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रोहिड़ा (Tecomella undulata): राजस्थान का राज्य पुष्प और जयपुर में इसे कैसे उगाएँ

Tecomella undulata (Sm.) Seem.

रोहिड़ा राजस्थान का राज्य पुष्प है और थार की मुख्य देसी लकड़ी देता है, पर अब यह संकटग्रस्त है। जानिए जयपुर में इसे कब लगाएँ, पहले तीन साल पानी और सुरक्षा कैसे दें, यह पक्षियों और मिट्टी के लिए क्या करता है, और किन बातों का ध्यान रखें।

रोहिड़ा (Tecomella undulata): राजस्थान का राज्य पुष्प और जयपुर में इसे कैसे उगाएँ

रोहिड़ा (Tecomella undulata) वही पेड़ है जिसका फूल राजस्थान का राज्य पुष्प है। साल के ज़्यादातर महीनों में इस पर किसी की नज़र नहीं जाती: धूसर-हरी पत्तियाँ, नीचे की ओर झुकी डालियाँ और लहरदार किनारों वाली पतली पत्तियाँ। फिर वसंत आते ही यह पीले, नारंगी या गहरे लाल रंग के तुरही जैसे फूलों के गुच्छों से भर जाता है और बुलबुलें इसके आसपास मँडराने लगती हैं। थार के देसी पेड़ों में इसकी लकड़ी बहुत क़ीमती मानी जाती है, और यही कारण है कि जंगल में रोहिड़ा अब कम बचा है।

फ़ोटो: "Tecomella undulata tree in Alamarvdasht, Fars, Iran", हादी करीमी (Hadi Karimi), CC BY 3.0, विकिमीडिया कॉमन्स के माध्यम से

एक नज़र में

वैज्ञानिक नामTecomella undulata (Sm.) Seem.
कुल (फ़ैमिली)बिग्नोनिएसी (Bignoniaceae, जकरंडा कुल)
हिंदी नामरोहिड़ा; रोहेड़ा भी कहते हैं
अन्य नामडेज़र्ट टीक, मारवाड़ टीक, हनी ट्री, रोहितक (आयुर्वेद)
ऊँचाईआमतौर पर 4–10 मीटर; जंगल में लगभग 8 मीटर
बढ़ने की गतिधीमी
फूलवसंत में, लगभग फ़रवरी से अप्रैल; पीले, नारंगी या लाल
पानी की ज़रूरतजड़ जमने के बाद कम
जयपुर में लगाने का सबसे अच्छा समयजुलाई–अगस्त (मानसून)
जयपुर के लिए उपयुक्तताअच्छी, बशर्ते ज़मीन से पानी जल्दी निकल जाए
संरक्षण स्थितिसंकटग्रस्त (Endangered, IUCN रेड लिस्ट, 2021)

जयपुर में रोहिड़ा क्यों लगाएँ

रोहिड़ा उस सूखी पट्टी का पेड़ है जो ओमान और दक्षिणी ईरान से पाकिस्तान होते हुए उत्तर-पश्चिमी भारत तक जाती है। भारत में ज़्यादातर जंगली पेड़ पश्चिमी राजस्थान में हैं, बाड़मेर और जैसलमेर से लेकर चूरू और सीकर तक, और जयपुर के आसपास भी यह दर्ज किया गया है।

अपने मूल इलाक़े में यह साल भर में केवल 150–500 मिमी बारिश में जी लेता है, सर्दी की रातों में 0 से −2 °C और गर्मी के दिनों में 48–50 °C तक झेल लेता है। इसे ऐसी रेतीली दोमट या दोमट मिट्टी पसंद है जिससे पानी जल्दी निकल जाए, और यह जमे हुए पुराने रेत के टीलों पर भी अच्छी तरह उगता है।

जयपुर इसके लिए काफ़ी हद तक ठीक है। यहाँ गर्मियों में पारा अक्सर 45 °C के पार जाता है, अब तक का सबसे कम तापमान −2.2 °C रहा है, और शहर के बाहरी इलाक़ों की रेतीली मिट्टी रोहिड़ा की जंगली ज़मीन जैसी ही है। असली फ़र्क़ बारिश का है: सामान्य साल में लगभग 600–630 मिमी, जो इस पेड़ की आदत से ज़्यादा है। रेतीली या ढलान वाली ज़मीन पर दिक्कत नहीं, पर ऐसे निचले कोनों में न लगाएँ जहाँ मानसून का पानी कई दिन भरा रहता है।

