कदंब का पेड़ (Neolamarckia cadamba): क्या जयपुर में उग सकता है? देखभाल, फ़ायदे और महत्व
Neolamarckia cadamba
सुनहरे गोल फूलों वाला कदंब, कान्हा का बरसाती पेड़, ज़्यादा बारिश वाले गर्म इलाक़ों से आता है। जयपुर की गर्मी और पाले में इसे उगाने की सच्ची गाइड: कब और कैसे लगाएँ, कितना पानी चाहिए, और यह देसी कैम या कलम से कैसे अलग है।
ब्रज, कविता और आस्था में कदंब
भागवत पुराण में कालिय नाग का सामना करने से पहले कान्हा यमुना किनारे "एक बहुत ऊँचे कदंब" पर चढ़कर नदी में कूदते हैं। एक और प्रसंग में वे गोपियों के वस्त्र लेकर कदंब की चोटी पर चढ़ जाते हैं। इन्हीं प्रसंगों के कारण कदंब कान्हा का प्रिय और पवित्र पेड़ माना जाता है और पूरे ब्रज में इससे गहरा लगाव है।
हिंदी कविता में भी कदंब बार-बार आता है। रसखान ने चाहा था कि अगर वे पक्षी बनें तो "कालिंदीकूल कदम्ब की डारन" पर बसेरा करें। सुभद्रा कुमारी चौहान की प्रिय बाल-कविता "यह कदंब का पेड़" की शुरुआत ही एक छोटे बच्चे की इस बात से होती है कि माँ, यह कदंब का पेड़ अगर यमुना किनारे होता, तो वह भी उस पर बैठकर धीरे-धीरे कन्हैया बन जाता।
यह लेख AI की सहायता से तैयार किया गया है। महत्वपूर्ण जानकारी की पुष्टि हर भाग में दिए गए स्रोतों से करें।
ऐसा पेड़ लगाएं जिसे आप ट्रैक कर सकें
GreenEye की ज़मीन पर एक पेड़ लगाएं और उसे बढ़ते हुए ट्रैक करें।
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