अशोक (मास्ट ट्री): जयपुर में इसे कैसे लगाएँ और पालें
Monoon longifolium
सड़कों पर दिखने वाला ऊँचा, सदाबहार अशोक या मास्ट ट्री। जयपुर में इसे कैसे लगाएँ और पालें, यह पक्षियों-तितलियों को क्या देता है, और यह असली अशोक (सीता अशोक) से अलग क्यों है।
यह कौन-सा "अशोक" है?
उत्तर भारत में ज़्यादातर लोग जब "अशोक का पेड़" कहते हैं, तो उनके मन में यही पेड़ आता है: झुकी हुई, चमकीली पत्तियों का एक हरा स्तंभ। Flowers of India के अनुसार उत्तर भारत में "अशोक" नाम इसी पेड़ से जुड़ गया है, जबकि "असली" अशोक वह है जिसे सीता अशोक भी कहते हैं। यह लेख सड़क किनारे लगने वाले ऊँचे मास्ट ट्री, Monoon longifolium, के बारे में है, जिसे ज़्यादातर भारतीय किताबें और नर्सरी अब भी Polyalthia longifolia कहती हैं। यह सीताफल के परिवार का पेड़ है।
उत्तर भारत की नर्सरियाँ लगभग हमेशा इसका पतला, झुकी पत्तियों वाला, स्तंभ जैसा रूप बेचती हैं (अक्सर var. pendula लिखा होता है)। इसका जंगली रूप बड़ा और फैला हुआ छायादार पेड़ बनता है। अगर आपको छाया चाहिए, तो नर्सरी से पूछें कि वे कौन-सा रूप दे रहे हैं।
यह लेख AI की सहायता से तैयार किया गया है। महत्वपूर्ण जानकारी की पुष्टि हर भाग में दिए गए स्रोतों से करें।
ऐसा पेड़ लगाएं जिसे आप ट्रैक कर सकें
GreenEye की ज़मीन पर एक पेड़ लगाएं और उसे बढ़ते हुए ट्रैक करें।
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