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अमलतास का पेड़ (Cassia fistula): जयपुर में कैसे लगाएँ और देखभाल करें

Cassia fistula

अमलतास जयपुर की सबसे तेज़ गर्मी में सुनहरे फूलों से लद जाता है, जड़ जमने के बाद सूखा झेल लेता है और बकरियाँ इसे नहीं चरतीं। जानिए इसे कब लगाएँ, छोटे पौधों को पाले से कैसे बचाएँ, इसके पारंपरिक उपयोग, और फलियों का गूदा क्यों नहीं खाना चाहिए।

लाभ

अमलतास के फ़ायदे

सबसे गर्म दिनों में रंग

उत्तर भारत में यह लगभग मध्य मई से मध्य जून तक, कभी-कभी उसके बाद भी, फूलता है। पूरे खिलाव में ऐसा लगता है मानो पेड़ पर बस फूल ही फूल हैं, पत्ते नहीं। इसी वजह से इसे सजावटी पेड़ के रूप में ख़ूब लगाया जाता है।

मधुमक्खियाँ, तितलियाँ और जीव-जंतु

मधुमक्खियाँ फूलों से पराग लेती हैं और पत्ती की डंडी के आधार पर बनी छोटी ग्रंथियों से रस। पत्तियों पर कॉमन इमिग्रेंट तितली की इल्लियाँ पलती हैं, और बंदर, पक्षी व सियार फलियों का मीठा गूदा खाते हैं, जिससे बीज फैलते हैं।

हल्की छाया, कम पानी

छत्र खुला होता है, इसलिए छाया घनी नहीं, छनकर आने वाली होती है: आँगन, पार्क के किनारे या गली के लिए अच्छी। दो-तीन गर्मियाँ निकल जाने के बाद इसे बहुत कम पानी चाहिए।

लकड़ी और छाल

इसकी लाल-सी लकड़ी सख़्त, भारी और टिकाऊ होती है, और खंभों, खेती के औज़ारों और पहियों में काम आती रही है; छाल चमड़ा पकाने (टैनिंग) में इस्तेमाल होती थी। ग्रीनआई के उपहार वाले पेड़ काटने के लिए नहीं, खड़े रहने के लिए लगाए जाते हैं।

  • सजावटी: भारत के सबसे सुंदर फूलदार पेड़ों में से एक: 30-60 सेमी लंबे पीले लटकते गुच्छे, उत्तर भारत में लगभग मध्य मई से मध्य जून तक, अक्सर तब जब पेड़ पर पत्ते कम होते हैं।
  • परागणकर्ता: मधुमक्खियाँ फूलों से पराग और पत्ती की डंडी के आधार पर बनी छोटी ग्रंथियों से रस लेती हैं।
  • जैव विविधता: कॉमन इमिग्रेंट तितली की इल्लियाँ इसकी पत्तियों पर पलती हैं; बंदर, पक्षी और सियार फलियों का मीठा गूदा खाकर बीज फैलाते हैं।
  • छाया और ठंडक: खुला, फैला हुआ छत्र हल्की, छनकर आने वाली छाया देता है, जो आँगन, पार्क के किनारे और गलियों के लिए ठीक है।
  • जल संरक्षण: सूखा झेलने वाला पेड़; पहली दो-तीन गर्मियाँ निकल जाने के बाद बहुत कम पानी चाहिए।
  • औषधीय: आयुर्वेद में आरग्वध के नाम से जाना जाता है, यूनानी और लोक चिकित्सा में भी उपयोग; फली का गूदा पारंपरिक जुलाब है। यह केवल पारंपरिक उपयोग है, चिकित्सा सलाह नहीं। ख़ुद से दवा न बनाएँ।
  • इमारती लकड़ी: लाल-सी लकड़ी सख़्त, भारी (लगभग 800 किग्रा/घन मीटर) और टिकाऊ, जिससे पारंपरिक रूप से खंभे, खेती के औज़ार और पहिये बनते रहे हैं। ग्रीनआई के उपहार वाले पेड़ काटने के लिए नहीं लगाए जाते।
  • सांस्कृतिक: कणिक्कोन्ना केरल का राज्य पुष्प है, और अप्रैल में मलयालम नववर्ष विशु पर सजाए जाने वाले विशुक्कणि में इसके फूल रखे जाते हैं।
  • अन्य: इसकी छाल चमड़ा पकाने (टैनिंग) में इस्तेमाल होती रही है।

यह लेख AI की सहायता से तैयार किया गया है। महत्वपूर्ण जानकारी की पुष्टि हर भाग में दिए गए स्रोतों से करें।

ऐसा पेड़ लगाएं जिसे आप ट्रैक कर सकें

GreenEye की ज़मीन पर एक पेड़ लगाएं और उसे बढ़ते हुए ट्रैक करें।

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