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पौधादेशी पेड़फूलदार पौधे

रोहिड़ा (Tecomella undulata): राजस्थान का राज्य पुष्प और जयपुर में इसे कैसे उगाएँ

Tecomella undulata

रोहिड़ा राजस्थान का राज्य पुष्प है और थार की मुख्य देसी लकड़ी देता है, पर अब यह संकटग्रस्त है। जानिए जयपुर में इसे कब लगाएँ, पहले तीन साल पानी और सुरक्षा कैसे दें, यह पक्षियों और मिट्टी के लिए क्या करता है, और किन बातों का ध्यान रखें।

लाभ

फ़ायदे

फूल और पक्षी. नली जैसे फूल 5–7 सेमी लंबे और रस से भरे होते हैं। राजस्थान बायोडायवर्सिटी नेटवर्क के अवलोकन के अनुसार लाल-पुच्छ बुलबुल फूल में सिर डालकर रस पीती है और परागण करती है, जबकि शक्करखोरा (पर्पल सनबर्ड) अक्सर फूल के निचले हिस्से में छेद करके रस चुरा लेता है। इसका पुराना नाम "हनी ट्री" इसीलिए ठीक बैठता है।

आसरा. रोहिड़ा पक्षियों और दूसरे रेगिस्तानी जीवों का घर माना जाता है, और गर्मियों में इसकी छाँव में गाय, बकरी और भेड़ आराम करती हैं।

मिट्टी को थामना. ऊपरी परत में जाल की तरह फैली बगल की जड़ें ढीली मिट्टी को बाँधे रखती हैं, और इसे हवा रोकने (विंडब्रेक) व खिसकते रेत के टीलों को थामने के लिए लगाया जाता है।

चारा. गाय और बकरी इसकी पत्तियाँ खाती हैं, और ऊँट, बकरी व भेड़ इसके फूल और फलियाँ।

लकड़ी. इसकी लकड़ी मज़बूत, सख़्त और टिकाऊ होती है और उस पर बढ़िया चमक आती है, इसीलिए इसे मारवाड़ टीक कहा गया। फ़र्नीचर, नक़्क़ाशी और खेती के औज़ारों में इसका लंबे समय से उपयोग होता रहा है। अगर आप रोहिड़ा लगाएँ तो उसे खड़ा रहने दें: जंगली रोहिड़ा जितना कटा है, उतना फिर से उग नहीं पाया।

पारंपरिक उपयोग. इसकी छाल, जिसे आयुर्वेद में रोहितक कहते हैं, पारंपरिक और लोक-चिकित्सा में लंबे समय से इस्तेमाल होती रही है, और भारतीय आयुर्वेदिक फ़ार्माकोपिया में इस पौधे पर एक मोनोग्राफ़ भी है। यह केवल पारंपरिक उपयोग की जानकारी है, चिकित्सा सलाह नहीं।

  • सजावटी: हर वसंत में पीले, नारंगी या लाल रंग के 5-7 सेमी लंबे, नली जैसे सुंदर फूलों के गुच्छे।
  • परागणकर्ता: रस से भरे फूल: लाल-पुच्छ बुलबुल इनका रस पीती है और परागण करती है; शक्करखोरा भी आता है। इसीलिए इसे 'हनी ट्री' कहते हैं।
  • जैव विविधता: पक्षियों का घर और दूसरे रेगिस्तानी जीवों का आसरा माना जाता है।
  • छाया और ठंडक: इसकी छाँव में गर्मियों में गाय, बकरी और भेड़ आराम करती हैं।
  • मिट्टी का स्वास्थ्य: ज़मीन की ऊपरी परत में फैली बगल की जड़ें ढीली मिट्टी को बाँधे रखती हैं।
  • अन्य: हवा रोकने (विंडब्रेक) और खिसकते रेत के टीलों को थामने के लिए लगाया जाता है।
  • चारा: गाय और बकरी पत्तियाँ खाती हैं; ऊँट, बकरी और भेड़ फूल और फलियाँ खाते हैं।
  • इमारती लकड़ी: मज़बूत, सख़्त और टिकाऊ लकड़ी जिस पर बढ़िया चमक आती है ('मारवाड़ टीक'); फ़र्नीचर, नक़्क़ाशी और खेती के औज़ारों में उपयोग। ज़्यादा कटाई ही इसके संकटग्रस्त होने की बड़ी वजह है।
  • औषधीय: छाल (रोहितक) आयुर्वेद और लोक-चिकित्सा में इस्तेमाल होती है और भारतीय आयुर्वेदिक फ़ार्माकोपिया में इस पर मोनोग्राफ़ है। यह केवल पारंपरिक उपयोग है, चिकित्सा सलाह नहीं।
  • सांस्कृतिक: राजस्थान का राज्य पुष्प, और वह पेड़ जो मारवाड़ और शेखावाटी में वसंत का रंग लाता है।

यह लेख AI की सहायता से तैयार किया गया है। महत्वपूर्ण जानकारी की पुष्टि हर भाग में दिए गए स्रोतों से करें।

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