सागवान (Tectona grandis): भारत में कहाँ उगता है और इसे कैसे लगाएं
Tectona grandis
सागवान या सागौन (टीक) का वैज्ञानिक नाम Tectona grandis है। यह भारत का सबसे मशहूर इमारती लकड़ी वाला पेड़ है, जो प्रायद्वीप और मध्य भारत के जंगलों का मूल पेड़ है और दक्षिणी राजस्थान तक पहुँचता है। जानिए इसे कैसे और कब लगाएं, कैसे पहचानें, यह कितनी तेज़ी से बढ़ता है, पहले तीन साल की देखभाल, और किन बातों का ध्यान रखें।
सागवान कैसे लगाएं
सागवान को बारिश की शुरुआत में, पूरी धूप में, गहरी और अच्छे निकास वाली मिट्टी में लगाएँ, और पहले कुछ साल इसे मवेशियों और आग से बचाएँ। इसे बहुत रोशनी चाहिए: ICRAF के अनुसार यह पूरी धूप के 75–100% में सबसे अच्छा बढ़ता है, इसलिए इसे दूसरे पेड़ों के नीचे न लगाएँ।
कब लगाएँ
नीचे दिए गए महीने केवल एक मार्गदर्शन हैं; जब आपके ज़िले में बारिश से मिट्टी अच्छी तरह गीली हो जाए, तब लगाएँ।
- मध्य भारत, दक्कन, दक्षिणी राजस्थान और उत्तरी मैदान: जुलाई या अगस्त, मानसून के साथ।
- केरल और पश्चिमी तट: केरल कृषि विश्वविद्यालय (KAU) स्टंप को मानसून से पहले की बौछारों के साथ अप्रैल–मई में, मानसून से चार से छह हफ़्ते पहले, और पॉलीबैग या रूट-ट्रेनर वाले पौधों को दक्षिण-पश्चिम मानसून आने के बाद जून–जुलाई में लगाने की सलाह देता है।
- तमिलनाडु और दक्षिण: TNAU के वानिकी पोर्टल के अनुसार मानसून से पहले लगाने में सफलता ज़्यादा होती है; दक्षिण के बाक़ी हिस्सों में पहली अच्छी बारिश के साथ जून–जुलाई हमारा मार्गदर्शन है।
- पूर्वी भारत और पूर्वोत्तर: जून या जुलाई, जब बारिश जम जाए (हमारा मार्गदर्शन)।
बारिश से पहले के गर्म, सूखे महीनों में तभी लगाएँ जब पानी दे सकें, और उत्तर भारत में इतनी देर से न लगाएँ कि जड़ जमने से पहले ही ठंडी रातें आ जाएँ (व्यावहारिक सलाह)।
पौधा या स्टंप कैसा लें
वनकर्मी ज़्यादातर स्टंप लगाते हैं: नर्सरी का एक साल का पौधा, जिसका तना छोटा और मूसला जड़ सीधी काट दी जाती है। Vikaspedia के अनुसार स्टंप में 4–6 सेमी तना और 15–20 सेमी जड़ होती है, KAU 2–3 सेमी तना और 15–20 सेमी जड़ बताता है, और TNAU पोर्टल 22–23 सेमी मूसला जड़ बताता है; इन सबको मोटा मार्गदर्शन मानें। स्टंप सब्बल (लोहे की छड़) से बने छेद में लगाया जाता है। बगीचे या स्कूल के मैदान में एक पेड़ के लिए वन विभाग या भरोसेमंद नर्सरी से पॉलीबैग या रूट-ट्रेनर वाला पौधा लेना आसान है, क्योंकि उसकी जड़ों के चारों ओर मिट्टी बनी रहती है।
गड्ढा, दूरी और सुरक्षा
- गड्ढा: पॉलीबैग वाले पौधे के लिए Vikaspedia 45 × 45 × 45 सेमी और KAU 30 × 30 × 30 सेमी के गड्ढे बताते हैं; हर तरफ़ 45 सेमी को हमारा मोटा अनुमान मानें। निकली हुई मिट्टी में अच्छी सड़ी गोबर की खाद मिलाकर भरें, पौधे को उतनी ही गहराई पर लगाएँ जितना वह थैली में था, और उथला थावला बनाएँ, पर तने के पास पानी खड़ा न होने दें।
