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सागवान (Tectona grandis): भारत में कहाँ उगता है और इसे कैसे लगाएं

Tectona grandis

सागवान या सागौन (टीक) का वैज्ञानिक नाम Tectona grandis है। यह भारत का सबसे मशहूर इमारती लकड़ी वाला पेड़ है, जो प्रायद्वीप और मध्य भारत के जंगलों का मूल पेड़ है और दक्षिणी राजस्थान तक पहुँचता है। जानिए इसे कैसे और कब लगाएं, कैसे पहचानें, यह कितनी तेज़ी से बढ़ता है, पहले तीन साल की देखभाल, और किन बातों का ध्यान रखें।

भारत में सागवान कहाँ उगता है

सागवान मुख्य रूप से प्रायद्वीपीय और मध्य भारत के सूखे और नम पतझड़ी जंगलों में अपने-आप उगता है, और इस इलाक़े से बहुत दूर तक लगाया भी जाता है। Kew की विश्व सूची (GBIF के ज़रिए पढ़ी गई) इसका मूल क्षेत्र भारत, असम, बांग्लादेश, म्यांमार, थाईलैंड, लाओस, कंबोडिया और वियतनाम बताती है, और श्रीलंका, जावा और अंडमान द्वीपों को उन कई जगहों में गिनती है जहाँ इसे बाहर से लाया गया। केरल वन अनुसंधान संस्थान (KFRI) के वैज्ञानिकों द्वारा APFORGEN कार्यक्रम के लिए लिखी गई प्रजाति-जानकारी के अनुसार सागवान के प्राकृतिक क्षेत्र का लगभग एक-तिहाई हिस्सा भारत में है, जो प्रायद्वीप में लगभग 24°N अक्षांश से नीचे, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक और केरल में बिखरा हुआ है।

FAO के सागवान सेमिनार की एक किताब के एक अध्याय के अनुसार इस इलाक़े की उत्तरी सीमा राजस्थान की पश्चिमी अरावली है, और सबसे ज़रूरी प्राकृतिक सागवान वन होशंगाबाद–बैतूल (मध्य प्रदेश), चांदा और मेलघाट (महाराष्ट्र), वायनाड (केरल), अन्नामलाई पहाड़ियाँ (तमिलनाडु) और उत्तर कन्नड़ (कर्नाटक) में हैं।

राजस्थान में सागवान

राजस्थान में प्राकृतिक सागवान है, पर केवल दक्षिण में। Indian Forester में 1962 का एक लेख राज्य के दक्षिणी हिस्सों के उन बिगड़े हुए सागवान वनों के बारे में बताता है जिन्हें सावधानी से सँभालने की ज़रूरत थी, और भूगोल की परीक्षा-तैयारी वाली सामग्री (द्वितीयक स्रोत) इन सूखे सागवान वनों को बांसवाड़ा, डूंगरपुर और उदयपुर जैसे पहाड़ी ज़िलों में बताते हैं। यह भारत में जंगली सागवान की उत्तरी सीमा है, इसलिए यहाँ केरल जैसे विशाल पेड़ों की उम्मीद न करें (हमारी टिप्पणी)। पश्चिमी राजस्थान की बात अलग है: ICRAF के अनुसार इसकी सामान्य बारिश सीमा साल में 1,200–2,500 मिमी है, और उत्तरी टोगो (अफ़्रीका) में यह साल में लगभग 600 मिमी बारिश में भी उगता है, जो इसकी सीमा का सबसे निचला सिरा है। थार में नियमित पानी के बिना सागवान ठीक से नहीं बढ़ेगा (हमारा आकलन)।

इसे क्या चाहिए

ICRAF के अनुसार सागवान गर्म जलवायु का पेड़ है जहाँ बारिश और सूखे का मौसम साफ़ अलग हो; यह समुद्र तल से लगभग 1,200 मीटर तक उगता है, और वहाँ का सालाना औसत तापमान मोटे तौर पर 14–36 °C होता है। इसके लिए सबसे अच्छी मिट्टी गहरी, अच्छे निकास वाली और उपजाऊ होती है, जिसका pH लगभग 6.5–8 हो, और यह पानी भराव या कमज़ोर लैटेराइट मिट्टी सहन नहीं करता। TNAU का वानिकी पोर्टल अच्छे निकास वाली बलुई दोमट मिट्टी को बेहतर मानता है, जिसका pH 6–7 हो और 8.5 से ज़्यादा न हो।

भारत के हर हिस्से के लिए यह कितना ठीक है (ऊपर की सीमाओं के आधार पर हमारा आकलन):

