अमरूद का पेड़ (Psidium guajava): भारत में कहाँ उगता है और इसे कैसे लगाएं
Psidium guajava
अमरूद का वैज्ञानिक नाम Psidium guajava है, यह पूरे भारत में उगाया जाने वाला मज़बूत, छोटा फल-वृक्ष है। जानिए अमरूद का गूटी वाला पौधा कब और कैसे लगाएं, घर में कहाँ लगाएं, क्या यह गमले में उग सकता है, फूल और फल कब आते हैं, इसे कैसे पहचानें और किन बातों का ध्यान रखें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अमरूद का वैज्ञानिक नाम क्या है?
अमरूद का वैज्ञानिक नाम Psidium guajava L. है, और यह मर्टल कुल (Myrtaceae) का पेड़ है, वही कुल जिसमें जामुन आता है। हिंदी में इसे अमरूद (amrood, amrud भी लिखा जाता है) कहते हैं, और पेड़ को अमरूद का पेड़।
अमरूद को अंग्रेज़ी में क्या कहते हैं?
अमरूद को अंग्रेज़ी में ग्वावा (guava) कहते हैं, और पेड़ को ग्वावा ट्री (guava tree) या कॉमन ग्वावा। दूसरे भारतीय नामों में बंगाली में पेयारा, मराठी में पेरू, गुजराती में जमरूख, तमिल में कोय्या और मलयालम में पेरा शामिल हैं (Flowers of India)।
अमरूद का पेड़ कैसे लगाएं?
बारिश की शुरुआत में किसी भरोसेमंद नर्सरी का स्वस्थ गूटी वाला या कलमी पौधा, अच्छे निकास वाली ज़मीन पर गड्ढे में लगाएं। विकासपीडिया लगभग 60 सेमी लंबा, चौड़ा और गहरा गड्ढा सुझाता है; उसे ऊपर की मिट्टी में सड़ी गोबर की खाद मिलाकर भरें, मिट्टी की पिंडी बीच में रखें और कलम का जोड़ हो तो मिट्टी से ऊपर रखें, मिट्टी दबाएँ, तुरंत पानी दें और हवा तेज़ हो तो डंडी से बाँधें (NHB)। NHB बाग़ के पेड़ों के बीच लगभग 6 मीटर की दूरी बताता है; घर के पेड़ के लिए यह मोटा अंदाज़ा है, घर या पाइपों से सुरक्षित दूरी नहीं।
अमरूद का पेड़ कब लगाना चाहिए?
अमरूद बारिश के मौसम में लगाएं। अंदाज़े के तौर पर, उत्तरी मैदानों, राजस्थान, मध्य और पूर्वी भारत में जुलाई-अगस्त, पूर्वोत्तर में जून-अगस्त, और अक्टूबर-नवंबर केवल तमिलनाडु के तट पर, जहाँ मुख्य बारिश उत्तर-पूर्वी मानसून से होती है (TNAU वहाँ जून से दिसंबर बताता है)। जब आपके ज़िले में बारिश से मिट्टी भीग जाए तब लगाएं, और अप्रैल-जून में न लगाएं।
अमरूद का पेड़ कहाँ लगाना चाहिए?
अमरूद अपनी सबसे खुली, धूप वाली जगह पर, ऐसी मिट्टी में लगाएं जहाँ बारिश के बाद कभी पानी न भरे, क्योंकि NHB के अनुसार यह अच्छे निकास वाली मिट्टी में सबसे अच्छा रहता है। यह उथली, फैलने वाली जड़ों वाली 3-10 मीटर की झाड़ी या छोटा पेड़ बनता है (ICRAF), इसलिए इसे पक्के फ़र्श, पाइपों और ऊपर से जाते तारों से दूर रखें। हमारे मोटे नियम के तौर पर इसके चारों ओर लगभग 5-6 मीटर खुली जगह छोड़ें, जो TNAU की बताई बाग़ के पेड़ों के बीच 5-6 मीटर की दूरी से मेल खाती है; यह केवल मोटा अंदाज़ा है, सुरक्षित दूरी नहीं, इसलिए जगह कम हो तो अपने स्थानीय उद्यान कार्यालय से पूछें।
गमले में अमरूद का पौधा कैसे लगाएं?
