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पौधादेशी पेड़फूलदार पौधे

रोहिड़ा (Tecomella undulata): राजस्थान का राज्य पुष्प और जयपुर में इसे कैसे उगाएँ

Tecomella undulata

रोहिड़ा राजस्थान का राज्य पुष्प है और थार की मुख्य देसी लकड़ी देता है, पर अब यह संकटग्रस्त है। जानिए जयपुर में इसे कब लगाएँ, पहले तीन साल पानी और सुरक्षा कैसे दें, यह पक्षियों और मिट्टी के लिए क्या करता है, और किन बातों का ध्यान रखें।

जयपुर में रोहिड़ा क्यों लगाएँ

रोहिड़ा उस सूखी पट्टी का पेड़ है जो ओमान और दक्षिणी ईरान से पाकिस्तान होते हुए उत्तर-पश्चिमी भारत तक जाती है। भारत में ज़्यादातर जंगली पेड़ पश्चिमी राजस्थान में हैं, बाड़मेर और जैसलमेर से लेकर चूरू और सीकर तक, और जयपुर के आसपास भी यह दर्ज किया गया है।

अपने मूल इलाक़े में यह साल भर में केवल 150–500 मिमी बारिश में जी लेता है, सर्दी की रातों में 0 से −2 °C और गर्मी के दिनों में 48–50 °C तक झेल लेता है। इसे ऐसी रेतीली दोमट या दोमट मिट्टी पसंद है जिससे पानी जल्दी निकल जाए, और यह जमे हुए पुराने रेत के टीलों पर भी अच्छी तरह उगता है।

जयपुर इसके लिए काफ़ी हद तक ठीक है। यहाँ गर्मियों में पारा अक्सर 45 °C के पार जाता है, अब तक का सबसे कम तापमान −2.2 °C रहा है, और शहर के बाहरी इलाक़ों की रेतीली मिट्टी रोहिड़ा की जंगली ज़मीन जैसी ही है। असली फ़र्क़ बारिश का है: सामान्य साल में लगभग 600–630 मिमी, जो इस पेड़ की आदत से ज़्यादा है। रेतीली या ढलान वाली ज़मीन पर दिक्कत नहीं, पर ऐसे निचले कोनों में न लगाएँ जहाँ मानसून का पानी कई दिन भरा रहता है।

इसे लगाने की एक बड़ी वजह और है। IUCN ने रोहिड़ा को संकटग्रस्त (Endangered) माना है। लकड़ी के लिए पेड़ जितनी तेज़ी से कटे, उतनी तेज़ी से नए नहीं उग पाए। छोटे पौधों को पशु चर जाते हैं, और बीज ठीक मानसून की शुरुआत में पकता है, इसलिए उसका बड़ा हिस्सा उगने से पहले ही सड़ जाता है।

यह लेख AI की सहायता से तैयार किया गया है। महत्वपूर्ण जानकारी की पुष्टि हर भाग में दिए गए स्रोतों से करें।

ऐसा पेड़ लगाएं जिसे आप ट्रैक कर सकें

GreenEye की ज़मीन पर एक पेड़ लगाएं और उसे बढ़ते हुए ट्रैक करें।

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