  • अच्छा उगता है: मध्य भारत, दक्कन का पठार, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और दक्षिणी राजस्थान की पहाड़ियाँ, जो इसके जंगली क्षेत्र के भीतर या पास हैं; पूर्वोत्तर भी, जिसे Kew इसके मूल क्षेत्र में गिनता है।
  • सावधानी के साथ: उत्तरी मैदान और पूर्वी भारत, जहाँ इसे बहुत लगाया जाता है। गहरी, अच्छे निकास वाली मिट्टी चुनें, और जहाँ सर्दियाँ ठंडी हों वहाँ धीमी बढ़त की उम्मीद रखें (हमारा आकलन)।
  • उपयुक्त नहीं: बिना सिंचाई के थार का रेगिस्तान, लगभग 1,200 मीटर से ऊँचा हिमालय (ICRAF की बताई ऊपरी सीमा), और कोई भी निचली ज़मीन जहाँ कई दिन पानी भरा रहे।

सागवान को कैसे पहचानें

सागवान को सबसे आसानी से उसके पत्तों से पहचाना जाता है: KFRI की जानकारी के अनुसार पत्ते चौड़े अंडाकार, लगभग 15–60 सेमी लंबे और 12–35 सेमी चौड़े होते हैं, किनारे चिकने होते हैं, और वे आमने-सामने जोड़ों में लगते हैं, हर जोड़ा अगले जोड़े से समकोण पर। ICRAF के अनुसार पत्तों की निचली सतह पर रोएँ होते हैं।

  • फूल: बहुत छोटे (लगभग 0.7–0.9 सेमी), सफ़ेद या हल्के क्रीम रंग के, डालियों के सिरों पर बड़े, ढीले गुच्छों में; KFRI के अनुसार ये गुच्छे लगभग 50 सेमी तक लंबे होते हैं। फ़्लावर्स ऑफ़ इंडिया के अनुसार फूल मानसून में आते हैं।
  • फल: लगभग 2 सेमी का सख़्त, गोल-सा फल, जो पतले, काग़ज़ जैसे, गुब्बारे-नुमा आवरण में लिपटा रहता है जिससे हवा उसे दूर ले जाती है (KFRI)। फ़्लावर्स ऑफ़ इंडिया के अनुसार फल सर्दियों में पकता है।
  • छाल: हल्की भूरी या धूसर, पतली, लंबाई में उथली दरारों वाली, जो पतली खड़ी पट्टियों में उतरती है (KFRI)।
  • आकार: सीधा तना, जो पुराना होने पर अक्सर नालीदार और नीचे से थोड़ा फैला हुआ होता है, और खुला छत्र। सूखे मौसम में पेड़ बिना पत्तों का होता है; फ़्लावर्स ऑफ़ इंडिया नवंबर से जनवरी को पत्ते-रहित महीने बताता है, पर यह जलवायु के अनुसार बदलता है।

मिलता-जुलता पेड़, जिससे मिलान कर लें: गम्हार या गम्हड़ (Gmelina arborea), इसी कुल का एक और बड़े पत्तों वाला इमारती पेड़, जो इन्हीं इलाक़ों में बहुत लगाया जाता है। फ़्लावर्स ऑफ़ इंडिया के अनुसार गम्हार के फूल तुरही जैसे, भूरी झलक वाले पीले और 3–4 सेमी लंबे होते हैं, और फ़रवरी–अप्रैल में खिलते हैं जब पेड़ लगभग बिना पत्तों का होता है। सागवान के फूल बहुत छोटे, सफ़ेद और बारिश में आते हैं, और उसका फल काग़ज़ जैसी थैली में रहता है।

स्रोत: Kew World Checklist of Vascular Plants via GBIF: Tectona grandis L.f. (accepted; native distribution Assam, Bangladesh, Cambodia, India, Laos, Myanmar, Thailand, Vietnam; introduced in Sri Lanka, Java, Andaman Is. and others); ICRAF Agroforestree Database 4.0: Orwa C. et al. (2009). Tectona grandis; APFORGEN Priority Species Information Sheet: Tectona grandis, prepared by K.M. Bhat and E.P. Indira, Kerala Forest Research Institute (KFRI); FAO RAP, Teak for the Future (regional teak seminar proceedings): Ko Ko Gyi & Kyaw Tint, Management status of natural teak forests (India natural distribution, citing Wood 1992); Bharat Singh (1962). Degraded Teak Forests of Rajasthan and their Rehabilitation. Indian Forester 88(4):285-288; Rajasthan geography study material (secondary): Forests and Natural Vegetation of Rajasthan, dry deciduous teak forests in Udaipur, Dungarpur, Banswara, Jhalawar, Baran, Pratapgarh, Chittorgarh; TNAU Agritech Portal (Forestry): Teak (Tectona grandis); Flowers of India: Teak (Tectona grandis); Flowers of India: Gamhar (Gmelina arborea)

यह लेख AI की सहायता से तैयार किया गया है और GreenEye टीम ने इसे हर भाग में दिए गए स्रोतों से जाँचा है।

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