अशोक या सीता अशोक (Saraca asoca): भारत में कहाँ उगता है और इसे कैसे लगाएँ
Saraca asoca
असली अशोक या सीता अशोक (Saraca asoca) रामायण वाला पवित्र, नारंगी फूलों वाला पेड़ है, सड़क किनारे का ऊँचा मास्ट ट्री नहीं। जानिए इसे कैसे पहचानें, इसका वैज्ञानिक और हिंदी नाम, भारत में यह कहाँ उगता है, इसे कैसे और कब लगाएँ, और इसे कितनी छाँव और पानी चाहिए।
परिचय
अशोक या सीता अशोक (वैज्ञानिक नाम Saraca asoca) एक छोटा सदाबहार पेड़ है, जो भारत के गर्म और नम जंगलों में अपने-आप उगता है और देश भर में मंदिरों के पास और बगीचों में लगाया जाता है। यह रामायण वाला पवित्र अशोक है, जिस पर नारंगी से गहरे लाल रंग के सुगंधित फूलों के गुच्छे आते हैं और जिसकी नई, मुलायम, ताँबे जैसी लाल पत्तियाँ झालर की तरह नीचे लटकती हैं।
इसे उत्तर भारत की सड़कों के किनारे लगे ऊँचे, पतले "अशोक" से न मिलाएँ। वह मास्ट ट्री (Monoon longifolium) है, जो दूसरे कुल का एक अलग पेड़ है। फ़्लावर्स ऑफ़ इंडिया के अनुसार अशोक नाम का अर्थ है "जिसमें शोक न हो"।
असली अशोक सूखी जगहों के लिए आसान पेड़ नहीं है। इसे नम मिट्टी, लगातार पानी और छोटी उम्र में थोड़ी छाँव चाहिए, इसलिए गर्म, सूखे इलाक़ों में यह केवल सुरक्षित और सिंचाई वाली जगह पर ही अच्छा रहता है।
फ़ोटो: "Saraca asoca- ashoka tree-flowers at Mangalore 03", Vijayanrajapuram, CC BY-SA 4.0, विकिमीडिया कॉमन्स के माध्यम से
एक नज़र में
| वैज्ञानिक नाम | Saraca asoca (Roxb.) W.J.de Wilde (क्यू की विश्व सूची); पुरानी किताबों में Saraca indica या Jonesia asoca भी |
| कुल (फ़ैमिली) | Fabaceae (मटर कुल); पुरानी किताबों में Caesalpiniaceae |
| हिंदी नाम | अशोक, सीता अशोक, असोक भी |
| अंग्रेज़ी नाम | Ashoka tree, Sita Ashok, true Ashoka (असली अशोक) |
| दूसरे नाम | अशोकम (मलयालम, तमिल), अशोकमु (तेलुगु), अंगनाप्रिया (ओड़िया), जासुंदी (मराठी) (फ़्लावर्स ऑफ़ इंडिया, ई-फ़्लोरा ऑफ़ इंडिया); अक्सर ashok, ashoka या asoka लिखा जाता है |
| इससे न मिलाएँ | सड़क किनारे का ऊँचा "अशोक", जो मास्ट ट्री (Monoon longifolium) है |
| पूरी ऊँचाई | लगभग 9 मीटर तक (ई-फ़्लोरा ऑफ़ इंडिया); यूज़फ़ुल ट्रॉपिकल प्लांट्स में मोटे तौर पर 10 मीटर तक |
| फूल आने में कितने साल | लगाने के मोटे तौर पर 3–4 साल बाद फूल आने लगते हैं और लगभग 6–7 साल से अच्छे फूल आते हैं (ICAR-DMAPR अध्ययन, 2016) |
| फूल | सुगंधित, नारंगी से गहरे लाल होते हुए; मुख्य रूप से सर्दी के आख़िर से वसंत तक, कई जगह मोटे तौर पर फ़रवरी–अप्रैल, पर समय इलाक़े के हिसाब से बदलता है |
| पानी की ज़रूरत | ज़्यादा: नम मिट्टी, और सूखे महीनों में छोटे पौधों को बार-बार पानी (विकासपीडिया) |
| धूप | आंशिक छाँव, ख़ासकर छोटी उम्र में (विकासपीडिया) |
| लगाने का मौसम | मानसून के साथ, ज़्यादातर जून–अगस्त; महीने केवल अंदाज़ा हैं, रोपण कैलेंडर देखें |
| कहाँ अच्छा उगता है | गर्म, नम इलाक़े: पश्चिमी तट, दक्षिण के ज़्यादा बारिश वाले हिस्से, पूर्व और पूर्वोत्तर; उत्तरी मैदान और मध्य भारत में सावधानी के साथ; सूखे उत्तर-पश्चिम में केवल सुरक्षित, सिंचाई वाली जगह पर |
| संरक्षण स्थिति | संवेदनशील (Vulnerable) (IUCN रेड लिस्ट वैश्विक आकलन, 1998); IUCN ने इसका दोबारा आकलन किया है, इसलिए इसकी मौजूदा श्रेणी रेड लिस्ट पर देखें |

स्रोत: Kew World Checklist of Vascular Plants via GBIF: Saraca asoca (Roxb.) W.J.de Wilde, accepted name, synonyms and native distribution; GBIF species API: IUCN Red List category for Saraca asoca (NEAR_THREATENED, iucnTaxonID 34623); Wikidata Q757356: IUCN Red List status by Red List version (2022.2 Vulnerable; 2025.2 Near Threatened); Flowers of India: Sita Ashok (Saraca asoca)
यह लेख AI की सहायता से तैयार किया गया है और GreenEye टीम ने इसे हर भाग में दिए गए स्रोतों से जाँचा है।
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