इसे लगाने की एक बड़ी वजह और है। IUCN ने रोहिड़ा को संकटग्रस्त (Endangered) माना है। लकड़ी के लिए पेड़ जितनी तेज़ी से कटे, उतनी तेज़ी से नए नहीं उग पाए। छोटे पौधों को पशु चर जाते हैं, और बीज ठीक मानसून की शुरुआत में पकता है, इसलिए उसका बड़ा हिस्सा उगने से पहले ही सड़ जाता है।

रोहिड़ा कैसे लगाएँ

कब लगाएँ

जुलाई या अगस्त में लगाएँ, जब मानसून की बारिश से ज़मीन अच्छी तरह भीग चुकी हो; इस पेड़ की खेती के प्रकाशित मार्गदर्शन में भी यही महीने बताए गए हैं। अक्टूबर से फ़रवरी तक न लगाएँ, क्योंकि तब नया पौधा जड़ जमाने से पहले ही ठंडी रातें झेलेगा। अप्रैल से जून में भी न लगाएँ।

पौधा कैसा चुनें

नर्सरी से पॉलीबैग में तैयार लगभग एक साल का पौधा लें, और उसे वैज्ञानिक नाम से माँगें। कई नर्सरियाँ "टेकोमा" या येलो बेल्स (Tecoma stans) बेचती हैं, जो अलग पौधा है: चमकीले पीले घंटी जैसे फूलों वाली झाड़ी, जिस पर गर्मियों की शुरुआत से देर शरद तक फूल आते हैं। रोहिड़ा तने की कलम से मुश्किल से जड़ पकड़ता है, इसलिए सही नर्सरी के पौधे बीज से ही तैयार होते हैं।

कुछ वनकर्मी पौधे की जगह "स्टंप" लगाते हैं: पेंसिल जितना मोटा, एक साल का पौधा, जिसका केवल 2–5 सेमी तना और 15–20 सेमी मूसला जड़ रखी जाती है। केशवाना (जालोर) के कृषि अनुसंधान केंद्र में दो साल के परीक्षण में स्टंप और सामान्य पौधे सभी बचे, और सबसे मोटे स्टंप लगभग 44% ज़्यादा ऊँचे हुए, तने भी ज़्यादा सीधे रहे।

गड्ढा, दूरी और सुरक्षा

  • गड्ढा: 60 × 60 × 60 सेमी। निकली हुई मिट्टी में अच्छी सड़ी गोबर की खाद मिलाकर भरें। पौधा उतनी ही गहराई पर लगाएँ जितना थैली में था, और बारिश का पानी रोकने के लिए थावला बनाएँ। जहाँ दीमक ज़्यादा हो, वहाँ मुट्ठी भर नीम की खली डाल दें (व्यावहारिक सलाह)।
  • दूरी: समूह में लगाने पर लगभग 3 × 4 मीटर। अकेले पेड़ को पूरा फैलने देना हो तो चारों ओर 5–6 मीटर जगह छोड़ें (व्यावहारिक सलाह)।
  • ट्री-गार्ड: इसे छोड़ें नहीं। बकरी, गाय और भेड़ छोटे रोहिड़ा को चर जाती हैं, और बार-बार चरा गया पौधा पेड़ बनने की बजाय नीची झाड़ी बनकर रह जाता है। जयपुर के बाहरी इलाक़ों में नीलगाय का ख़तरा भी है।

पहले साल पानी (व्यावहारिक सलाह)

मौसमकितनी बारहर बार कितना
मानसून (जुलाई–सितंबर)केवल 10 दिन सूखा रहने पर10 लीटर
मानसून के बाद और सर्दी (अक्टूबर–फ़रवरी)हर 15–20 दिन10 लीटर
वसंत (मार्च–अप्रैल)हर 10 दिन15 लीटर
गर्मी (मई–जून)हर 5–7 दिन15–20 लीटर

