सागवान (Tectona grandis): भारत में कहाँ उगता है और इसे कैसे लगाएं
Tectona grandis
सागवान या सागौन (टीक) का वैज्ञानिक नाम Tectona grandis है। यह भारत का सबसे मशहूर इमारती लकड़ी वाला पेड़ है, जो प्रायद्वीप और मध्य भारत के जंगलों का मूल पेड़ है और दक्षिणी राजस्थान तक पहुँचता है। जानिए इसे कैसे और कब लगाएं, कैसे पहचानें, यह कितनी तेज़ी से बढ़ता है, पहले तीन साल की देखभाल, और किन बातों का ध्यान रखें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सागवान का वैज्ञानिक नाम क्या है?
सागवान, यानी टीक, का वैज्ञानिक नाम Tectona grandis L.f. है। यह तुलसी-पुदीना कुल Lamiaceae का पेड़ है; पुरानी किताबें इसे Verbenaceae में रखती हैं। Kew की विश्व सूची (GBIF के ज़रिए) यही नाम मानती है।
सागवान को अंग्रेज़ी में क्या कहते हैं, और टीक को हिंदी में क्या कहते हैं?
सागवान को अंग्रेज़ी में टीक (teak) कहते हैं; ICRAF इंडियन ओक (Indian oak) नाम भी देता है। हिंदी में टीक को सागवान या सागौन कहते हैं, और सगुन भी लिखा जाता है। दूसरे भारतीय नामों में मराठी और गुजराती में साग, बांग्ला में सेगुन और तमिल में तेक्कु शामिल हैं।
सागवान का पेड़ कैसे लगाएं?
बारिश की शुरुआत में पॉलीबैग या रूट-ट्रेनर वाला पौधा पूरी धूप में, गहरी और अच्छे निकास वाली मिट्टी में लगाएँ। हर तरफ़ लगभग 45 सेमी का गड्ढा हमारा मोटा अनुमान है: निकली हुई मिट्टी में अच्छी सड़ी गोबर की खाद मिलाकर भरें, पौधे को उतनी ही गहराई पर लगाएँ जितना वह थैली में था, उथला थावला बनाएँ और मवेशियों से बचाने के लिए ट्री-गार्ड लगाएँ। वनकर्मी अक्सर इसकी जगह स्टंप (एक साल के पौधे, जिनका तना और जड़ छोटी काट दी जाती है) सब्बल से बने छेद में लगाते हैं। खरपतवार और सूखी घास साफ़ रखें और केवल लंबे सूखे में पानी दें।
सागवान का पौधा कब लगाना चाहिए?
सागवान मानसून के साथ लगाएँ, जब बारिश से मिट्टी अच्छी तरह गीली हो जाए। मार्गदर्शन के तौर पर: मध्य भारत, दक्कन, दक्षिणी राजस्थान और उत्तरी मैदानों में जुलाई या अगस्त; पूर्वी भारत और पूर्वोत्तर में जून या जुलाई। केरल के तट पर केरल कृषि विश्वविद्यालय स्टंप को मानसून से पहले की बौछारों के साथ अप्रैल–मई में और पॉलीबैग वाले पौधों को जून–जुलाई में लगाने की सलाह देता है। गर्म, सूखे महीनों में तभी लगाएँ जब पानी दे सकें।
सागवान का पेड़ कैसा होता है और इसे कैसे पहचानें?
सागवान के पत्ते बहुत बड़े, अंडाकार, लगभग 15–60 सेमी लंबे होते हैं, जो आमने-सामने जोड़ों में लगते हैं और नीचे से रोएँदार होते हैं (KFRI, ICRAF)। मानसून में डालियों के सिरों पर छोटे सफ़ेद फूलों के बड़े गुच्छे आते हैं, फिर काग़ज़ जैसे गुब्बारे-नुमा आवरण में लिपटे गोल-से फल। छाल हल्की भूरी या धूसर होती है और पतली खड़ी पट्टियों में उतरती है, और सूखे मौसम के कुछ हिस्से में पेड़ बिना पत्तों का रहता है। गम्हार (Gmelina arborea) के भी बड़े पत्ते होते हैं, पर उसके फूल पीले-भूरे तुरही जैसे होते हैं जो फ़रवरी–अप्रैल में खिलते हैं।
सागवान पर फूल कब आते हैं, और यह कितनी तेज़ी से बढ़ता है?
सागवान पर ज़्यादातर बारिश के मौसम में फूल आते हैं, और फ़्लावर्स ऑफ़ इंडिया के अनुसार फल सर्दियों में पकता है। ICRAF के अनुसार शुरुआती बढ़त तेज़ होती है: बाग़ानों में 5 साल पर लगभग 13 मीटर ऊँचाई असामान्य नहीं है, और लगभग 15–20 साल बाद बढ़त धीमी हो जाती है। पहली बार फूल आने की उम्र बहुत बदलती है: ICRAF के अनुसार थाईलैंड में आमतौर पर 8 से 10 साल में फूल आने लगते हैं। सूखी या कमज़ोर मिट्टी में बढ़त काफ़ी धीमी रहेगी।
क्या राजस्थान में सागवान उगता है?