अमरूद को कुछ साल तक बड़े गमले में रखा जा सकता है, पर हमारे स्रोतों में भारत के लिए गमले में उगाने का कोई परखा हुआ तरीका नहीं मिला, इसलिए इसे मोटा अंदाज़ा मानें। अमरूद स्वभाव से 3-10 मीटर की झाड़ी या छोटा पेड़ है (ICRAF), इसलिए गूटी वाले या कलमी पौधे से शुरू करें, जितना बड़ा और अच्छे निकास वाला गमला संभाल सकें उतना लें, उसे पूरी धूप में रखें, ऊपर की कुछ सेंटीमीटर मिट्टी सूखने पर पानी दें और छँटाई करके छोटा रखें; ज़मीन में लगे पेड़ से कम फल आएँगे। अपने इलाक़े के हिसाब से सलाह के लिए अपने स्थानीय KVK से पूछें।
अमरूद के पेड़ पर फूल और फल कब आते हैं, और इसमें कितने साल लगते हैं?
अमरूद पर साल में लगभग कभी भी नई टहनियों पर फूल आ सकते हैं (ICRAF), पर NHB फूल आने के तीन मुख्य मौसम बताता है, फ़रवरी-मार्च, जून-जुलाई और अक्टूबर-नवंबर, और फल लगभग पाँच महीने बाद पकता है। गूटी वाले या कलमी पौधे 2-3 साल में और बीज से उगे पौधे 4-5 साल में फल देने लगते हैं (NHB), और ICRAF के अनुसार पेड़ 5-8 साल में पूरे फल देने लगते हैं।
अमरूद का पेड़ कैसे पहचानें?
ऐसा छोटा सदाबहार पेड़ देखें जिसकी पतली, चिकनी छाल पपड़ी बनकर उतरती हो और फीकी हरी पत्तियाँ आमने-सामने जोड़ों में हों, उभरी नसों वाली, लगभग 5-15 सेमी लंबी (ICRAF)। इसके सफ़ेद फूलों में बहुत सारे पुंकेसरों का गुच्छा होता है, और गोल या नाशपाती जैसा फल पकने पर पीला हो जाता है। जामुन इसी कुल का है, पर ICRAF के अनुसार वह ज़्यादा ऊँचा पेड़ है, जिसकी पत्तियाँ बिना रोएँ की और गहरी हरी होती हैं, छाल भूरी या गहरी स्लेटी और काफ़ी चिकनी होती है, और फल छोटे बैंगनी-काले होते हैं।
अमरूद का पेड़ घर में लगाना शुभ है या अशुभ?
अमरूद का पेड़ शुभ है या अशुभ, यह मान्यता की बात है, और हमारे स्रोतों में इसके लिए कोई धार्मिक या वास्तु नियम नहीं मिला। व्यावहारिक जवाब यह है कि अमरूद एक छोटा, काम का फल-वृक्ष है जो धूप वाले घरेलू बग़ीचे में ठीक रहता है, बशर्ते इसे दीवारों और पाइपों से दूर, ऐसी ज़मीन पर लगाया जाए जहाँ पानी न भरा रहे।
क्या अमरूद के पेड़ का कोई हिस्सा ज़हरीला है?
अमरूद के पेड़ के ज़हरीलेपन की पक्की जानकारी नहीं है: पका फल बहुत खाया जाता है, पर हमें पत्तियों, छाल या बीजों पर इंसानों या पालतू जानवरों के लिए कोई भरोसेमंद जानकारी नहीं मिली, और ASPCA में अमरूद की कोई प्रविष्टि नहीं मिली। छोटे बच्चों और पालतू जानवरों को पत्तियाँ या छाल चबाने न दें, और कोई चबा ले और तबीयत ख़राब लगे तो डॉक्टर या पशु-चिकित्सक को दिखाएँ।
स्रोत: Orwa C. et al. (2009). Agroforestree Database 4.0: Psidium guajava. ICRAF; Orwa C. et al. (2009). Agroforestree Database 4.0: Syzygium cumini (look-alike: tree 10-30 m, hairless leaves, purple-black berries 1-2.5 cm). ICRAF; National Horticulture Board (NHB): Guava, planting (spacing 6 x 6 m / 5 x 5 m, 0.6 m pits, planting method, staking); National Horticulture Board (NHB): Guava, intercultural operations (bahar flowering seasons, training and pruning); National Horticulture Board (NHB): Guava, harvesting and yield (ripening 5 months after flowering; bearing age 2-3 / 4-5 years); TNAU Agritech Portal, Horticulture: Guava (planting season June-December, spacing 5-6 m, 45 cm pit, layers, pruning, bearing 2-3 years, pests); Vikaspedia (Govt of India): Guava month-wise calendar of operations (soil pH up to 8.2, 60 cm pit, 6 m spacing, fencing, weeding, mulch, base shoots, drainage); Flowers of India: Guava (Indian-language names, bark, flowers, fruit)
यह लेख AI की सहायता से तैयार किया गया है और GreenEye टीम ने इसे हर भाग में दिए गए स्रोतों से जाँचा है।
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