पानी सुबह जल्दी या शाम को दें, और तने के पास पानी कभी खड़ा न रहने दें।

पहले तीन साल की देखभाल

पानी. हर साल पानी घटाते जाएँ। प्रकाशित मार्गदर्शन के अनुसार जमे हुए पौधों को सर्दी में हर 30–40 दिन और गर्मी में हर 20–30 दिन पानी काफ़ी है; दूसरे साल यही लक्ष्य रखें। तीसरे साल केवल लंबे सूखे या बहुत गर्म मई में पानी दें।

पाला. बड़ा पेड़ हल्का पाला झेल लेता है, पर पहली सर्दी में पौधा छोटा और खुला होता है। जिस रात मौसम विभाग (IMD) शीतलहर या पाले की चेतावनी दे, पौधे को जूट या फूस की टोपी से ढीला ढक दें और सुबह हटा दें।

सर्दी में पत्ते झड़ना. नवंबर से मार्च तक रोहिड़ा कुछ पत्ते गिराता है, और फ़रवरी के बीच से नए पत्ते आने लगते हैं। जनवरी में पेड़ कुछ खाली-सा दिखे तो चिंता की बात नहीं।

निराई और मल्चिंग. पहले दो मानसून में थावले की निराई करें, फिर सूखी घास की परत बिछाएँ, तने से एक हथेली दूर।

छँटाई. रोहिड़ा जल्दी और नीचे से ही शाखाएँ निकाल लेता है, इसलिए बहुत से पुराने पेड़ छोटे और टेढ़े होते हैं। दूसरे साल से सबसे नीचे की बगल की टहनियाँ थोड़ी-थोड़ी करके हटाएँ, ताकि एक सीधा तना बने। तेज़ कैंची से साफ़ कट लगाएँ, क्योंकि पुराने पेड़ों में कैंकर फफूँद, छेदक कीड़े और तने का सड़ना जानी-मानी समस्याएँ हैं।

कीट. छोटे पौधों के लिए दीमक और तना छेदक सबसे बड़ी समस्या हैं। हर कुछ हफ़्तों में तने का निचला हिस्सा देखते रहें।

धीरज. जालोर के परीक्षण में बीज वाले पौधे दो साल बाद भी एक मीटर से छोटे थे। रोहिड़ा जल्दी छाया के लिए नहीं, अगली पीढ़ी के लिए लगाएँ।

फ़ायदे

फूल और पक्षी. नली जैसे फूल 5–7 सेमी लंबे और रस से भरे होते हैं। राजस्थान बायोडायवर्सिटी नेटवर्क के अवलोकन के अनुसार लाल-पुच्छ बुलबुल फूल में सिर डालकर रस पीती है और परागण करती है, जबकि शक्करखोरा (पर्पल सनबर्ड) अक्सर फूल के निचले हिस्से में छेद करके रस चुरा लेता है। इसका पुराना नाम "हनी ट्री" इसीलिए ठीक बैठता है।

आसरा. रोहिड़ा पक्षियों और दूसरे रेगिस्तानी जीवों का घर माना जाता है, और गर्मियों में इसकी छाँव में गाय, बकरी और भेड़ आराम करती हैं।

मिट्टी को थामना. ऊपरी परत में जाल की तरह फैली बगल की जड़ें ढीली मिट्टी को बाँधे रखती हैं, और इसे हवा रोकने (विंडब्रेक) व खिसकते रेत के टीलों को थामने के लिए लगाया जाता है।

चारा. गाय और बकरी इसकी पत्तियाँ खाती हैं, और ऊँट, बकरी व भेड़ इसके फूल और फलियाँ।

लकड़ी. इसकी लकड़ी मज़बूत, सख़्त और टिकाऊ होती है और उस पर बढ़िया चमक आती है, इसीलिए इसे मारवाड़ टीक कहा गया। फ़र्नीचर, नक़्क़ाशी और खेती के औज़ारों में इसका लंबे समय से उपयोग होता रहा है। अगर आप रोहिड़ा लगाएँ तो उसे खड़ा रहने दें: जंगली रोहिड़ा जितना कटा है, उतना फिर से उग नहीं पाया।

