रोहिड़ा (Tecomella undulata): भारत में कहाँ उगता है और इसे कैसे लगाएँ
Tecomella undulata
रोहिड़ा भारत के सूखे उत्तर-पश्चिम का संकटग्रस्त रेगिस्तानी पेड़ है, जो वसंत के फूलों के लिए जाना जाता है और थार की मुख्य देसी लकड़ी देता रहा है। जानिए भारत में यह कहाँ उगता है, इसे कब लगाएँ, पहले तीन साल पानी और सुरक्षा कैसे दें, यह पक्षियों और मिट्टी के लिए क्या करता है, और किन बातों का ध्यान रखें।
भारत में रोहिड़ा कहाँ उगता है
रोहिड़ा उस सूखी पट्टी का पेड़ है जो ओमान और दक्षिणी ईरान से पाकिस्तान होते हुए उत्तर-पश्चिमी भारत तक जाती है। भारत में ज़्यादातर जंगली पेड़ पश्चिमी राजस्थान में हैं, बाड़मेर और जैसलमेर से लेकर चूरू और सीकर तक। फ्रंटियर्स इन फ़ार्माकोलॉजी की 2025 की एक समीक्षा पंजाब और हरियाणा को भी इसके प्राकृतिक क्षेत्र में गिनती है और इसे महाराष्ट्र में भी दर्ज करती है।
अपने मूल इलाक़े में यह साल भर में केवल 150–500 मिमी बारिश में जी लेता है, सर्दी की रातों में 0 से −2 °C और गर्मी के दिनों में 48–50 °C तक झेल लेता है। इसे लगभग 6.5–8.0 pH वाली ऐसी रेतीली दोमट या दोमट मिट्टी पसंद है जिससे पानी जल्दी निकल जाए, और यह जमे हुए पुराने रेत के टीलों पर भी अच्छी तरह उगता है।
भारत के अलग-अलग हिस्सों में यह कैसा रहता है:
- अच्छा उगता है: उत्तर-पश्चिम का शुष्क क्षेत्र, जो इसका प्राकृतिक घर है।
- सावधानी के साथ: उत्तरी मैदान, मध्य भारत और दक्षिणी प्रायद्वीप। यहाँ रोहिड़ा की आदत से ज़्यादा बारिश होती है, इसलिए इसे केवल ऊँची, रेतीली या ढलान वाली, जल्दी पानी निकलने वाली ज़मीन पर लगाएँ। दक्षिण में केवल सूखा, वर्षा-छाया वाला भीतरी भाग ही इसकी सामान्य बारिश के करीब है।
- उपयुक्त नहीं: पूर्वी भारत, पूर्वोत्तर, पश्चिमी तट और पूर्वी तट, जहाँ मानसून इसके लिए बहुत भारी और लंबा है, और हिमालय, जहाँ की सर्दी इसकी सहनशक्ति से ज़्यादा ठंडी और गीली है।
जहाँ भी लगाएँ, ऐसे निचले कोनों से दूर रखें जहाँ मानसून का पानी कई दिन भरा रहता है।
इसे लगाने की एक बड़ी वजह और है। IUCN ने रोहिड़ा को संकटग्रस्त (Endangered) माना है। लकड़ी के लिए पेड़ जितनी तेज़ी से कटे, उतनी तेज़ी से नए नहीं उग पाए। छोटे पौधों को पशु चर जाते हैं, और बीज ठीक मानसून की शुरुआत में पकता है, इसलिए उसका बड़ा हिस्सा उगने से पहले ही सड़ जाता है।
स्रोत: IUCN Red List: Plummer J. (2021). Tecomella undulata (Endangered), e.T137731325A169300279; Vats S. et al. (2025). Ethnomedicinal, phytochemical, pharmacological, and conservation studies of an endangered plant: the desert teak (Tecomella undulata). Frontiers in Pharmacology 16:1665446; Ghafouri E. et al. (2025). Tecomella undulata under threat: the impact of climate change on the distribution of a valuable tree species. PLOS ONE 20(7): e0326609; Plants of Rajasthan: Tecomella undulata (Sm.) Seem.; Kalia R.K. et al. (2014). Understanding Tecomella undulata: an endangered pharmaceutically important timber species of hot arid regions. Genetic Resources and Crop Evolution 61:1397-1421
यह लेख AI की सहायता से तैयार किया गया है। महत्वपूर्ण जानकारी की पुष्टि हर भाग में दिए गए स्रोतों से करें।
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