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अशोक या सीता अशोक (Saraca asoca): भारत में कहाँ उगता है और इसे कैसे लगाएँ

Saraca asoca

असली अशोक या सीता अशोक (Saraca asoca) रामायण वाला पवित्र, नारंगी फूलों वाला पेड़ है, सड़क किनारे का ऊँचा मास्ट ट्री नहीं। जानिए इसे कैसे पहचानें, इसका वैज्ञानिक और हिंदी नाम, भारत में यह कहाँ उगता है, इसे कैसे और कब लगाएँ, और इसे कितनी छाँव और पानी चाहिए।

पहले तीन साल की देखभाल

पहले तीन साल असली अशोक को लगातार नमी, सबसे गर्म महीनों में थोड़ी छाँव, मल्च वाला थाला और ठंड व चराई से बचाव चाहिए।

पानी। विकासपीडिया के अनुसार यह फ़सल ज़्यादा बारिश वाले इलाक़ों में उगाई जाती है, बिना बारिश वाले महीनों में पौधों को बार-बार पानी चाहिए, और बड़े पेड़ों को तने के चारों ओर खोदी गई गोल नाली से पानी दिया जाता है। दूसरे और तीसरे साल भी सूखे महीनों में पहले मिट्टी जाँचकर गहराई तक पानी देते रहें। सूखे उत्तर-पश्चिम में ऐसा हर साल करने की योजना बनाएँ (हमारा आकलन)।

छाँव। विकासपीडिया की सलाह के अनुसार पहले एक-दो साल दिसंबर से मई तक छोटे पौधे को आंशिक छाँव में रखें। उसके बाद उसे सुबह की धूप ज़्यादा मिलने दें, पर गर्म, सूखे इलाक़ों में दोपहर बाद थोड़ी छाँव बनाए रखें (व्यावहारिक सलाह)।

खरपतवार और मल्च। विकासपीडिया की जानकारी में पहली निराई रोपण के एक महीने बाद की जाती है। पहले दो मानसून थाले को खरपतवार से साफ़ रखें और सूखी पत्तियों की मल्च बिछाएँ, तने से एक हथेली दूर (मोटा नियम)।

ठंड। हमें कोई स्रोत नहीं मिला जो बताए कि यह कितनी ठंड सह लेता है। यह उष्णकटिबंधीय पेड़ है, इसलिए उत्तर भारत में जिन रातों के लिए IMD शीतलहर या पाले की चेतावनी दे, उन रातों छोटे पौधे को जूट या पुआल की टोपी से ढीला ढक दें और सुबह हटा दें (व्यावहारिक सलाह)।

कीड़े और बीमारी। विकासपीडिया और राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड का दक्षिणी केंद्र कोई गंभीर कीट या रोग नहीं बताते। अगर पौधा मुरझाए, पत्तियों में छेद दिखें या तने पर नुकसान दिखे, तो साफ़ फ़ोटो या नमूना अपने स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) या वन विभाग ले जाएँ, और उनकी सलाह के बिना कुछ भी न छिड़कें।

छँटाई। ज़्यादा ज़रूरत नहीं: सूखी, टूटी या एक-दूसरे पर चढ़ी डालियाँ हटाएँ (व्यावहारिक सलाह)। यूज़फ़ुल ट्रॉपिकल प्लांट्स के अनुसार यह ठूँठ से दोबारा फुटाव (कॉपिसिंग) पर अच्छी तरह नहीं बढ़ता, इसलिए इसे बहुत ज़्यादा न काटें।

धैर्य। ICAR-DMAPR के अध्ययन के अनुसार पेड़ लगाने के लगभग 3–4 साल बाद फूलने लगते हैं, और 6–7 साल बाद अच्छे फूल और फल आते हैं; विकासपीडिया के अनुसार 6–8 साल की उम्र में ख़ूब फूल आते हैं।

स्रोत: Vikaspedia (Govt of India): Saraca asoca package of practices (from Agro-techniques of selected medicinal plants); Smitha G.R. & Thondaiman V. (2016). Reproductive biology and breeding system of Saraca asoca (Roxb.) De Wilde: a vulnerable medicinal plant. SpringerPlus 5:2025 (ICAR-DMAPR, Anand, Gujarat); Regional cum Facilitation Centre (Southern), National Medicinal Plants Board: Saraca asoca; Useful Tropical Plants (Fern K.): Saraca asoca

यह लेख AI की सहायता से तैयार किया गया है और GreenEye टीम ने इसे हर भाग में दिए गए स्रोतों से जाँचा है।

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