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पौधाफलदार पेड़

अमरूद का पेड़ (Psidium guajava): भारत में कहाँ उगता है और इसे कैसे लगाएं

Psidium guajava

अमरूद का वैज्ञानिक नाम Psidium guajava है, यह पूरे भारत में उगाया जाने वाला मज़बूत, छोटा फल-वृक्ष है। जानिए अमरूद का गूटी वाला पौधा कब और कैसे लगाएं, घर में कहाँ लगाएं, क्या यह गमले में उग सकता है, फूल और फल कब आते हैं, इसे कैसे पहचानें और किन बातों का ध्यान रखें।

भारत में अमरूद कहाँ उगता है

अमरूद भारत के ज़्यादातर हिस्सों में उगता है, और NHB के अनुसार उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय दोनों तरह की जलवायु में अच्छा रहता है, बशर्ते मिट्टी से पानी जल्दी निकल जाए; ICRAF के अनुसार यह समुद्र तल से 1,500 मीटर तक की ऊँचाई पर फल देता है। यह भारत का मूल पेड़ नहीं है: राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) इसका उद्गम उष्णकटिबंधीय अमेरिका बताता है, और क्यू (Kew) की विश्व सूची (GBIF के ज़रिए देखी गई) भारत में इसे बाहर से लाया गया पौधा मानती है।

NHB के अनुसार उत्तर प्रदेश अमरूद का सबसे प्रमुख राज्य है, जहाँ इलाहाबाद-वाराणसी इलाक़ा सबसे अच्छे फल के लिए जाना जाता है, और NHB बिहार, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और त्रिपुरा को भी उन राज्यों में गिनाता है जहाँ यह सफलता से उगाया जाता है। राजस्थान में सवाई माधोपुर के आसपास अमरूद का जाना-माना इलाक़ा है: राजस्थान पत्रिका की ख़बर के अनुसार जनवरी 2026 में राज्य के कृषि मंत्री ने कहा कि राज्य के 14,000 हेक्टेयर अमरूद बाग़ों में से लगभग 11,000 हेक्टेयर अकेले इसी ज़िले में हैं।

NHB के अनुसार अमरूद सूखा सह लेता है पर अच्छी फ़सल के लिए कुछ सिंचाई चाहिए, जून से सितंबर के बीच लगभग 1000 मिमी बारिश में सबसे अच्छा उगता है, और जहाँ सर्दी साफ़ तौर पर पड़ती है वहाँ फल बेहतर होता है; ICRAF के अनुसार आराम की अवस्था वाले पेड़ हल्का पाला सह लेते हैं। NHB के अनुसार यह उथली, मध्यम काली और क्षारीय मिट्टी में भी उगता है, पर कम से कम 0.5–1 मीटर गहरी, अच्छे निकास वाली और 5.5–7.5 pH वाली मिट्टी में सबसे अच्छा रहता है। विकासपीडिया का अमरूद कैलेंडर 8.2 तक का pH ठीक मानता है, पर पानी भरने वाली ज़मीन और चूने की गाँठों (कंकड़) या चट्टान की परत वाली मिट्टी से बचने को कहता है।

भारत के अलग-अलग हिस्सों में यह कैसा रहता है (इन स्रोतों के आधार पर हमारा आकलन):

  • अच्छा उगता है: उत्तरी मैदान, मध्य भारत, पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत, दोनों तट, दक्षिणी प्रायद्वीप और पठार, अच्छे निकास वाली ज़मीन पर।
  • सावधानी के साथ: उत्तर-पश्चिमी शुष्क क्षेत्र, जिसमें राजस्थान का ज़्यादातर हिस्सा आता है, जहाँ गर्मी के महीनों में छोटे पौधों को पानी मिले तो यह अच्छा चलता है; और कम ऊँचाई वाली पहाड़ियाँ, जहाँ छोटे पौधों को पाले से ढकना पड़ता है।
  • उपयुक्त नहीं: ऊँचा हिमालय, और कोई भी निचली जगह जहाँ बारिश के बाद पानी भरा रहता है।

