रोहिड़ा (Tecomella undulata): राजस्थान का राज्य पुष्प और जयपुर में इसे कैसे उगाएँ
Tecomella undulata
रोहिड़ा राजस्थान का राज्य पुष्प है और थार की मुख्य देसी लकड़ी देता है, पर अब यह संकटग्रस्त है। जानिए जयपुर में इसे कब लगाएँ, पहले तीन साल पानी और सुरक्षा कैसे दें, यह पक्षियों और मिट्टी के लिए क्या करता है, और किन बातों का ध्यान रखें।
रोहिड़ा कैसे लगाएँ
कब लगाएँ
जुलाई या अगस्त में लगाएँ, जब मानसून की बारिश से ज़मीन अच्छी तरह भीग चुकी हो; इस पेड़ की खेती के प्रकाशित मार्गदर्शन में भी यही महीने बताए गए हैं। अक्टूबर से फ़रवरी तक न लगाएँ, क्योंकि तब नया पौधा जड़ जमाने से पहले ही ठंडी रातें झेलेगा। अप्रैल से जून में भी न लगाएँ।
पौधा कैसा चुनें
नर्सरी से पॉलीबैग में तैयार लगभग एक साल का पौधा लें, और उसे वैज्ञानिक नाम से माँगें। कई नर्सरियाँ "टेकोमा" या येलो बेल्स (Tecoma stans) बेचती हैं, जो अलग पौधा है: चमकीले पीले घंटी जैसे फूलों वाली झाड़ी, जिस पर गर्मियों की शुरुआत से देर शरद तक फूल आते हैं। रोहिड़ा तने की कलम से मुश्किल से जड़ पकड़ता है, इसलिए सही नर्सरी के पौधे बीज से ही तैयार होते हैं।
कुछ वनकर्मी पौधे की जगह "स्टंप" लगाते हैं: पेंसिल जितना मोटा, एक साल का पौधा, जिसका केवल 2–5 सेमी तना और 15–20 सेमी मूसला जड़ रखी जाती है। केशवाना (जालोर) के कृषि अनुसंधान केंद्र में दो साल के परीक्षण में स्टंप और सामान्य पौधे सभी बचे, और सबसे मोटे स्टंप लगभग 44% ज़्यादा ऊँचे हुए, तने भी ज़्यादा सीधे रहे।
गड्ढा, दूरी और सुरक्षा
- गड्ढा: 60 × 60 × 60 सेमी। निकली हुई मिट्टी में अच्छी सड़ी गोबर की खाद मिलाकर भरें। पौधा उतनी ही गहराई पर लगाएँ जितना थैली में था, और बारिश का पानी रोकने के लिए थावला बनाएँ। जहाँ दीमक ज़्यादा हो, वहाँ मुट्ठी भर नीम की खली डाल दें (व्यावहारिक सलाह)।
- दूरी: समूह में लगाने पर लगभग 3 × 4 मीटर। अकेले पेड़ को पूरा फैलने देना हो तो चारों ओर 5–6 मीटर जगह छोड़ें (व्यावहारिक सलाह)।
- ट्री-गार्ड: इसे छोड़ें नहीं। बकरी, गाय और भेड़ छोटे रोहिड़ा को चर जाती हैं, और बार-बार चरा गया पौधा पेड़ बनने की बजाय नीची झाड़ी बनकर रह जाता है। जयपुर के बाहरी इलाक़ों में नीलगाय का ख़तरा भी है।
पहले साल पानी (व्यावहारिक सलाह)
| मौसम | कितनी बार | हर बार कितना |
|---|---|---|
| मानसून (जुलाई–सितंबर) | केवल 10 दिन सूखा रहने पर | 10 लीटर |
| मानसून के बाद और सर्दी (अक्टूबर–फ़रवरी) | हर 15–20 दिन | 10 लीटर |
| वसंत (मार्च–अप्रैल) | हर 10 दिन | 15 लीटर |
| गर्मी (मई–जून) | हर 5–7 दिन | 15–20 लीटर |
पानी सुबह जल्दी या शाम को दें, और तने के पास पानी कभी खड़ा न रहने दें।
यह लेख AI की सहायता से तैयार किया गया है। महत्वपूर्ण जानकारी की पुष्टि हर भाग में दिए गए स्रोतों से करें।
ऐसा पेड़ लगाएं जिसे आप ट्रैक कर सकें
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