हाँ, पर प्राकृतिक रूप से केवल दक्षिणी राजस्थान की पहाड़ियों में, जो भारत में जंगली सागवान की उत्तरी सीमा हैं। Indian Forester का 1962 का एक लेख दक्षिणी राजस्थान के बिगड़े हुए सागवान वनों के बारे में बताता है, और भूगोल की परीक्षा-तैयारी वाली सामग्री (द्वितीयक स्रोत) बांसवाड़ा, डूंगरपुर और उदयपुर जैसे ज़िलों के नाम लेते हैं। सूखे पश्चिमी राजस्थान और थार में इसे नियमित पानी चाहिए, क्योंकि ICRAF इसकी सामान्य बारिश साल में 1,200–2,500 मिमी बताता है (हमारा आकलन)।
सागवान के पेड़ की क़ीमत कितनी होती है?
हम क़ीमत नहीं बताते, क्योंकि इसकी कोई एक क़ीमत नहीं है। पौधे की क़ीमत नर्सरी और जगह पर निर्भर करती है, और बड़े पेड़ की क़ीमत उसकी उम्र, मोटाई, लकड़ी की गुणवत्ता और पेड़ काटने व लकड़ी ले जाने के स्थानीय नियमों पर। सागवान लंबे समय का पेड़ है: ICRAF बाग़ान के लिए लगभग 80 साल का कटाई-चक्र बताता है। सागवान काटने या बेचने से पहले अपने राज्य के वन विभाग से परमिट के बारे में पूछें।
क्या सागवान गमले में या घर के पास लगा सकते हैं?
लंबे समय के लिए नहीं: सामान्य सलाह के तौर पर छोटा पौधा एक मौसम तक नीचे छेद वाले बड़े गमले में रह सकता है, पर सागवान 30 मीटर से ऊँचा पेड़ बनता है (ICRAF) और उसकी जगह ज़मीन में है। लंबे समय तक गमले में उगाने पर हमें कोई स्रोत नहीं मिला। ICRAF के अनुसार इसकी जड़ें उथली होती हैं पर बगल में लगभग 15 मीटर तक फैल सकती हैं, इसलिए चारों ओर लगभग 6 मीटर खुली जगह हमारा मोटा शुरुआती अनुमान है, घर, दीवार या पाइप से सुरक्षित दूरी नहीं; जगह कम हो तो अपने स्थानीय वन या उद्यान विभाग के दफ़्तर से पूछें।
क्या सागवान का कोई हिस्सा ज़हरीला है?
सागवान का कोई हिस्सा खाने पर ज़हरीला है या नहीं, इसकी पक्की जानकारी उपलब्ध नहीं है, इसलिए इसे न खाएँ और बच्चों और पालतू जानवरों को इसे चबाने से रोकें। इसका बुरादा त्वचा में जलन के लिए जाना जाता है: नॉर्वे के एक फ़र्नीचर कारख़ाने पर 1962 के एक अध्ययन में सागवान की धूल के ज़्यादा संपर्क वाले लगभग आधे कामगारों को एक्ज़िमा या तेज़ खुजली थी। काटते या घिसते समय दस्ताने और धूल वाला मास्क पहनें, और अगर कोई पौधे का हिस्सा निगल ले और तबीयत ख़राब लगे तो डॉक्टर या पशु-चिकित्सक को दिखाएँ।
स्रोत: Kew World Checklist of Vascular Plants via GBIF: Tectona grandis L.f. (accepted; native distribution Assam, Bangladesh, Cambodia, India, Laos, Myanmar, Thailand, Vietnam; introduced in Sri Lanka, Java, Andaman Is. and others); ICRAF Agroforestree Database 4.0: Orwa C. et al. (2009). Tectona grandis; APFORGEN Priority Species Information Sheet: Tectona grandis, prepared by K.M. Bhat and E.P. Indira, Kerala Forest Research Institute (KFRI); Bharat Singh (1962). Degraded Teak Forests of Rajasthan and their Rehabilitation. Indian Forester 88(4):285-288; Rajasthan geography study material (secondary): Forests and Natural Vegetation of Rajasthan, dry deciduous teak forests in Udaipur, Dungarpur, Banswara, Jhalawar, Baran, Pratapgarh, Chittorgarh; Kerala Agricultural University, Centre for e-Learning: Teak planting (stumps April-May, containers June-July, pit 30 cm, 2 x 2 m, boundary 1 m); Flowers of India: Teak (Tectona grandis); Flowers of India: Gamhar (Gmelina arborea); Krogh H.K. (1962). Contact eczema caused by true teak (Tectona grandis). British Journal of Industrial Medicine 19(1):42 (now Occupational and Environmental Medicine); MoEF&CC (18 Nov 2014). Guidelines for felling and transit regulations for tree species grown on non-forest/private lands
यह लेख AI की सहायता से तैयार किया गया है और GreenEye टीम ने इसे हर भाग में दिए गए स्रोतों से जाँचा है।
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