कदंब का पेड़ (Neolamarckia cadamba): भारत में कहाँ उगता है, देखभाल, फ़ायदे और महत्व
Neolamarckia cadamba
सुनहरे गोल फूलों वाला कदंब, कान्हा का बरसाती पेड़, ज़्यादा बारिश वाले गर्म इलाक़ों से आता है। भारत में यह कहाँ उगता है, सूखे और पाले वाले इलाक़ों में कैसे टिकता है, कब और कैसे लगाएँ, कितना पानी चाहिए, और यह देसी कैम या कलम से कैसे अलग है, सब इस गाइड में।
भारत में कदंब कहाँ उगता है
कदंब भारत के नम जंगलों का देसी पेड़ है: पश्चिमी घाट, असम और पूर्वोत्तर, तराई और उप-हिमालयी पट्टी, पूर्वी भारत और अंडमान द्वीप। इसका बड़ा दायरा नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका से म्यांमार और हिंद-चीन होते हुए दक्षिणी चीन, मलेशिया क्षेत्र और न्यू गिनी तक फैला है।
जलवायु। जंगल में कदंब नदियों किनारे की गहरी, नम मिट्टी में उगता है, आमतौर पर वहाँ जहाँ साल में 1,500 मिमी से ज़्यादा बारिश होती है। इसके प्राकृतिक इलाक़ों में गर्मी का अधिकतम तापमान 32–42 °C और सर्दी का न्यूनतम 3–15.5 °C रहता है। ICRAF के अनुसार कदंब पाला, सूखा, जलभराव और चराई, चारों से नुकसान उठाता है, और कोयंबटूर का ICFRE संस्थान (IFGTB) इसे पाला न सहने वाला पेड़ बताता है। छोटे पौधों को तेज़ धूप से भी बचाना पड़ता है। कुछ बहुत सूखी जगहों पर, जहाँ बारिश सिर्फ़ 200 मिमी होती है, भी कदंब दर्ज हुआ है, पर शायद वहाँ इसकी जड़ें भूजल तक पहुँच जाती हैं।
इलाक़ेवार।
- अच्छी तरह उगता है: पूर्वी भारत, पूर्वोत्तर, मध्य भारत, पश्चिमी तट, पूर्वी तट और दक्षिणी प्रायद्वीप।
- उत्तरी मैदान (देखभाल के साथ): IFGTB कदंब को तराई और बिहार में दर्ज करता है, पर ठंडे, सूखे पश्चिमी मैदानों में पाले की रातों में छोटे पौधों को ढकना पड़ता है।
- हिमालय की निचली पहाड़ियाँ (देखभाल के साथ): IFGTB के अनुसार कदंब लगभग 1,000 मीटर से नीचे ही मिलता है (जैसे दार्जिलिंग की निचली पहाड़ियाँ)।
- उत्तर-पश्चिम का शुष्क क्षेत्र (देखभाल के साथ): यह इलाक़ा कदंब के मूल, भरपूर बारिश वाले इलाक़ों से कहीं ज़्यादा सूखा है, इसलिए इसे वहीं लगाएँ जहाँ पानी दे सकें। ब्रज में 2023 में मथुरा-वृंदावन मार्ग के हर पौधे के साथ ट्री गार्ड लगाया गया था। उस पौधारोपण के, या राजस्थान में कदंब के किसी भी पौधारोपण के, बचे पौधों के आँकड़े हमें कहीं प्रकाशित नहीं मिले।
मिट्टी। कदंब के लिए मिट्टी के pH की कोई भरोसेमंद सीमा प्रकाशित नहीं है। धुली हुई, कम हवादार मिट्टी में यह ठीक नहीं बढ़ता और उपजाऊ, अच्छी निकासी वाली जलोढ़ मिट्टी पसंद करता है, इसलिए रेतीली या क्षारीय ज़मीन में गड्ढा अच्छी तरह तैयार करना होगा। ऐसी जगह कभी न लगाएँ जहाँ पानी रुकता हो।
कुल मिलाकर: जहाँ बारिश भरपूर है, वहाँ कदंब आसानी से पलता है। सूखे या पाले वाले इलाक़ों में इसे वहीं लगाएँ जहाँ कम से कम पहली तीन-चार गर्मियों तक पानी दे सकें: बगीचा, मंदिर या स्कूल का परिसर, या किसी टांके-तालाब का किनारा, जहाँ पश्चिम की ओर से कुछ आड़ हो। सूखी खुली ज़मीन या बिना पानी वाली सड़क के किनारे के लिए यह पेड़ नहीं है।
स्रोत: Orwa C. et al. (2009). Agroforestree Database 4.0: Anthocephalus cadamba. ICRAF; Vijayaraghavan A. (2014). Cultivation techniques for Neolamarckia cadamba. In: Transfer of Tree Cultivation Technologies, ICFRE-IFGTB Coimbatore (hosted by TNAU); Krisnawati H., Kallio M., Kanninen M. (2011). Anthocephalus cadamba Miq.: ecology, silviculture and productivity. CIFOR; PTI via Devdiscourse (2023). 400 kadamb trees planted on Mathura-Vrindavan Road
यह लेख AI की सहायता से तैयार किया गया है। महत्वपूर्ण जानकारी की पुष्टि हर भाग में दिए गए स्रोतों से करें।
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