अमलतास का पेड़ (Cassia fistula): जयपुर में कैसे लगाएँ और देखभाल करें
Cassia fistula
अमलतास जयपुर की सबसे तेज़ गर्मी में सुनहरे फूलों से लद जाता है, जड़ जमने के बाद सूखा झेल लेता है और बकरियाँ इसे नहीं चरतीं। जानिए इसे कब लगाएँ, छोटे पौधों को पाले से कैसे बचाएँ, इसके पारंपरिक उपयोग, और फलियों का गूदा क्यों नहीं खाना चाहिए।
परंपरा और संस्कृति
संस्कृत में अमलतास को आरग्वध कहते हैं, जिसका अर्थ अक्सर "रोगों को मारने वाला" बताया जाता है। यह आयुर्वेद का पुराना पौधा है और यूनानी व लोक चिकित्सा में भी इस्तेमाल होता है। बीजों के आसपास का मीठा काला गूदा सबसे ज़्यादा दस्तावर के रूप में जाना जाता है, और जड़, छाल, पत्ते व फूल भी पारंपरिक नुस्ख़ों में आते हैं। यह केवल पारंपरिक उपयोग है, चिकित्सा सलाह नहीं।
केरल में इसका फूल कणिक्कोन्ना कहलाता है और वहाँ का राज्य पुष्प है। अप्रैल में मलयालम नववर्ष विशु पर परिवार "विशुक्कणि" सजाते हैं: पीतल के बर्तन में चावल, नारियल, सुनहरी ककड़ी, सिक्के, दीया और कणिक्कोन्ना के फूल। विशु की सुबह परिवार सबसे पहले इसी को देखता है, ताकि पूरा साल अच्छा जाए।
यह लेख AI की सहायता से तैयार किया गया है। महत्वपूर्ण जानकारी की पुष्टि हर भाग में दिए गए स्रोतों से करें।
ऐसा पेड़ लगाएं जिसे आप ट्रैक कर सकें
GreenEye की ज़मीन पर एक पेड़ लगाएं और उसे बढ़ते हुए ट्रैक करें।
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