जामुन का पेड़ (Syzygium cumini): भारत में कहाँ उगता है और कैसे देखभाल करें
Syzygium cumini
जामुन एक देसी भारतीय फलदार पेड़ है जिसे लोग, मधुमक्खियाँ और पक्षी सब पसंद करते हैं। यह भारत के ज़्यादातर हिस्सों में उगता है, पर सूखे इलाक़ों में इसे हर साल गर्मियों में पानी चाहिए। जानिए यह कहाँ अच्छा चलता है, कब लगाएँ, कलमी पौधा क्यों चुनें, छोटे पौधों को पाले से कैसे बचाएँ, और जामुन व डायबिटीज़ पर सबूत असल में क्या कहते हैं।
किस्में
भारत में इस पेड़ की जानी-मानी किस्में और रूप, उनमें क्या अंतर है और वे कहाँ उगती हैं।
जारी की गई किस्म (1)
गोमा प्रियंकाफल: गूदा 85-90%; बीज का वज़न कमकहाँ उगती है: उत्तर-पश्चिमी शुष्क क्षेत्र, उत्तरी मैदान (सिंधु-गंगा), मध्य भारत, दक्षिणी प्रायद्वीप
अर्ध-शुष्क इलाक़ों की बारानी परिस्थितियों के लिए 2010 में CHES गोधरा में विकसित; ICAR के अनुसार गुजरात राज्य किस्म विमोचन उप-समिति ने इसे 2021 में राज्य स्तर पर जारी किया।
- उपज
- दसवें साल से 50-70 किलो प्रति पेड़
- फल
- गूदा 85-90%; बीज का वज़न कम
- पेड़ का आकार
- अपेक्षाकृत छोटा कद; सघन रोपण के लिए उपयुक्त
- अन्य
- भरपूर और हर साल फल देने वाली
स्रोत: Indian Council of Agricultural Research (ICAR), Indian Council of Agricultural Research (ICAR), ICAR-Central Institute for Arid Horticulture, Bikaner
स्थानीय किस्म (1)
राम जामुनफल: बड़ा, लंबोतरा, गहरा बैंगनी से नीला-कालाकहाँ उगती है: उत्तरी मैदान (सिंधु-गंगा)
TNAU के अनुसार जामुन की कोई मानक खेती वाली किस्म नहीं है, और उत्तर भारत की परिस्थितियों में उगाई जाने वाली आम किस्म राम जामुन है।
- फल
- बड़ा, लंबोतरा, गहरा बैंगनी से नीला-काला
- पकने का समय
- जून-जुलाई में पकता है
- अन्य
- रसीला, मीठा गूदा; छोटी गुठली
स्रोत: TNAU Agritech Portal
अन्य (1)
गोमा प्रियंका II
ICAR इसे CHES गोधरा के उसी शोध से निकली जामुन की दूसरी किस्म बताता है; पेज पर और जानकारी नहीं है।
सभी किस्मों की तुलना करें
| किस्म | पेड़ का आकार | फल | उपज | पकने का समय | अन्य |
|---|---|---|---|---|---|
| गोमा प्रियंका | अपेक्षाकृत छोटा कद; सघन रोपण के लिए उपयुक्त | गूदा 85-90%; बीज का वज़न कम | दसवें साल से 50-70 किलो प्रति पेड़ | — | भरपूर और हर साल फल देने वाली |
| राम जामुन | — | बड़ा, लंबोतरा, गहरा बैंगनी से नीला-काला | — | जून-जुलाई में पकता है | रसीला, मीठा गूदा; छोटी गुठली |
स्रोत: Jamun Variety Goma Priyanka: A boon for Farmers – Indian Council of Agricultural Research (ICAR); ICAR-CIAH Bikaner signs MoAs for propagation and dissemination of varieties of semi-arid fruit – Indian Council of Agricultural Research (ICAR); ICAR-CIAH research achievements: varieties released by CIAH – ICAR-Central Institute for Arid Horticulture, Bikaner; Horticulture: Fruits: Jamun (Species and Varieties) – TNAU Agritech Portal
यह लेख AI की सहायता से तैयार किया गया है। महत्वपूर्ण जानकारी की पुष्टि हर भाग में दिए गए स्रोतों से करें।
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