर्दी | सूखे इलाक़ों में हफ़्ते में लगभग एक बार |
| वसंत और गर्मी (मार्च–जून) | गर्म, सूखी जगहों पर लगभग हर 2–3 दिन; जहाँ हवा नम हो, वहाँ कम |
स्रोत: Vikaspedia (Govt of India): Saraca asoca package of practices (from Agro-techniques of selected medicinal plants); Smitha G.R. & Thondaiman V. (2016). Reproductive biology and breeding system of Saraca asoca (Roxb.) De Wilde: a vulnerable medicinal plant. SpringerPlus 5:2025 (ICAR-DMAPR, Anand, Gujarat)
यह लेख AI की सहायता से तैयार किया गया है और GreenEye टीम ने इसे हर भाग में दिए गए स्रोतों से जाँचा है।
ऐसा पेड़ लगाएं जिसे आप ट्रैक कर सकें
GreenEye की ज़मीन पर एक पेड़ लगाएं और उसे बढ़ते हुए ट्रैक करें।
यह लेख शेयर करें