सागवान (Tectona grandis): भारत में कहाँ उगता है और इसे कैसे लगाएं
Tectona grandis
सागवान या सागौन (टीक) का वैज्ञानिक नाम Tectona grandis है। यह भारत का सबसे मशहूर इमारती लकड़ी वाला पेड़ है, जो प्रायद्वीप और मध्य भारत के जंगलों का मूल पेड़ है और दक्षिणी राजस्थान तक पहुँचता है। जानिए इसे कैसे और कब लगाएं, कैसे पहचानें, यह कितनी तेज़ी से बढ़ता है, पहले तीन साल की देखभाल, और किन बातों का ध्यान रखें।
सांस्कृतिक महत्व
भारत के वन-इतिहास में सागवान की लंबी जगह है। वंश का नाम Tectona, tekka से आया है, जो इस पेड़ का पुराना मालाबारी नाम है (ICRAF), और अंग्रेज़ी शब्द टीक भी लगभग वैसा ही सुनाई देता है। केरल पर्यटन विभाग नीलांबूर (केरल) के कॉनोली प्लॉट को दुनिया का सबसे पुराना सागवान बाग़ान बताता है, जिसे 1846 में मालाबार के तत्कालीन कलेक्टर एच.वी. कॉनोली के निर्देशन में, चातु मेनन के विचार पर लगाया गया था। ICRAF इसकी लकड़ी के पुराने मुख्य उपयोगों में जहाज़ के डेक, नाव बनाना और रेल के स्लीपर गिनाता है।
स्रोत: ICRAF Agroforestree Database 4.0: Orwa C. et al. (2009). Tectona grandis; Kerala Tourism (Govt of Kerala): Conolly's Plot, Nilambur, oldest teak plantation
यह लेख AI की सहायता से तैयार किया गया है और GreenEye टीम ने इसे हर भाग में दिए गए स्रोतों से जाँचा है।
ऐसा पेड़ लगाएं जिसे आप ट्रैक कर सकें
GreenEye की ज़मीन पर एक पेड़ लगाएं और उसे बढ़ते हुए ट्रैक करें।
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