पारंपरिक उपयोग. इसकी छाल, जिसे आयुर्वेद में रोहितक कहते हैं, पारंपरिक और लोक-चिकित्सा में लंबे समय से इस्तेमाल होती रही है, और भारतीय आयुर्वेदिक फ़ार्माकोपिया में इस पौधे पर एक मोनोग्राफ़ भी है। यह केवल पारंपरिक उपयोग की जानकारी है, चिकित्सा सलाह नहीं।

सांस्कृतिक महत्व

रोहिड़ा राजस्थान का राज्य पुष्प है। मारवाड़ और शेखावाटी में यह उन गिने-चुने पेड़ों में से है जो वसंत में सूखी धरती को चटख रंग देते हैं, और इसकी लकड़ी इतनी क़ीमती मानी गई कि उसकी तुलना सागौन से हुई। इसकी घटती संख्या पर वनविभाग बरसों से चिंतित है: 2000 के दशक की शुरुआत में राजस्थान वन विभाग के अनुरोध पर जोधपुर के शुष्क वन अनुसंधान संस्थान (AFRI) ने 65 बेहतरीन पेड़ चुने और उनके बीज इकट्ठे किए, ताकि अच्छे पौधे तैयार हो सकें।

सावधानियाँ और सुरक्षा

  • यह संकटग्रस्त है. पौधे वन विभाग या किसी भरोसेमंद नर्सरी से ही लें। जंगल से छोटे पौधे कभी न उखाड़ें।
  • विषाक्तता पर कम जानकारी. पशु इसकी पत्तियाँ, फूल और फलियाँ खाते हैं, पर इंसानों, बिल्लियों या कुत्तों पर असर के बारे में बहुत कम आँकड़े हैं। 2025 की एक समीक्षा ने शुरुआती अध्ययनों के आधार पर इसे काफ़ी हद तक सुरक्षित बताया, साथ ही और शोध की ज़रूरत बताई। इसका कोई हिस्सा न खाएँ, और छाल से बनी चीज़ें बच्चों या पशुओं को न दें।
  • गीली ज़मीन से बचाएँ. रोहिड़ा सूखे इलाक़े का पेड़ है। निचली जगहों, रोज़ स्प्रिंकलर से सींचे जाने वाले लॉन और रिसती टंकियों के पास इसे न लगाएँ।
  • नाम जाँच लें. येलो बेल्स (Tecoma stans) अक्सर मिलते-जुलते नामों से बिकता है। नर्सरी से Tecomella undulata ही माँगें।
  • धीमे, छोटे पेड़ के हिसाब से जगह चुनें. यह खेत की मेड़, स्कूल के मैदान और बड़े घरेलू बग़ीचों के लिए ठीक है।

GreenEye के साथ किसी के नाम पर एक पेड़ लगाइए: पेड़ उपहार में दें

रोपण कैलेंडर

  • उत्तर-पश्चिमी शुष्क क्षेत्र · मानसून · जुल॰, अग॰

रोपण के तरीके

पौध (नर्सरी का पौधा)मुख्य तरीका

दूरी: 3 x 4 m in block plantings; 5-6 m clear for a single tree · गहराई: Pit 60x60x60 cm; plant at nursery soil level

बीज

दूरी: Nursery beds or polybags · गहराई: Sow fresh seed in May; seed viability is short

कलम (कटिंग)

दूरी: As sapling · गहराई: Root-shoot stump from a 1-year seedling of pencil thickness: 2-5 cm shoot, 15-20 cm taproot

