चंदन (Santalum album): भारत में कहाँ उगता है और इसे कैसे लगाएँ
Santalum album
चंदन (Santalum album) एक अर्ध-परजीवी पेड़ है, जो पास लगे साथी (होस्ट) पौधे के बिना नहीं उग सकता। जानिए सही साथी पौधे के साथ इसे कैसे लगाएँ, राजस्थान समेत भारत में यह कहाँ उगता है, इसे कैसे पहचानें और लाल चंदन से कैसे अलग करें, पहले तीन साल की देखभाल, और क़ानून व चोरी से जुड़ी सावधानियाँ।
चंदन कैसे लगाएँ
चंदन को नर्सरी के पौधे के रूप में, साथी (होस्ट) पौधे के साथ, मानसून की शुरुआत में, धूप वाली और अच्छी जल-निकासी वाली ऐसी जगह लगाएँ जहाँ कभी पानी न भरे।
कब लगाएँ
एक अनुमान के तौर पर, राजस्थान, गुजरात और मध्य भारत में जुलाई या अगस्त में, और दक्षिणी प्रायद्वीप में जून या जुलाई में लगाएँ, जब मानसून से मिट्टी अच्छी तरह गीली हो जाए। ये महीने केवल एक अनुमान हैं, किसी स्रोत का नियम नहीं: अपने ज़िले में बारिश असल में कब आती है, उसी के हिसाब से लगाएँ। अप्रैल से जून के गर्म, सूखे महीनों में न लगाएँ, और जहाँ पाला पड़ता है वहाँ सर्दी में न लगाएँ।
पौधा कैसे चुनें
ऐसा थैली या रूट-ट्रेनर में उगा पौधा ख़रीदें जिसके साथ उसका पहला साथी पौधा पहले से उग रहा हो। ICFRE-IWST अपने पौधे अरहर (Cajanus cajan) या छुईमुई (Mimosa pudica) जैसे छोटे साथी पौधे के साथ उगाता है, और लगभग 6 महीने के, 30–50 सेमी ऊँचे पौधे को अच्छा रोपण पौधा मानता है। बीज का स्रोत ज़रूर पूछें, क्योंकि राजस्थान और गुजरात पर ICFRE का लेख चेताता है कि कुछ निजी नर्सरियाँ अनजान स्रोत के पौधे बेच रही थीं।
साथी (होस्ट) पौधा
Wood is Good में लिखने वाले ICFRE वैज्ञानिक बताते हैं कि नर्सरी का साथी पौधा 1–2 साल तक सहारा देता है, फिर अगले 3–4 साल के लिए एक बीच का साथी पौधा, और उसके बाद एक टिकाऊ साथी पौधा चाहिए। उनके अनुसार राजस्थान में अच्छे साथी पौधे हैं बेर (Ziziphus mauritiana), कुमट (Acacia senegal), बबूल (Acacia nilotica), खेजड़ी (Prosopis cineraria), आंवला और कैसुरीना; ICFRE-IWST 150 से ज़्यादा दर्ज साथी पौधों में करंज (Pongamia pinnata) और मालाबार नीम (Melia dubia) को भी गिनाता है। साथी पौधे की छँटाई करते रहें ताकि वह चंदन के ऊपर कभी छाया न करे (व्यावहारिक सलाह)।
गड्ढा, दूरी और सुरक्षा
- गड्ढा: ICFRE-IWST हर तरफ़ लगभग 50 सेमी के गड्ढे इस्तेमाल करता है; इसे एक मोटा नियम मानें। खोदी गई मिट्टी में अच्छी सड़ी कम्पोस्ट मिलाकर भरें, और पौधे को उतनी ही गहराई पर लगाएँ जितना वह थैली में था।
- साथी पौधे की जगह: उसी गड्ढे में या पास के अलग गड्ढे में; बगीचे के एक अकेले पेड़ के लिए चंदन और साथी पौधे के बीच लगभग 1–2 मीटर की दूरी हमारा मोटा नियम है, ताकि दोनों की जड़ें मिल सकें।
- दूरी: ICFRE-IWST बाग़ों में 4 × 4 मीटर, या बीच में आंवले के साथ 6 × 3 मीटर की दूरी रखता है। ये बढ़ने की जगह के लिए बस एक मोटा अनुमान हैं, घर, दीवार, पाइप या बोरवेल से सुरक्षित दूरी नहीं; जगह कम हो तो अपने स्थानीय वन या बाग़वानी कार्यालय से पूछें।
- गार्ड, आग और छाया: ICRAF के अनुसार मवेशी इसकी पत्तियाँ खाते हैं, और आग और तेज़ धूप छोटे पौधों को मार सकती है; मज़बूत गार्ड, आसपास से साफ़ की गई सूखी घास और पहली गर्मी में हल्की छाया व्यावहारिक सलाह है।
पहले साल की सिंचाई (बस एक मोटा अनुमान)
जड़ों के पास मिट्टी को कुछ सेंटीमीटर नीचे तक जाँचें, जब जड़ों के पास की मिट्टी सूखने लगे तो गहरा पानी दें, बारिश के बाद पानी न दें, और तने के पास कभी पानी खड़ा न होने दें। राजस्थान और गुजरात पर ICFRE का लेख बताता है कि वहाँ गर्मी और सर्दी में सिंचाई सबसे ज़रूरी है, और ड्रिप सिंचाई बाढ़ वाली सिंचाई से बेहतर है। कोई भी अंतराल बस एक मोटा अनुमान है, किसी परीक्षण का नतीजा नहीं: गर्म, सूखे इलाक़े में शायद गर्मी में लगभग हफ़्ते में एक बार और सर्दी में हर दो-तीन हफ़्ते में। साथी पौधे को भी पानी दें।
स्रोत: Vikaspedia (Govt of India / C-DAC): Sandalwood (source: Sandalwood Information System, ICFRE-IWST Bengaluru); ICFRE-IWST Sandalwood Information System: Plantations; ICFRE-IWST Sandalwood Information System: Nursery Technology; Viswanath S., Joshi G., Rathore T.S. Technology Package for Raising Sandal Plantations from Quality Planting Material (QPM) Stock of Sandalwood Seedlings. ICFRE-IWST, Bangalore (undated); ICFRE-IWST (2021). Wood is Good, Grow More, Use More, Vol. 2 Issue 2 (Hegde & Baloch; Rathore et al.; Gunaga et al.; Gujarat case study; Ray & Mishra); Orwa C. et al. (2009). Agroforestree Database 4.0: Santalum album (ICRAF / World Agroforestry)
यह लेख AI की सहायता से तैयार किया गया है और GreenEye टीम ने इसे हर भाग में दिए गए स्रोतों से जाँचा है।
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