नीम का पेड़ (Azadirachta indica): जयपुर में कैसे लगाएँ और देखभाल करें
Azadirachta indica
नीम राजस्थान की गर्मी, कम बारिश और क्षारीय मिट्टी के लिए सबसे मज़बूत पेड़ों में से एक है। जानिए जयपुर में इसे कब लगाएँ, छोटे पौधों को पाले से कैसे बचाएँ, इसके फ़ायदे और पारंपरिक उपयोग, और नीम का तेल कभी क्यों नहीं निगलना चाहिए।
नीम कैसे लगाएँ
कब लगाएँ
सबसे अच्छा समय जुलाई से मध्य अगस्त है, मानसून की पहली अच्छी बारिश के तुरंत बाद। इससे सूखे मौसम और पहली ठंड से पहले जड़ों को बढ़ने का समय मिल जाता है।
फरवरी से मार्च की शुरुआत में भी लगा सकते हैं, लेकिन तभी जब अप्रैल से जून तक नियमित पानी दे सकें। अक्टूबर से दिसंबर में न लगाएँ, क्योंकि तब पौधे को जड़ जमाने से पहले ही पाला झेलना पड़ेगा।
पौधा कैसा चुनें
नर्सरी में पॉलीबैग में तैयार पौधा लें। सूखे इलाक़ों के लिए TNAU कम से कम 45 सेमी ऊँचा पौधा लगाने की सलाह देता है, क्योंकि छोटे पौधे सूखे का समय मुश्किल से पार कर पाते हैं। व्यवहार में 60–100 सेमी ऊँचा और 9–12 महीने का पौधा अच्छा रहता है।
गड्ढा, दूरी और सुरक्षा
- गड्ढा: कम से कम 60 × 60 × 60 सेमी का गड्ढा खोदें, और नीचे कंकड़ मिले तो 1 मीटर तक गहरा करें। निकली हुई मिट्टी में गोबर की खाद मिलाकर भरें।
- जगह: ऐसी नीची जगह पर कभी न लगाएँ जहाँ पानी भरता हो।
- दूरी: समूह में लगाने पर 5 × 5 मीटर, और बीच में फ़सल या घास हो तो 7 × 7 मीटर। अकेले छायादार पेड़ के लिए चारों ओर 8–10 मीटर जगह छोड़ें।
- थाला: पौधे के चारों ओर 1–1.5 मीटर चौड़ा थाला बनाएँ ताकि बारिश का पानी रुके। शुष्क क्षेत्रों में पेड़ लगाने के लिए काज़री (CAZRI) जोधपुर यही तरीका सुझाता है।
- ट्री गार्ड: बकरी, गाय और नीलगाय से बचाने के लिए गार्ड लगाएँ। चूहे और साही भी कभी-कभी छोटे तने कुतर देते हैं।
पहले साल में पानी (व्यावहारिक सलाह)
मिट्टी की नमी देखकर पानी घटाएँ-बढ़ाएँ, और पानी कभी खड़ा न रहने दें।
| मौसम | कितनी बार | हर बार कितना |
|---|---|---|
| मानसून (जुलाई–सितंबर) | केवल 10 दिन सूखा रहने पर | 10 लीटर |
| मानसून के बाद (अक्टूबर–नवंबर) | हफ़्ते में एक बार | 10–15 लीटर |
| सर्दी (दिसंबर–फरवरी) | हर 2 हफ़्ते, सुबह के समय | 10 लीटर |
| वसंत (मार्च) | हफ़्ते में एक बार | 15 लीटर |
| गर्मी (अप्रैल–जून) | हर 4–5 दिन | 15–20 लीटर |
यह लेख AI की सहायता से तैयार किया गया है। महत्वपूर्ण जानकारी की पुष्टि हर भाग में दिए गए स्रोतों से करें।
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