लाभ

  • सजावटी: हर वसंत में पीले, नारंगी या लाल रंग के 5-7 सेमी लंबे, नली जैसे सुंदर फूलों के गुच्छे।
  • परागणकर्ता: रस से भरे फूल: लाल-पुच्छ बुलबुल इनका रस पीती है और परागण करती है; शक्करखोरा भी आता है। इसीलिए इसे 'हनी ट्री' कहते हैं।
  • जैव विविधता: पक्षियों का घर और दूसरे रेगिस्तानी जीवों का आसरा माना जाता है।
  • छाया और ठंडक: इसकी छाँव में गर्मियों में गाय, बकरी और भेड़ आराम करती हैं।
  • मिट्टी का स्वास्थ्य: ज़मीन की ऊपरी परत में फैली बगल की जड़ें ढीली मिट्टी को बाँधे रखती हैं।
  • अन्य: हवा रोकने (विंडब्रेक) और खिसकते रेत के टीलों को थामने के लिए लगाया जाता है।
  • चारा: गाय और बकरी पत्तियाँ खाती हैं; ऊँट, बकरी और भेड़ फूल और फलियाँ खाते हैं।
  • इमारती लकड़ी: मज़बूत, सख़्त और टिकाऊ लकड़ी जिस पर बढ़िया चमक आती है ('मारवाड़ टीक'); फ़र्नीचर, नक़्क़ाशी और खेती के औज़ारों में उपयोग। ज़्यादा कटाई ही इसके संकटग्रस्त होने की बड़ी वजह है।
  • औषधीय: छाल (रोहितक) आयुर्वेद और लोक-चिकित्सा में इस्तेमाल होती है और भारतीय आयुर्वेदिक फ़ार्माकोपिया में इस पर मोनोग्राफ़ है। यह केवल पारंपरिक उपयोग है, चिकित्सा सलाह नहीं।
  • सांस्कृतिक: राजस्थान का राज्य पुष्प, और वह पेड़ जो मारवाड़ और शेखावाटी में वसंत का रंग लाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या रोहिड़ा जयपुर में उगेगा?

हाँ, अगर ज़मीन से पानी जल्दी निकल जाता हो। यह पश्चिमी राजस्थान का रेगिस्तानी पेड़ है और जयपुर के आसपास भी दर्ज किया गया है। ऐसी निचली जगह पर न लगाएँ जहाँ बारिश का पानी भरा रहे।

रोहिड़ा पर फूल कब आते हैं?

वसंत में, लगभग फ़रवरी से अप्रैल। पेड़ के हिसाब से फूल पीले, नारंगी या लाल होते हैं। छोटा पौधा कितने साल में पहली बार फूल देता है, इसकी पक्की जानकारी उपलब्ध नहीं है।

सर्दी में मेरा रोहिड़ा खाली-सा क्यों दिखता है?

रोहिड़ा नवंबर से मार्च के बीच कुछ पत्ते गिराता है, और फ़रवरी के बीच से नए पत्ते आने लगते हैं। यह सामान्य है।

रोहिड़ा संकटग्रस्त क्यों है?

क़ीमती लकड़ी के लिए यह जितनी तेज़ी से कटा, उतनी तेज़ी से फिर नहीं उग पाया। छोटे पौधों को पशु चर जाते हैं, मानसून की शुरुआत में पकने के कारण बीज अक्सर सड़ जाता है, और पेड़ धीरे बढ़ता है। IUCN ने इसे संकटग्रस्त माना है।

क्या रोहिड़ा की छाल को दवा की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं?

आयुर्वेद में छाल का पारंपरिक उपयोग पुराना है, पर कोई भी नुस्ख़ा अपनाने से पहले योग्य चिकित्सक से सलाह लें। जीवित पेड़ों से छाल न उतारें; इससे पहले से संकटग्रस्त प्रजाति को नुकसान होता है।

स्रोत

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  3. https://www.flowersofindia.net/catalog/slides/Roheda.html
  4. https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC12665970/
  5. https://en.vikaspedia.in/viewcontent/agriculture/crop-production/package-of-practices/medicinal-and-aromatic-plants/tecomella-undulata-1?lgn=en
  6. https://sdiopr.s3.ap-south-1.amazonaws.com/2024/Dec/16_Dec_24/2024_JABB_127602/Ms_JABB_127602.pdf
  7. https://www.icfre.org/UserFiles/File/annual_report-English-2007-08/Ch-3.6.pdf
  8. https://rajasthanbiodiversity.org/rohida-flowers-and-the-nectar-robber-sunbird-an-interesting-story-of-pollination/
  9. https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC12240331/
  10. https://www.plantsofrajasthan.com/tecomella-undulata-sm-seem/
  11. https://link.springer.com/article/10.1007/s10722-014-0140-3
  12. https://mausam.imd.gov.in/jaipur/mcdata/extreme_jaipur.pdf
  13. https://mausam.imd.gov.in/jaipur/docs/climate.pdf
  14. https://www.flowersofindia.net/catalog/slides/Yellow%20Bells.html

यह लेख AI की सहायता से तैयार किया गया है। महत्वपूर्ण जानकारी की पुष्टि दिए गए स्रोतों से करें।

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