नीम का पेड़ (Azadirachta indica): जयपुर में कैसे लगाएँ और देखभाल करें
Azadirachta indica
नीम राजस्थान की गर्मी, कम बारिश और क्षारीय मिट्टी के लिए सबसे मज़बूत पेड़ों में से एक है। जानिए जयपुर में इसे कब लगाएँ, छोटे पौधों को पाले से कैसे बचाएँ, इसके फ़ायदे और पारंपरिक उपयोग, और नीम का तेल कभी क्यों नहीं निगलना चाहिए।
जयपुर में नीम क्यों लगाएँ
नीम भारतीय उपमहाद्वीप और म्यांमार का देसी पेड़ है और सूखे इलाक़ों में अच्छी तरह पनपता है। जहाँ सालाना बारिश 400 से 1,200 मिमी हो, वहाँ यह अच्छा बढ़ता है। जयपुर में साल भर में लगभग 600–633 मिमी बारिश होती है, जो इस दायरे में आराम से आती है। यह वहाँ भी पनपता है जहाँ दिन का तापमान 50 °C तक पहुँच जाता है, और जयपुर का अब तक का सबसे ऊँचा तापमान 48.5 °C रहा है।
नीम सामान्य से क्षारीय मिट्टी में, लगभग pH 10 तक, और खारी मिट्टी में भी उग जाता है। उथली, पथरीली और रेतीली ज़मीन पर, यहाँ तक कि कंकड़ की सख़्त परत के ऊपर भी, यह ज़्यादातर पेड़ों से बेहतर करता है। इसकी गहरी जड़ें नीचे की परतों से पानी खींचती हैं, इसलिए जड़ जमने के बाद यह सूखा सह लेता है।
इसकी दो कमज़ोरियाँ हैं। जलभराव वाली मिट्टी में नीम जल्दी मर जाता है, और छोटे पौधे पाले (फ्रॉस्ट) से नुकसान उठाते हैं। जयपुर का सबसे कम तापमान −2.2 °C दर्ज हुआ है, और जोधपुर में हुए वानिकी परीक्षणों में नीम पर पाले का नुकसान देखा गया। इसलिए पहली दो सर्दियों में ध्यान रखना ज़रूरी है।
यह लेख AI की सहायता से तैयार किया गया है। महत्वपूर्ण जानकारी की पुष्टि हर भाग में दिए गए स्रोतों से करें।
ऐसा पेड़ लगाएं जिसे आप ट्रैक कर सकें
GreenEye अपनी ज़मीन पर ऐसे ही पेड़ लगाता है। अपने पेड़ को बढ़ते हुए ट्रैक करें।
यह लेख शेयर करें