अमरूद का पेड़ कैसे पहचानें

अमरूद के पेड़ को उसकी पतली, चिकनी, उतरती हुई छाल और उभरी नसों वाली फीकी हरी पत्तियों से सबसे आसानी से पहचाना जा सकता है; ICRAF इसे आमतौर पर 3–10 मीटर ऊँची, कई टेढ़ी-मेढ़ी शाखाओं वाली झाड़ी या छोटा सदाबहार पेड़ बताता है।

  • पत्तियाँ: आमने-सामने जोड़ों में, लंबोतरी से अंडाकार, लगभग 5–15 सेमी लंबी और 4–6 सेमी चौड़ी, कुछ मोटी, ऊपर से फीकी स्लेटी-हरी से पीली-हरी और नीचे से हल्की रोएँदार, उभरी नसों और तेल की बारीक बिंदियों वाली (ICRAF)। ICRAF के अनुसार पत्तियों में सुगंधित तेल होता है।
  • फूल: सफ़ेद, लगभग 2 सेमी लंबी 4–5 नाज़ुक पंखुड़ियों और बीच में बहुत सारे सफ़ेद पुंकेसरों के सुंदर गुच्छे वाले, पत्ती और टहनी के जोड़ पर अकेले या दो-तीन के समूह में (ICRAF)। NHB इन्हें ख़ुशबूदार बताता है। ICRAF के अनुसार फूल साल में लगभग कभी भी नई बगल की टहनियों पर आते हैं; NHB मुख्य फूल फ़रवरी–मार्च, जून–जुलाई और अक्टूबर–नवंबर में बताता है।
  • फल: गोल, अंडाकार या नाशपाती जैसा, लगभग 4–12 सेमी लंबा (ICRAF), पहले हरा और पकने पर पीला (NHB), अक्सर हल्की गुलाबी झलक के साथ (Flowers of India), अंदर मलाई जैसे सफ़ेद से गुलाबी या लाल गूदे में बहुत सारे बीज (ICRAF), और पकने पर तेज़ मीठी ख़ुशबू (Flowers of India)। NHB के अनुसार फूल आने के लगभग पाँच महीने बाद फल पकता है।
  • छाल: हल्की से लालिमा लिए भूरी, पतली और चिकनी, पपड़ी बनकर उतरती हुई (ICRAF), जिसके नीचे हरी-सी परत दिखती है (Flowers of India)।
  • मिलता-जुलता पेड़: जामुन (Syzygium cumini), जो इसी कुल का है, उसकी पत्तियाँ भी आमने-सामने जोड़ों में होती हैं, पर ICRAF के अनुसार जामुन 10–30 मीटर का ऊँचा पेड़ है, उसकी पत्तियाँ बिना रोएँ की और गहरी हरी होती हैं, छाल भूरी या गहरी स्लेटी और काफ़ी चिकनी होती है, और फल 1–2.5 सेमी लंबे छोटे बैंगनी-काले होते हैं जो गुच्छों में लगते हैं।

स्रोत: Kew World Checklist of Vascular Plants (via GBIF): Psidium guajava L., accepted name; Peru the only area not marked introduced; India, Assam and Andaman Is. listed as introduced; Orwa C. et al. (2009). Agroforestree Database 4.0: Psidium guajava. ICRAF; Orwa C. et al. (2009). Agroforestree Database 4.0: Syzygium cumini (look-alike: tree 10-30 m, hairless leaves, purple-black berries 1-2.5 cm). ICRAF; National Horticulture Board (NHB): Guava, area under cultivation, botany and nutrition (states, centre of origin, vitamin C); National Horticulture Board (NHB): Guava, soil and climate (soil depth, pH 5.5-7.5, rainfall, drought, winters); Vikaspedia (Govt of India): Guava month-wise calendar of operations (soil pH up to 8.2, 60 cm pit, 6 m spacing, fencing, weeding, mulch, base shoots, drainage); Flowers of India: Guava (Indian-language names, bark, flowers, fruit); Rajasthan Patrika (19 Jan 2026): guava processing plant for Sawai Madhopur; agriculture minister: 11,000 of Rajasthan's 14,000 ha of guava orchards are in the district

यह लेख AI की सहायता से तैयार किया गया है और GreenEye टीम ने इसे हर भाग में दिए गए स्रोतों से जाँचा है।

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