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नीम का पेड़ (Azadirachta indica): जयपुर में कैसे लगाएँ और देखभाल करें

Azadirachta indica

नीम राजस्थान की गर्मी, कम बारिश और क्षारीय मिट्टी के लिए सबसे मज़बूत पेड़ों में से एक है। जानिए जयपुर में इसे कब लगाएँ, छोटे पौधों को पाले से कैसे बचाएँ, इसके फ़ायदे और पारंपरिक उपयोग, और नीम का तेल कभी क्यों नहीं निगलना चाहिए।

विषाक्तता

सावधानियाँ और सुरक्षा

  • नीम का तेल निगलना ख़तरनाक है। भारत में दर्ज मामलों में नीम का तेल निगलने के बाद बच्चों में दौरे और गंभीर मेटाबॉलिक एसिडोसिस हुए हैं, जिनमें कुछ मामलों में मौत भी हुई। इसे कभी न निगलें, और नीम तेल के उत्पाद बच्चों और पालतू जानवरों की पहुँच से दूर रखें।
  • पाला जयपुर में छोटे पेड़ों के लिए सबसे बड़ा ख़तरा है। पहली दो सर्दियों में पौधों को बचाएँ।
  • जलभराव से नीम मर जाता है। नीची जगहों और रिसती टंकियों के पास न लगाएँ।
  • जड़ें: नीम की मूसला जड़ गहरी जाती है और यह बरगद या पीपल की तुलना में इमारतों को बहुत कम नुकसान पहुँचाता है। फिर भी इमारतों और पाइपों से लगभग 5 मीटर दूर लगाना समझदारी है।
  • अपने-आप उगना: पक्षी बीज फैलाते हैं, इसलिए आसपास नए पौधे निकल सकते हैं। देसी पेड़ होने के कारण भारत में यह चिंता की बात नहीं है।
  • जलीय जीव: नीम का अर्क मछलियों को नुकसान पहुँचा सकता है, इसलिए इसे तालाब या नालियों में न डालें।

ग्रीनआई के साथ किसी के नाम पर नीम लगाइए: पेड़ उपहार में दें

मनुष्य
मध्यम विषैला

प्रभावित भाग: seed oil, seeds

पालतू और अन्य पशु
सत्यापित नहीं — पालतू जानवरों या बच्चों के संपर्क में लाने से पहले जाँच लें

यह लेख AI की सहायता से तैयार किया गया है। महत्वपूर्ण जानकारी की पुष्टि हर भाग में दिए गए स्रोतों से करें।

ऐसा पेड़ लगाएं जिसे आप ट्रैक कर सकें

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