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गूलर का पेड़ (Ficus racemosa): भारत में कहाँ उगता है और इसे कैसे लगाएं

Ficus racemosa

गूलर का वैज्ञानिक नाम Ficus racemosa है, अंग्रेज़ी में इसे क्लस्टर फ़िग कहते हैं। जानिए गूलर का पेड़ कैसा होता है, इसका फूल क्यों नहीं दिखता, भारत में यह कहाँ मिलता है, इसे कैसे लगाएं, पहले तीन साल देखभाल कैसे करें और किन बातों का ध्यान रखें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गूलर का वैज्ञानिक नाम क्या है?

गूलर का वैज्ञानिक नाम Ficus racemosa L. है, और यह अंजीर व शहतूत कुल (Moraceae) का पेड़ है। कई पुरानी भारतीय किताबों में इसे Ficus glomerata कहा गया है, जिसे क्यू (Kew) की विश्व सूची (GBIF के ज़रिए देखी गई) इसी प्रजाति का पर्यायवाची नाम मानती है।

गूलर के पेड़ को अंग्रेज़ी में क्या कहते हैं?

अंग्रेज़ी में गूलर को क्लस्टर फ़िग (cluster fig) कहते हैं, क्योंकि इसके फल तने पर गुच्छों में लगते हैं; इसे कंट्री फ़िग (country fig) भी कहा जाता है। संस्कृत में इसे उदुम्बर, मराठी में उंबर और तमिल, कन्नड़ व मलयालम में अत्ति कहते हैं (फ़्लावर्स ऑफ़ इंडिया)।

गूलर का पेड़ कैसा होता है?

गूलर टेढ़े तने, चौड़े फैले छत्र वाला मध्यम से बड़ा अंजीर का पेड़ है, जिसके तने और मोटी डालियों से सीधे गोल फलों के गुच्छे निकलते हैं। फ़्लोरा ऑफ़ चाइना के अनुसार इसकी नुकीली पत्तियाँ लगभग 10-14 सेमी लंबी होती हैं और नाशपाती जैसे फल 2-2.5 सेमी चौड़े होते हैं, जो पकने पर लाल-नारंगी हो जाते हैं। बरगद की तरह इसमें लटकती जटाएँ नहीं होतीं, और टहनी तोड़ने पर सफ़ेद दूधिया रस निकलता है।

गूलर का फूल क्यों नहीं दिखता?

गूलर का फूल इसलिए नहीं दिखता क्योंकि इसके फूल फल के अंदर लगते हैं, बाहर नहीं। हर फल एक खोखली थैली जैसा होता है, जिसके अंदर सैकड़ों छोटे फूल होते हैं, और बहुत छोटे अंजीर-ततैये उसके सिरे के एक बारीक छेद से अंदर जाकर उनका परागण करते हैं (फ़्लावर्स ऑफ़ इंडिया)। इसीलिए "गूलर का फूल" हिंदी में बहुत दुर्लभ चीज़ की कहावत बन गया।

गूलर का पेड़ कहां मिलता है?

गूलर भारत के लगभग हर उस हिस्से में मिलता है जहाँ ज़मीन नम रहती है: नदियों, नालों, नहरों और तालाबों के किनारे, नम जंगलों में और गाँवों व मंदिरों के आसपास। राजस्थान में प्लांट्स ऑफ़ राजस्थान इसे जयपुर, अजमेर, कोटा, बूंदी, उदयपुर और सवाई माधोपुर जैसे पूर्वी और दक्षिणी ज़िलों में अपने-आप उगता हुआ दर्ज करता है, थार के रेगिस्तान में नहीं।

गूलर का पेड़ कैसे लगाएं?

बारिश की शुरुआत में लगभग 1 मीटर ऊँचा, स्वस्थ नर्सरी पौधा नम, गहरी मिट्टी में लगाएं, जहाँ बड़े छत्र के लिए जगह हो। हमारे मोटे नियम के अनुसार हर तरफ़ लगभग 60 सेमी का गड्ढा खोदें, उसे अच्छी सड़ी खाद मिली मिट्टी से भरें, पौधा उतनी ही गहराई पर लगाएं जितना थैली में था, थावला बनाएं और ट्री-गार्ड लगाएं। दूसरे बड़े पेड़ों से लगभग 10-12 मीटर दूरी रखें; यह मोटा नियम है, इमारतों से सुरक्षित दूरी नहीं, इसलिए अपने स्थानीय वन या बागवानी कार्यालय से पूछें। बीज से उगाना धीमा और अनिश्चित है: केरल के एक अध्ययन (मैथ्यू और साथी, 2011) में बिना उपचार के केवल 5% बीज उगे, इसलिए नर्सरी का पौधा लगाना आसान है।

गूलर कब लगाना चाहिए?