- बाग़ान में दूरी: ICRAF और KAU ब्लॉक बाग़ान के लिए 2 × 2 मीटर बताते हैं, और Vikaspedia 2 × 2, 3 × 3 या 3 × 4 मीटर; बाद में इनमें से कुछ पेड़ छाँटकर हटा दिए जाते हैं। खेत की मेड़ पर KAU एक कतार में लगभग 1 मीटर की दूरी पर लगाकर बाद में छँटाई की सलाह देता है।
- अकेला पेड़: चारों ओर लगभग 6 मीटर खुली जगह हमारा मोटा शुरुआती अनुमान है। ICRAF के अनुसार सागवान की जड़ें उथली होती हैं, अक्सर सतह से लगभग 50 सेमी के भीतर, पर बगल में लगभग 15 मीटर तक फैल सकती हैं। यह केवल एक मोटा शुरुआती अनुमान है, घर, दीवार, पाइप, सेप्टिक टैंक या बिजली की लाइन से सुरक्षित दूरी नहीं; जगह कम हो तो अपने स्थानीय वन या उद्यान विभाग के दफ़्तर से पूछें।
- ट्री-गार्ड और आग: ICRAF के अनुसार बाग़ानों को चरने वाले पशुओं और आग से बचाना ज़रूरी है। मज़बूत ट्री-गार्ड लगाएँ और गर्मी से पहले पौधे के आसपास की सूखी घास साफ़ कर दें (व्यावहारिक सलाह)।
पहले साल पानी (मोटा शुरुआती अनुमान)
कैलेंडर देखकर नहीं, मिट्टी देखकर पानी दें। जड़ों के पास मिट्टी को कुछ सेंटीमीटर नीचे तक जाँचें, जब जड़ वाला हिस्सा सूखने लगे तब गहरा पानी दें, बारिश के बाद पानी न दें, और तने के पास कभी पानी खड़ा न होने दें। नीचे दिए अंतर केवल एक मोटा शुरुआती अनुमान हैं, किसी प्रयोग के नतीजे नहीं; बलुई मिट्टी भारी मिट्टी से जल्दी सूखती है।
- मानसून: आमतौर पर पानी की ज़रूरत नहीं; केवल लंबे सूखे अंतराल में।
- मानसून के बाद और सर्दी में: मिट्टी सूखी हो तो लगभग हर 2–3 हफ़्ते।
- गर्म, सूखे महीने: लगभग हफ़्ते में एक बार, लू में ज़्यादा बार, और मिट्टी में नमी हो तो कम।
स्रोत: ICRAF Agroforestree Database 4.0: Orwa C. et al. (2009). Tectona grandis; TNAU Agritech Portal (Forestry): Teak (Tectona grandis); Vikaspedia (Govt of India): Teak, tree crops (stump size, pit 45 x 45 x 45 cm, spacing 2x2 / 3x3 / 3x4 m; page is JavaScript-rendered, figures read from search extracts); Kerala Agricultural University, Centre for e-Learning: Teak planting (stumps April-May, containers June-July, pit 30 cm, 2 x 2 m, boundary 1 m); Kerala Agricultural University, Centre for e-Learning: Teak nursery practices (stumps from 1-year seedlings, 15-20 cm root, 2-3 cm stem)
यह लेख AI की सहायता से तैयार किया गया है और GreenEye टीम ने इसे हर भाग में दिए गए स्रोतों से जाँचा है।
ऐसा पेड़ लगाएं जिसे आप ट्रैक कर सकें
GreenEye की ज़मीन पर एक पेड़ लगाएं और उसे बढ़ते हुए ट्रैक करें।
यह लेख शेयर करें