कदंब का पेड़ (Neolamarckia cadamba): क्या जयपुर में उग सकता है? देखभाल, फ़ायदे और महत्व
Neolamarckia cadamba
सुनहरे गोल फूलों वाला कदंब, कान्हा का बरसाती पेड़, ज़्यादा बारिश वाले गर्म इलाक़ों से आता है। जयपुर की गर्मी और पाले में इसे उगाने की सच्ची गाइड: कब और कैसे लगाएँ, कितना पानी चाहिए, और यह देसी कैम या कलम से कैसे अलग है।
कदंब कैसे लगाएँ
कब लगाएँ
मध्य जुलाई से मध्य अगस्त के बीच लगाएँ, जब मानसून ठीक से जम जाए, ताकि सूखा मौसम आने से पहले जड़ों को दो नम महीने मिल जाएँ। देर से लगाने पर कच्ची जड़ों वाले पौधे को पहला पाला झेलना पड़ता है। फरवरी से जून के बीच बिल्कुल न लगाएँ।
पौधा कैसा चुनें
वन विभाग की नर्सरियाँ 35–50 सेमी के पौधे लगाती हैं। जयपुर के लिए लगभग 1–1.5 मीटर का मज़बूत पॉलीबैग पौधा ज़्यादा सुरक्षित है। ICRAF और IFGTB दोनों की सलाह है कि पौधे को मिट्टी की पिंडी समेत लगाएँ। लेबल पर Neolamarckia cadamba लिखा है, यह भी देख लें।
गड्ढा, दूरी और सुरक्षा
- गड्ढा: 60 × 60 × 60 सेमी, और नीचे कंकड़ मिले तो 90 सेमी तक गहरा। ऊपर की मिट्टी में सड़ी हुई कम्पोस्ट या गोबर की खाद मिलाकर भरें; मिट्टी भारी हो तो थोड़ी रेत भी मिलाएँ।
- जगह: ऐसी नीची जगह कभी नहीं जहाँ बारिश के बाद पानी भरा रहे। मिट्टी से पानी निकलना चाहिए।
- दूरी: वृक्षारोपण में 5 × 5 मीटर रखी जाती है। अकेले छायादार पेड़ के लिए चारों ओर लगभग 8–10 मीटर खुली जगह छोड़ें, और इमारतों से अच्छी दूरी रखें।
- ट्री गार्ड: बकरी, गाय और नीलगाय से बचाने के लिए गार्ड लगाएँ।
- शेड नेट: पहली गर्मी में अप्रैल से बारिश आने तक दक्षिण और पश्चिम की ओर 35–50% वाली हरी जाली लगाएँ।
यह लेख AI की सहायता से तैयार किया गया है। महत्वपूर्ण जानकारी की पुष्टि हर भाग में दिए गए स्रोतों से करें।
ऐसा पेड़ लगाएं जिसे आप ट्रैक कर सकें
GreenEye की ज़मीन पर एक पेड़ लगाएं और उसे बढ़ते हुए ट्रैक करें।
यह लेख शेयर करें