गूलर मानसून के साथ लगाएं, ज़्यादातर जुलाई या अगस्त में, जब आपके ज़िले में बारिश से मिट्टी अच्छी तरह भीग चुकी हो; ये महीने केवल अंदाज़ा हैं। तमिलनाडु के तट पर, जहाँ मुख्य बारिश उत्तर-पूर्वी मानसून से होती है, अक्टूबर-नवंबर में भी लगा सकते हैं। गर्म, सूखे अप्रैल से जून में न लगाएं।

गूलर पर फल कब आते हैं और यह कितनी तेज़ी से बढ़ता है?

गूलर पर आमतौर पर साल में दो बार फल आते हैं: eFlora of India के अनुसार दिल्ली में एक बार मार्च-अप्रैल में और दूसरी बार बारिश में, और केरल के एक अध्ययन (मैथ्यू और साथी, 2011) में पके फल जून-जुलाई और दिसंबर-जनवरी में दर्ज हुए। उस अध्ययन में पौधे तेज़ी से बढ़े और 7-8 महीने में रोपने लायक हो गए। छोटा पेड़ कितने साल में पहली बार फल देता है, इसकी पक्की जानकारी उपलब्ध नहीं है।

क्या गूलर गमले में लगा सकते हैं?

केवल थोड़े समय के लिए: गूलर बड़ा पेड़ बनता है, मोटे तौर पर 15-20 मीटर ऊँचा, इसलिए गमला ज़मीन में लगाने का इंतज़ार कर रहे छोटे पौधे के लिए ठीक है, स्थायी घर के लिए नहीं। हमें गमले में गूलर उगाने पर कोई भारतीय स्रोत नहीं मिला। घर पर लगाना हो तो इसे ज़मीन में ऐसी जगह लगाएं जहाँ फैलने की जगह हो, और सूखे इलाक़े में पानी के पास।

क्या गूलर का कोई हिस्सा ज़हरीला है?

इसकी विषाक्तता पर पक्की जानकारी नहीं है: हमें इंसानों के लिए गूलर पर किसी ज़हर-नियंत्रण केंद्र या सरकारी स्रोत का आँकड़ा नहीं मिला। दूसरे अंजीर पेड़ों की तरह इसका दूधिया रस त्वचा में जलन कर सकता है, इसलिए छँटाई में दस्ताने पहनें और रस आँखों में न जाने दें। ASPCA अंजीर के पौधों (Ficus प्रजातियों) को आम तौर पर कुत्तों, बिल्लियों और घोड़ों के लिए विषैला बताता है, इसलिए पालतू जानवरों को इसे चबाने से रोकें, और कोई इसका हिस्सा खाकर बीमार लगे तो डॉक्टर या पशु-चिकित्सक को बुलाएं।

स्रोत: Kew World Checklist of Vascular Plants (via GBIF): synonyms of Ficus racemosa (incl. Ficus glomerata Roxb.); GBIF species API: vernacular names of Ficus racemosa (cluster fig, country fig); Flowers of India: Goolar (Ficus racemosa); eFlora of India: Ficus racemosa (names, habitat, two fig crops); Plants of Rajasthan (A. Jangir): Ficus racemosa L. (Rajasthan districts, fig colour, phenology); Flora of China Vol. 5 (eFloras): Ficus racemosa (description, habitat 100-1,700 m); Mathew G., Skaria B.P., Joseph A. (2011). Standardization of conventional propagation techniques for four medicinal species of genus Ficus Linn. Indian Journal of Natural Products and Resources 2(1):88-96; Rekhta Dictionary: guular (idioms gular ka phool, gular ka phool khilna); ASPCA Animal Poison Control: Weeping Fig (Ficus sp.), toxic to dogs, cats and horses

यह लेख AI की सहायता से तैयार किया गया है और GreenEye टीम ने इसे हर भाग में दिए गए स्रोतों से जाँचा है।

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