अमरूद का पेड़ (Psidium guajava): भारत में कहाँ उगता है और इसे कैसे लगाएं
Psidium guajava
अमरूद का वैज्ञानिक नाम Psidium guajava है, यह पूरे भारत में उगाया जाने वाला मज़बूत, छोटा फल-वृक्ष है। जानिए अमरूद का गूटी वाला पौधा कब और कैसे लगाएं, घर में कहाँ लगाएं, क्या यह गमले में उग सकता है, फूल और फल कब आते हैं, इसे कैसे पहचानें और किन बातों का ध्यान रखें।
पहले तीन साल की देखभाल
अमरूद के छोटे पौधों को सूखे महीनों में पानी, निराई और मल्च वाला थावला, पशुओं से बचाव और शुरू से ही नीचा, खुला पेड़ बनाने वाली छँटाई चाहिए।
आकार देना। NHB सुझाता है कि तने का पहला 60–90 सेमी हिस्सा शाखाओं से ख़ाली रखें, फिर लगभग 20–25 सेमी की दूरी पर 4–5 मुख्य शाखाएँ बढ़ने दें, और पौधा लगभग 1.5–1.8 मीटर ऊँचा हो जाए तो ऊपर का सिरा काट दें ताकि बीच का हिस्सा खुला रहे। विकासपीडिया का कैलेंडर तने के निचले हिस्से से, लगभग 50–75 सेमी तक निकलने वाली टहनियाँ हटाने को कहता है। TNAU सुझाता है कि सितंबर–अक्टूबर और फ़रवरी–मार्च में पिछले मौसम की टहनियों के सिरे 10–15 सेमी काट दें, ताकि बगल की टहनियाँ निकलें, जिन पर फूल आते हैं।
निराई, मल्च और पानी का निकास। बारिश में महीने में लगभग एक बार थावले की निराई करें और उसे धान के पुआल, भूसी, मूँगफली के छिलकों या सूखी पत्तियों से ढकें (विकासपीडिया), तने से एक हथेली की दूरी पर (व्यावहारिक सलाह)। विकासपीडिया चेतावनी देता है कि भरा हुआ पानी पत्तियों को पीला कर देता है और पौधे मुरझा जाते हैं, इसलिए पानी जमा हो तो छोटी नाली बना दें।
पाला। उत्तर भारत में जिन रातों IMD पाले की चेतावनी दे, छोटे पौधे को जूट या पुआल की टोपी से ढीला ढक दें और सुबह हटा दें (व्यावहारिक सलाह)।
दूसरे और तीसरे साल में पानी। NHB के अनुसार 2–5 साल के पेड़ों को सूखे मौसम में लगभग हर 4–5 दिन में पानी चाहिए; इसे मोटा अंदाज़ा मानें, पहले मिट्टी जाँचें और ठंडे मौसम में कम पानी दें।
फूल आने के मौसम (बहार)। NHB तीन बहार बताता है: फ़रवरी–मार्च के फूलों से जुलाई–अगस्त में बरसात की फ़सल, जून–जुलाई के फूलों से नवंबर–दिसंबर में सर्दी की फ़सल, और अक्टूबर–नवंबर के फूलों से मार्च–अप्रैल में फ़सल मिलती है। NHB के अनुसार साल में एक ही फ़सल लेना बेहतर है; उत्तर भारत में सर्दी की फ़सल बेहतर होती है, और हल्की मिट्टी में बाग़ वाले मौसम चुनने के लिए पानी रोकते हैं; यह व्यावसायिक तरीका है, घर के पेड़ को इसकी ज़रूरत नहीं। आज़माना चाहें तो अपने स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) से पूछें।
कीट और रोग। TNAU अमरूद की समस्याओं में टी मॉस्किटो बग, माहू (एफ़िड), मिलीबग, फल मक्खी और लाल रतुआ गिनाता है, और NHB उकठा (विल्ट), एन्थ्रेक्नोज़ और स्कैब जोड़ता है। अगर टहनियाँ मुरझाती दिखें, रुई जैसे सफ़ेद कीड़े, गहरे धँसे धब्बे, पत्तियों पर ज़ंग जैसे धब्बे या फल में इल्लियाँ दिखें, तो नमूना या साफ़ फ़ोटो अपने स्थानीय KVK या उद्यान कार्यालय ले जाएँ, और उनकी सलाह के बिना कुछ भी न छिड़कें।
स्रोत: National Horticulture Board (NHB): Guava, irrigation (first year 2-3 days in dry season; 2-5 year trees 4-5 days); National Horticulture Board (NHB): Guava, intercultural operations (bahar flowering seasons, training and pruning); National Horticulture Board (NHB): Guava, diseases (wilt in alkaline soils, anthracnose, scab); National Horticulture Board (NHB): Guava, pests (fruit fly in the monsoon, mealybug; non-chemical measures); TNAU Agritech Portal, Horticulture: Guava (planting season June-December, spacing 5-6 m, 45 cm pit, layers, pruning, bearing 2-3 years, pests); Vikaspedia (Govt of India): Guava month-wise calendar of operations (soil pH up to 8.2, 60 cm pit, 6 m spacing, fencing, weeding, mulch, base shoots, drainage)
यह लेख AI की सहायता से तैयार किया गया है और GreenEye टीम ने इसे हर भाग में दिए गए स्रोतों से जाँचा है।
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