अशोक (मास्ट ट्री): जयपुर में इसे कैसे लगाएँ और पालें
Monoon longifolium
सड़कों पर दिखने वाला ऊँचा, सदाबहार अशोक या मास्ट ट्री। जयपुर में इसे कैसे लगाएँ और पालें, यह पक्षियों-तितलियों को क्या देता है, और यह असली अशोक (सीता अशोक) से अलग क्यों है।
असली अशोक (Saraca asoca) से अलग पेड़
पुराने ग्रंथों का अशोक, जिसे सीता अशोक भी कहते हैं, एक अलग पेड़ है: Saraca asoca, जो मटर कुल (Fabaceae) का है। यह छोटा से मध्यम (लगभग 6–10 मीटर) पेड़ है, जिसका मुकुट फैला हुआ, पत्तियाँ संयुक्त और फूल नारंगी से गहरे लाल रंग के गुच्छों में होते हैं। यह नम जंगलों में उगता है और इसे ज़्यादा बारिश (लगभग 1,500–4,000 मिमी), आंशिक छाया और नम मिट्टी चाहिए, इसलिए जयपुर के लिए यह ठीक नहीं है। इसकी छाल का ज़्यादा दोहन इसके लिए बड़ा ख़तरा है, और IUCN की मौजूदा रेड लिस्ट में यह "संकट के क़रीब" (Near Threatened) श्रेणी में है।
यहाँ बताए गए मास्ट ट्री के Saraca asoca जैसे पारंपरिक उपयोग नहीं हैं। असल में जड़ी-बूटी के बाज़ार में इसकी छाल असली अशोक की छाल में मिलावट के रूप में बेची जाती है, और रासायनिक रूप से अलग है। कृपया इस पेड़ की छाल या पत्तियों को "अशोक" दवा के रूप में इस्तेमाल न करें।
यह लेख AI की सहायता से तैयार किया गया है। महत्वपूर्ण जानकारी की पुष्टि हर भाग में दिए गए स्रोतों से करें।
ऐसा पेड़ लगाएं जिसे आप ट्रैक कर सकें
GreenEye की ज़मीन पर एक पेड़ लगाएं और उसे बढ़ते हुए ट्रैक करें।
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