अशोक (मास्ट ट्री): जयपुर में इसे कैसे लगाएँ और पालें
Monoon longifolium
सड़कों पर दिखने वाला ऊँचा, सदाबहार अशोक या मास्ट ट्री। जयपुर में इसे कैसे लगाएँ और पालें, यह पक्षियों-तितलियों को क्या देता है, और यह असली अशोक (सीता अशोक) से अलग क्यों है।
जयपुर में इसे क्यों लगाएँ?
यह पूरे भारत में लगाया जाता है और राजस्थान की वन कार्य-योजनाओं में आशापाला और अशोक नाम से दर्ज है। यह सालभर हरा रहता है, सड़कों और चारदीवारी के लिए सुंदर हरी आड़ बनाता है, और पक्षियों व तितलियों को भोजन देता है।
इसकी सीमाएँ भी समझें। यह दक्षिण भारत और श्रीलंका का मूल पेड़ है, राजस्थान का नहीं। इसे खेजड़ी जैसे रेगिस्तानी देसी पेड़ों से ज़्यादा पानी चाहिए, और छोटे पौधे पाले से नुकसान उठा सकते हैं। व्यावहारिक सलाह यह है कि इसे खेजड़ी, नीम और पीपल जैसे राजस्थान के देसी पेड़ों के साथ लगाएँ, उनकी जगह नहीं।
यह लेख AI की सहायता से तैयार किया गया है। महत्वपूर्ण जानकारी की पुष्टि हर भाग में दिए गए स्रोतों से करें।
ऐसा पेड़ लगाएं जिसे आप ट्रैक कर सकें
GreenEye की ज़मीन पर एक पेड़ लगाएं और उसे बढ़ते हुए ट्रैक करें।
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