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अमलतास का पेड़ (Cassia fistula): जयपुर में कैसे लगाएँ और देखभाल करें

Cassia fistula

अमलतास जयपुर की सबसे तेज़ गर्मी में सुनहरे फूलों से लद जाता है, जड़ जमने के बाद सूखा झेल लेता है और बकरियाँ इसे नहीं चरतीं। जानिए इसे कब लगाएँ, छोटे पौधों को पाले से कैसे बचाएँ, इसके पारंपरिक उपयोग, और फलियों का गूदा क्यों नहीं खाना चाहिए।

विषाक्तता

सावधानियाँ और सुरक्षा

  • फलियों का गूदा दस्तावर है। ICRAF और Flowers of India इसे हल्का जुलाब बताते हैं, पर इसे विरेचक (तेज़ दस्त लाने वाला) भी माना गया है, और ICRAF के अनुसार बीज उल्टी करा सकते हैं। बच्चों को गिरी हुई फलियों का चिपचिपा गूदा न चबाने दें, और पालतू जानवरों को भी इससे दूर रखें।
  • ख़ुद से दवा न बनाएँ। चूहों पर हुए प्रयोगशाला अध्ययनों में फली और बीज के अर्क की तुरंत होने वाली विषाक्तता कम मिली, पर इससे घरेलू नुस्ख़े सुरक्षित नहीं हो जाते। यूनानी चिकित्सा में तो फल को गर्भपात कराने वाला भी बताया गया है। अमलतास का कोई भी इस्तेमाल करने से पहले, ख़ासकर बच्चों के लिए या गर्भावस्था में, योग्य डॉक्टर से सलाह लें।
  • पाला जयपुर में छोटे पेड़ों के लिए सबसे बड़ा ख़तरा है। पहली दो सर्दियों में ढककर रखें।
  • उथली जड़ें और सकर: पेड़ को नींव से दूर रखें, और फ़र्श में निकलने वाले सकर हटाते रहें।
  • गिरती फलियाँ: पकी फलियाँ लगभग मई से गिरने लगती हैं। पार्किंग या फुटपाथ के पास इन्हें साफ़ करना पड़ेगा।

ग्रीनआई के साथ किसी के नाम पर पेड़ लगाइए: पेड़ उपहार में दें

मनुष्य
हल्का विषैला

प्रभावित भाग: fruit pulp, seeds

पालतू और अन्य पशु
सत्यापित नहीं — पालतू जानवरों या बच्चों के संपर्क में लाने से पहले जाँच लें

यह लेख AI की सहायता से तैयार किया गया है। महत्वपूर्ण जानकारी की पुष्टि हर भाग में दिए गए स्रोतों से करें।

ऐसा पेड़ लगाएं जिसे आप ट्रैक कर सकें

GreenEye की ज़मीन पर एक पेड़ लगाएं और उसे बढ़ते हुए ट्रैक करें।

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