अमलतास का पेड़ (Cassia fistula): जयपुर में कैसे लगाएँ और देखभाल करें
Cassia fistula
अमलतास जयपुर की सबसे तेज़ गर्मी में सुनहरे फूलों से लद जाता है, जड़ जमने के बाद सूखा झेल लेता है और बकरियाँ इसे नहीं चरतीं। जानिए इसे कब लगाएँ, छोटे पौधों को पाले से कैसे बचाएँ, इसके पारंपरिक उपयोग, और फलियों का गूदा क्यों नहीं खाना चाहिए।
जयपुर में अमलतास क्यों लगाएँ
अमलतास भारत के सबसे ज़्यादा फैले हुए जंगली पेड़ों में से है। अरावली के झाड़ीदार जंगलों में यह खैर, धौ, रौंझ और खेजड़ी के साथ अपने आप उगता है। ICFRE के अनुसार जहाँ यह प्राकृतिक रूप से उगता है, वहाँ छाया में अधिकतम तापमान 35–47.5 °C तक जाता है और सालाना बारिश लगभग 500 मिमी से 3,000 मिमी से भी ज़्यादा होती है। जयपुर में साल भर में लगभग 600 मिमी बारिश होती है और पारा 48.5 °C तक जा चुका है। यानी जयपुर इस पेड़ की गर्म और सूखी सीमा के पास है, पर उसके भीतर है।
वन विशेषज्ञ इसे "सूखा झेलने में पक्का" पेड़ बताते हैं। यह कमज़ोर, उथली मिट्टी में और ग्रेनाइट व बलुआ पत्थर वाली ज़मीन पर भी उग जाता है। ICRAF के अनुसार यह pH 5.5 से 8.7 तक की मिट्टी में चलता है, इसलिए जयपुर की ज़्यादातर रेतीली, क्षारीय ज़मीन ठीक है, बस जड़ों के पास पानी भरा न रहे।
राजस्थान के लिए एक बड़ा फ़ायदा है। ICFRE लिखता है कि अमलतास को "बकरियाँ भी बिल्कुल नहीं चरतीं", और गाय-भैंस भी इसे छोड़ देती हैं। इसीलिए यह चरागाहों में भी बच जाता है, जहाँ दूसरे पौधे चर लिए जाते हैं।
कमज़ोरी ठंड है। अमलतास पाला नहीं झेल पाता। पाला छोटे पौधों को ज़मीन तक मार सकता है, हालाँकि वे आमतौर पर जड़ के पास से फिर फूट आते हैं। जयपुर का सबसे कम तापमान −2.2 °C दर्ज हुआ है। पहले साल के पौधे के लिए दिसंबर से फ़रवरी की साफ़ आसमान वाली, हवा-रहित रातें सबसे ख़तरनाक होती हैं।
यह लेख AI की सहायता से तैयार किया गया है। महत्वपूर्ण जानकारी की पुष्टि हर भाग में दिए गए स्रोतों से करें।
ऐसा पेड़ लगाएं जिसे आप ट्रैक कर सकें
GreenEye की ज़मीन पर एक पेड़ लगाएं और उसे बढ़ते हुए ट्रैक करें।
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